
Anurag Dwari: जिन्होंने सत्ता को भाषा का लहजा याद दिलाया
▪️राजेश जयंत▪️
INDORE: राजनीति जब शब्दों की मर्यादा तोड़ दे और सत्ता संवाद की जगह अपमान को हथियार बना ले, तब पत्रकारिता का असली इम्तिहान शुरू होता है। ऐसे समय में कुछ नाम सामने आते हैं, जो सवाल पूछते हैं, जवाब मांगते हैं और सत्ता को यह याद दिलाते हैं कि सार्वजनिक जीवन में भाषा, आचरण और जवाबदेही अनिवार्य है। अनुराग द्वारी ऐसा ही एक नाम है।

▪️पत्रकारिता का लंबा और ठोस अनुभव
▫️अनुराग द्वारी बीते दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया- तीनों माध्यमों में उनका अनुभव रहा है। लंबे समय तक जमीनी रिपोर्टिंग, प्रशासनिक मामलों की समझ और राजनीतिक कवरेज ने उन्हें एक गंभीर और विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित किया है।

▪️शिक्षा और पेशेवर तैयारी
▫️उन्होंने पत्रकारिता की औपचारिक शिक्षा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर से प्राप्त की है और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। यह अकादमिक पृष्ठभूमि उनकी रिपोर्टिंग में स्पष्टता और संतुलन का आधार रही है।
▪️प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ कार्य
▫️अपने करियर में उन्होंने देश की प्रमुख समाचार संस्थाओं के साथ काम किया है। समाचार एजेंसी से लेकर राष्ट्रीय चैनलों तक, उनकी कार्यशैली में तथ्य, संयम और निरंतरता दिखाई देती है। वर्तमान में वे एनडीटीवी में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

▪️खोजी पत्रकारिता और पहचान
▫️अनुराग द्वारी की पहचान खोजी पत्रकारिता से जुड़ी रही है। खासतौर पर मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज घोटाले से जुड़ी उनकी रिपोर्टिंग ने व्यापक प्रभाव डाला। इस काम के लिए उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता सम्मानों में से एक रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता और प्रभाव का प्रमाण है।
▪️भाषा, मर्यादा और सत्ता से सवाल
▫️जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा ‘घंटा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सार्वजनिक मंच पर किया गया, तब अनुराग द्वारी ने जिस संयम और स्पष्टता के साथ सवाल उठाए, वह केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं थी। वह सत्ता को यह याद दिलाने का प्रयास था कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा होती है।
▪️और अंत में••••
▫️अनुराग द्वारी उन पत्रकारों में हैं जो सत्ता से न नजदीकी बनाते हैं, न अनावश्यक टकराव। वे सवाल वहीं रखते हैं जहां जवाब बनता है। उनकी पत्रकारिता यह संदेश देती है कि लोकतंत्र में सत्ता जितनी मजबूत होती है, उसे उतनी ही जवाबदेह भाषा और आचरण अपनाना चाहिए।
आज जब पत्रकारिता पर चुप्पी, दबाव और सुविधा के आरोप लगते हैं, ऐसे समय में अनुराग द्वारी जैसे नाम यह भरोसा देते हैं कि सवाल पूछने वाली पत्रकारिता अभी जीवित है और वही लोकतंत्र की असली ताकत





