Big News From Chhotu’s Desk: जीतू पर 4 FIR और 4 बार डांट

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Big News From Chhotu’s Desk: जीतू पर 4 FIR और 4 बार डांट

छोटू शास्त्री का कॉलम

चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ लगातार 4 FIR दर्ज हुई। वे इमरती देवी पर अनर्गल बयान देने के अलावा और भी बहुत कुछ बोले और किया भी, जो FIR का कारण बना। यहां तक तो ठीक था। ऐसे मामलों से नेता के लोग खुश होते हैं कि हमारे अध्यक्ष ने हमला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, अफ़सोस की बात ये रही कि कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी ने जीतू पटवारी को 4 बार डांट-फटकार लगाई। उन्हें ये डांट क्यों लगाई गई, इसका अंदाजा पढ़ने वाले खुद लगा सकते हैं। पर, पटवारी जी को डांट महंगी पड़ी। चार तो एफआईआर हुई और चार बार डांट भी पड़ी। यानी हिसाब बराबर हुआ। यह भी तय है की अगर प्रदेश में चार लोक सभा सीट कांग्रेस ने जीत ली तो यह तय है कि पटवारी से प्रिय राहुल बाबा का कोई लाडला नहीं होगा।

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*नागर सिंह के पावर सेंटर न बनने देने का ब्लू प्रिंट तैयार* 

अविभाजित झाबुआ जिले में हमेशा भाजपा का पावर सेंटर झाबुआ हीं रहा है। लेकिन, राजनीतिक हलके में व्यापक चर्चा के अनुसार वर्तमान में लगता है। भाजपा अपना पावर सेंटर अलीराजपुर शिफ्ट करना चाहती है। यही वजह है कि वन मंत्री होने के बावजूद भाजपा ने नागर सिंह की धर्मपत्नी को टिकट दिया।

लेकिन, सवाल यह है कि आखिर नागर सिंह को क्या झाबुआ रतलाम के नेता पावर सेंटर के रूप में स्थापित होने देंगे? क्योंकि, अब संसदीय क्षेत्र के भाजपा नेता ही नागर  सिंह को पावर सेंटर बनते देखकर भाजपा के ही कथित नेता राह में रोड़ा बनने के लिए कमर कस चुके हैं। देखना दिलचस्प होगा कि  यदि लोकसभा का परिणाम भाजपा के अनुकूल नहीं आया, तो नागर सिंह के खिलाफ विरोध के स्वर बुलंद होना तय है। कार्यकर्ताओं की माने तो पावर सेंटर का सपना देख रहे नागर सिंह अपना मंत्री पद भी नहीं बचा पाएंगे। विरोधियों ने ऐसी तैयारी कर रखी है। लेकिन, पत्नी की जीत उनको सुकून लाएगी इसमें संदेह नहीं।

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*राहुल को रास नहीं आया, भूरिया जी का सुझाव* 

नेताओं में एक अजीब गुण पाया जाता है, कि वे राय देने से नहीं चूकते। राय देने का एक ऐसा ही मामला सामने आया। हुआ यूं कि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव की आमसभा लेने जोबट आये थे। सूत्र बताते है कि हेलीकॉप्टर से उतरते ही राहुल ने कांतिलाल भूरिया से पूछा कि स्थानीय मुद्दे क्या है, बताओ! भूरिया जी ने तपाक से कहा आप तो अडानी-अंबानी पर ही बोलें तो अच्छा मैसेज जाएगा। यह सुनकर राहुल थोड़ा हंसे और बोले कि चलो कोई बात नहीं। लेकिन, उस आमसभा में राहुल गांधी ने अडानी-अंबानी का नाम तक नहीं लिया। वे मनरेगा की मजदूरी और आदिवासियों के पलायन पर जरूर बरसे। अब भूरिया जी क्यों अडानी और अंबानी की बुराई सुनना चाहते थे, ये तो नहीं पता, पर इतना जरूर हुआ कि भूरिया जी राहुल के मुंह से उद्योगपतियों की बुराई सुनने का सपना अपने अंचल में सुनने से मरहूम रह गए। अभी तो राय और रायचंद का किस्सा हुआ समाप्त।

*बदनावर की हार में भी जीत है* 

धार लोकसभा क्षेत्र की बदनावर विधानसभा सीट पर हुई जबरदस्त वोटिंग से भाजपा के जिला अध्यक्ष मनोज सोमानी एवं पूर्व उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव छाती चौड़ी करके घूम रहे है। लेकिन, यह समझ से परे है कि कांग्रेस के विधायक भंवर सिंह शेखावत के पट्ठे भी कॉलर ऊंची करके क्यों घूम रहे हैं? अब यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही कि दोनों पार्टियों के तीन नेता उत्साह में क्यों हैं? दरअसल, कांग्रेस के लोगों का मानना है भाजपा को मिलने वाली लीड को सोमानी, दत्तीगांव अपनी अपनी मेहनत बताएंगे और इसके लिए दोनों के खेमे गुना भाग करने में भी लग गए हैं। इधर, शेखावत के समर्थकों का कहना है कि अब अगर भाजपा को लीड मिली, तो भी हमारा फायदा है क्योंकि, सोमानी और दत्तीगांव जीत का श्रेय लेने में एक दूसरे की लापरवाही बतायेंगे यही हमारी जीत है। यानी ये अनूठा पहला मामला है जहां कांग्रेस की ओर से हार में भी जीत का फार्मूला ढूंढा जा रहा है।

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*गोपी के तीर के क्या है मायने!*

इंदौर नगर निगम में हुए घोटाले की जांच करवाने के लिए भाजपा के पूर्व विधायक गोपी नेमा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर धमाकेदार एंट्री की। जब इस मामले में विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जांच कमेटी बना दी। पुलिस ने मुख्य आरोपियों समेत जो इसमे शामिल थे उन्हें पकड़ लिया, इसके बाद गोपी नेमा के इस पत्र के क्या मायने, यह किसी को समझ नहीं आया? भाजपा के राजनीतिक हलकों में इसके पीछे छुपे मंतव्यों ढूंढा जा रहा है। यह भी कहा जा रहा कि ये उच्च विचार गोपी नेमा के ही हैं या इसमें परदे कोई और है! यह भी कहा जा रहा कि लम्बे समय से ‘गोपी भैया’ लाइमलाइट से बाहर थे। पार्टी में उनकी पूछ-परख भी कम होती जा रही थी। ऐसे में कोई तीर चलाना जरूरी भी था। उन्हें मौका मिल गया और उन्होंने उसका फ़ायदा भी उठाया। लेकिन, खबरखोजी यह भी बता रहे है क ये विजयवर्गीय विरोधी खेमे की तरफ से सुनियोजित रणनीति का हिस्सा होकर फेका गया तीर है, जो आगे चलकर राजनीतिक जख्म जरूर देगा।

*और अंत में ..*  

भले ही चीफ सेक्रेटरी का कार्यकाल अभी बाक़ी हो किंतु सूत्रों ने बताया है की अभी से प्रदेश के एक बड़े और शिवराज सिंह सरकार मे उनके बहुत खास रहे एक सीनियर आई ए एस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर अगले चीफ सेक्रेटरी बनने का आश्वासन ले आए हैं।