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अजय साकल्ले

शिक्षा: रसायन शास्त्र में एम. एस. सी.

संप्रति: सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंक प्रबंधक,

जन्म व शिक्षा: खंडवा,

वर्तमान  निवास -इंदौर 

लेखन: कहानी व कविता,

जो मैं व्यक्त हूँ, वही मैं हूँ। कभी कभी जिज्ञासा प्रश्नों का जंजाल बुनती है, और मैं बस उनके उत्तरों की तलाश में जुट जाता हूँ। कुछ के उत्तर मिल जाते हैं तो बाँट लेता हूँ। जब नहीं मिलते, तो उन्हें साफ शब्दों में सबके बीच रख देता हूँ। यही मेरी पहचान हैं। जैसे खोजने पर जाना जीवन भ्रम है, माया है। और वह ऐसे व्यक्त हुआ।

डैनों पर ढूंढते, जीवन विस्तार

डैनों पर ढूंढते, जीवन विस्तार

मीडियावाला.इन। मैं रोम रोम  निर्बन्ध परिंदा, मन मेरा  विस्तृत आकाश, आकाश खोजता  व्योम विहंगम, साथ सूर्य, हम कौन  कहाँ  के वंशज, कहाँ आदि है कहाँ अंत हमारा, समय के डैनों पर, ढूंढते, जीवन विस्तार किनारा,...