
बंगाल का चक्रव्यूह…आखिर किसका अंत…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक की ममता की सत्ता और इसे भेदने की भाजपा की लगातार कोशिश के बीच अब निर्णायक मुकाबले का समय आ गया है। पश्चिम बंगाल की धरती अब चक्रव्यूह बनी नजर आ रही है। महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यहां किसका अंत होने वाला है? ममता बनर्जी की सत्ता का या फिर भाजपा की शाही सियासी कोशिशों का। ममता बार बार यह साबित कर रही हैं कि उन पर सियासी शिकंजा कसना इतना आसान नहीं है जितना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोच रहे हैं। और अगर हठपूर्वक ममता के प्रति निर्ममता दिखाई गई तब भी सियासत में
उनकी बढ़त को कोई नकार नहीं पाएगा। और अगर यही हाल रहा तो शायद ममता की सत्ता के दौरान केंद्रीय एजेंसियां पश्चिम बंगाल में ममता के खिलाफ मामले बनाकर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाएंगी। फिलहाल चक्रव्यूह की रचना तो हो चुकी है, अब इसका नफा-नुकसान किसको होने वाला है यह भविष्य बताएगा।
पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का कैंपेन संभाल रही इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई-पेक) कंपनी पर ईडी की रेड के बाद बीजेपी ही नहीं सीपीआई (एम) और कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग की है। इसी के साथ राष्ट्रपति शासन की चर्चा तेज हो गई है। 8 जनवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और इनकम टैक्स द्वारा इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई-पेक) के कोलकाता ऑफिस और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा गया था। खबर थी कि ये संस्था हवाला से लेन-देन कर रही है। छापे की खबर सुनकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और ईडी अधिकारियों से लोहा ले लिया। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी और वे जब्त दस्तावेज और हार्ड डिस्क साथ ले गईं। आरोप लगाया कि आई-पेक पर छापा मारकर उनकी चुनावी रणनीति का भेद जानने की कोशिश की गई है।ममता बनर्जी की ईडी पर कार्रवाई ने विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है। भाजपा ने इसे संघीय एजेंसी में बाधा करार दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग उठाई।
यह घटना 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई है, जब टीएमसी और भाजपा के बीच जंग चरम पर है।
ईडी की रेड एक फर्जी सरकारी नौकरियों के घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है, जहां कथित तौर पर एक संगठित गिरोह ने लोगों को नौकरियां देने का झांसा देकर ठगा। जांच के दौरान ईडी ने कोल स्कैम से जुड़े फंड्स को आई-पेक तक ट्रेस किया, जो 2022 में कथित रूप से टीएमसी के गोवा चुनाव कैंपेन के लिए इस्तेमाल हुए। आई-पेक के सह-संस्थापक प्रतीक जैन टीएमसी के आईटी सेल हेड भी हैं, और ममता के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार भी। बिहार की जनसुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर ने ही इस संस्था की स्थापना की थी। और ममता का पिछला कैंपेन वे ही संभाल रहे थे। ईडी का दावा है कि रेड के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत ममता ने हथिया लिए। जबकि ममता ने इसे राजनीतिक बदला करार दिया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘नास्टी’ और ‘नॉटी होम मिनिस्टर’ कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी टीएमसी के इंटरनल डेटा, कैंडिडेट लिस्ट और चुनावी स्ट्रैटेजी चुराने की कोशिश कर रही थी। ममता ने खुद फाइल्स और लैपटॉप ले लिए, जो वीडियो में कैद हो गया।
ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जहां आई-पेक और टीएमसी ने भी पिटीशन फाइल की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ईडी की कार्रवाई के दौरान दस्तावेज उठाकर ले जाने के मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सीएम ने कहा कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा होती है कि वह प्रवर्तन निदेशालय जैसे केंद्रीय संस्थानों के साथ सहयोग करे। सीएम मोहन यादव ने कहा कि हम सभी शपथ इसी बात के लिए लेते हैं कि संवैधानिक संस्थाओं के साथ सहयोग करेंगे। लेकिन ऐसे माहौल में यदि स्वयं मुख्यमंत्री इस तरह की हल्की हरकत करें, तो यह उचित नहीं है। एक राज्य की मुख्यमंत्री के नाते से उनका यह कृत्य कतई सही नहीं माना जा सकता।
खैर पश्चिम बंगाल में दृश्य पूरी तरह से फिल्मी था। वास्तव में चक्रव्यूह का यह खेल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच शुरू हो चुका है। ममता बनर्जी बार बार साबित कर रही हैं कि कोई भी चक्रव्यूह उनकी दुर्गति अभिमन्यु जैसी नहीं कर सकता। तो अमित शाह भी धुरंधर हैं और उन्होंने आगे के हालातों पर नजर रखना शुरू कर दिया है। हालांकि चक्रव्यूह का यह खेल किस पर भारी पड़ता है, इसका फैसला 2026 में होना तय है…बंगाल का चक्रव्यूह… इस बार यह बताकर ही जाएगा कि आखिर किसका अंत होना था…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।




