Friday, February 21, 2020

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दिनेश मालवीय

जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ पद से सेवानिवृत ,वरिष्ठ साहित्यकार ,गजलकार श्री दिनेश मालवीय का हिंदी ,उर्दू ,अंग्रेज़ी पर समानाधिकार .श्रेष्ठ अनुवादक के रूप में कई महत्वपुर्ण साहित्यिक ,धार्मिक ,सामाजिक ग्रंथों का अनुवाद कर ख्याति एवं सम्मान अर्जित किया सभी विधाओं में लेखनरत 

बापू के बेचारे बंदर

बापू के बेचारे बंदर

मीडियावाला.इन। ज्ञानीजी बैठे-बैठे अचानक जैसे खुद से ही बोले," बापू के बेचारे तीन बंदर". यह कुछ अटपटी-सी बात सुनकर मैंने हँसते हुए पूछा, "क्या हुआ बापू के बंदरों को?".  वह बोले," बहुत दिनों बाद मै दो महीने पहले...

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मीडियावाला.इन। इस दुनिया मे क़दम-क़दम पर अजब-ग़जब क़िरदार मिले कुछ   जीने  को  मरते,  कुछ  मरने   हरदम  तैयार  मिले। सच   के  बंदे   देखे   सच   पर   जीते  सारे  दुख  सहकर उनकी    बदहाली   पर   हँसते   झूठों   के  सरदार   मिले। काजल ...