Wednesday, February 19, 2020

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चंद्रकांत अग्रवाल

वरिष्ठ लेखक पत्रकार कवि। विगत 35 सालों से साहित्य व पत्रकारिता हेतु लेखन। अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों व्याख्यान मालाओं में देश भर में आमंत्रित व सम्मानित। हजारों रचनाएं कई राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं अखबारों में प्रकाशित। 4 स्थानीय अखबारों का संपादन आदि।

मैं जी भर जिया, मैं मन भर मरूं: यथार्थवादी कवि थे अटलजी :भावपूर्ण शब्दांजली

मैं जी भर जिया, मैं मन भर मरूं: यथार्थवादी कवि थे अटलजी :भावपूर्ण शब्दांजली

मीडियावाला.इन। देश  के प्रधानमंत्री के  रूप में मुझे भारतरत्न अटलजी ने  कभी भी उतना  प्रभावित  नहीं किया, जितना कि एक कवि  के रूप में किया।  एक राजनैतिज्ञ होते हुए भी  उनकी  संवेदनशीलता,  पारदर्शिता, नैतिकता,  जिजीविषा बेमिसाल थी, जो  उनकी...

वर्तमान पत्रकारिता व भविष्य की चुनौतियों पर सार्थक चिन्तन

मीडियावाला.इन। पत्रकारिता के पुरोधा पुरूष  स्व. प्रेमशंकर  दुबे के 28 वें वार्षिक पुण्य स्मरण प्रसंग पर जिला पत्रकार संघ इटारसी का "वर्तमान पत्रकारिता व भविष्य की चुनौतियाँ"' विषय पर एक सार्थक चिंतन कदाचित पहली बार इतनी बेबाकी ...

दीवाली पर ही लौटे थे वनवास काटकर राम, ढूंढे अब हर आंख अयोध्या सपना लगता है.

दीवाली पर ही लौटे थे वनवास काटकर राम, ढूंढे अब हर आंख अयोध्या सपना लगता है.

मीडियावाला.इन। दिवाली पर विशेष  घर की गंदगी के साथ  ही अपने दिलों दिमाग की गदगी भी यदि हम  निकाल फेंकें तो हमारा दीपावली का पर्व मनाना सार्थक हो जायेगा। त्रासदी यह है कि हम अपने...

रावण को जलाने के बाद अब स्वयं दीपक बन जलना होगा सबको

मीडियावाला.इन। तभी बुराईयों  के रावण का नाश  हो पायेगा। तभी लोक तंत्र को तमाशा बनने से रोका जा सके गा। तभी  सत्ता तंत्र को जनतंत्र  के प्रति जबावदेह  बनाया  जा सकेगा। रावण  को नहीं रावण वृत्ति को जलाना होगा।...

दशहरे पर रामराज्य का मर्म : आज के जननायकों के कर्म व प्रजा के सब्र का चरमोत्कर्ष 

दशहरे पर रामराज्य का मर्म : आज के जननायकों के कर्म व प्रजा के सब्र का चरमोत्कर्ष 

मीडियावाला.इन। बुराई पर अच्छाई की जीत के महापर्व विजयादशमी पर आज बुराई का प्रतीक माने जाने वाले रावण का पुतला जलाकर हम सब रामराज्य की कल्पना से अपने आपको जबरदस्ती खुश करने का असफल प्रयास करेंगे। असफल मैंनें इसलिए...