Wednesday, January 22, 2020

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अजय बोकिल

जन्म तिथि : 17/07/1958, इंदौर

शिक्षा : एमएस्सी (वनस्पतिशास्त्र), एम.ए. (हिंदी साहित्य)

पता : ई 18/ 45 बंगले,  नार्थ टी टी नगर भोपाल

मो. 9893699939

अनुभव :

पत्रकारिता का 33 वर्ष का अनुभव। शुरूआत प्रभात किरण’ इंदौर में सह संपादक से। इसके बाद नईदुनिया/नवदुनिया में सह संपादक से एसोसिएट संपादक तक। फिर संपादक प्रदेश टुडे पत्रिका। सम्प्रति : वरिष्ठ संपादक ‘सुबह सवेरे।‘

लेखन : 

लोकप्रिय स्तम्भ लेखन, यथा हस्तक्षेप ( सा. राज्य  की नईदुनिया) बतोलेबाज व टेस्ट काॅर्नर ( नवदुनिया) राइट क्लिक सुबह सवेरे।

शोध कार्य : 

पं. माखनलाल  चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में श्री अरविंद पीठ पर शोध अध्येता के  रूप में कार्य। शोध ग्रंथ ‘श्री अरविंद की संचार अवधारणा’ प्रकाशित।

प्रकाशन : 

कहानी संग्रह ‘पास पडोस’ प्रकाशित। कई रिपोर्ताज व आलेख प्रकाशित। मातृ भाषा मराठी में भी लेखन। दूरदर्शन आकाशवाणी तथा विधानसभा के लिए समीक्षा लेखन।  

पुरस्कार : 

स्व: जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी उत्कृष्ट युवा पुरस्कार, मप्र मराठी साहित्य संघ द्वारा जीवन गौरव पुरस्कार, मप्र मराठी अकादमी द्वारा मराठी प्रतिभा सम्मान व कई और सम्मान।

विदेश यात्रा : 

समकाालीन हिंदी साहित्य सम्मेलन कोलंबो (श्रीलंका)  में सहभागिता। नेपाल व भूटान का भ्रमण।

शिर्डी बनाम पाथरी: साईं बाबा के मानवतावाद पर आंच न आए...

शिर्डी बनाम पाथरी: साईं बाबा के मानवतावाद पर आंच न आए...

मीडियावाला.इन। इसे इंसानी फितरत कहें या सियासत की मजबूरी कि वह ‘मालिक’ को भी एक नहीं रहने देती। जिस फकीर साईं बाबा ने ताजिंदगी दुनिया को ‘सब का मालिक’ का संदेश दिया, उसी ‘मालिक’ की जन्मभूमि और कर्मभूमि को...

संवेदना की इस ‘छपाक्’ को वक्त जरूर याद रखेगा !

संवेदना की इस ‘छपाक्’ को वक्त जरूर याद रखेगा !

मीडियावाला.इन। फिल्म बनाना और उसका चलना न चलना, बेशक एक व्यवसाय है, लेकिन कुछ अच्छी और सोद्देश्य फिल्मों का न चलना अथवा कम चलना समाज की संवेदनशीलता और समझ पर भी सवाल खड़े करता है। सवाल ये...

सियासी पतंगबाजी के दौर में भी असली पतंगों का यूं बेखौफ उड़ना...

मीडियावाला.इन। इस देश में बारहों महीने चलने वाली राजनीतिक पतंगबाजी के इस दौर में भी संक्रांति के मौके पर लोग असली पतंग उड़ाना अभी नहीं भूले हैं, यह देखना सचमुच सुखद है। सुखद इसलिए भी है क्योंकि...

एनबीटी में फौजी: लेखक बिरादरी पर पाठकों की जीत का परचम...!

मीडियावाला.इन। देश की सबसे बड़ी सरकारी पुस्तक प्रकाशन संस्था नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) जिसका हिंदी नाम राष्ट्रीय पुस्तक न्यास है, में अहम पदों पर नियुक्तियां वैचारिक आग्रह-दुराग्रहों के कारण तो चर्चा में रही हैं, लेकिन यह पहली...

विपक्ष के सियासी चक्रव्यूह में घिरती जा रही हैं ममता ?

मीडियावाला.इन। लगता है पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रदेश की मुख्‍यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस ( टीएमसी) प्रमुख ममता बैनर्जी की स्थिति महाभारत के अभिमन्यु जैसी होती जा रही है। वो वोटों की छीना झपटी के चक्रव्यूह में लगातार धंसती...

कश्मीर को भी अब ‘ऑन लाइन’ लाना ही होगा

मीडियावाला.इन। संदर्भ भले जम्मू-कश्मीर का हो, लेकिन इसकी व्याप्ति संपूर्ण देश और मानव समाज तक है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा इंटरनेट सुविधा पर मनमानी पाबंदी को लेकर जो फैसला दिया है, वह दूरगामी और गहरा अर्थ...

उफ्, भूख मिटाने उस युवती का जिंदा कबूतर खा जाना...

मीडियावाला.इन। शायद यकीन न हो, लेकिन जो तस्वीर बोलती है, वह भयावह है। झारखंड की राजधानी रांची के सरकारी रिम्स अस्पताल में भूख से कराहती युवती एक जिंदा कबूतर को ही मार कर कच्चा खा जाती है।...

दीपिका की इस ‘छपाक्’ में आखिर किसका प्रमोशन है ?

दीपिका की इस ‘छपाक्’ में आखिर किसका प्रमोशन है ?

मीडियावाला.इन। जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विवि, नई दिल्ली) में हुई भारी हिंसा और उसके बाद हो रहे वार-प्रतिवार की वैचारिक तथा राजनीतिक लामबंदियों से हटकर कुछ नए ट्रेंड भी इस अभूतपूर्व घटना से नमूदार हो रहे हैं। पहला...

ऐसी कहानियां तुम्हें मुसीबत में डालती रहेंगी महक...!

मीडियावाला.इन। किस्सा गोई का मकसद अगर राजनीतिक हो तो इसके लिए भाषा पर गहरी पकड़ और शब्दों की मार समझ होनी बेहद जरूरी है, वरना आलम वही होता है, जो मुंबई में ‘फ्री कश्मीर’ प्ले कार्ड को...

अमेरिका व ईरान के बीच जंग की आहट और भारत की मुश्किलें

मीडियावाला.इन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बदले की कार्रवाइयों के बीच भारत के कई उर्दू अखबारों ने इसे दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की आहट के रूप में देखना शुरू कर दिया है। फिलहाल इसे दूर की कौड़ी...

मौसम के इस बदलते‍  मिजाज को शरारत न समझें..!

मौसम के इस बदलते‍ मिजाज को शरारत न समझें..!

मीडियावाला.इन। पूरा उत्तर भारत इन दिनो सर्दी से सिहर रहा है। बारिश के बाद जिस सर्दी का बेसब्री से इंतजार था, वह ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ के मोड़ में आ गई है। बीते साल में कुछ इसी...

उम्मीदों का गणतंत्र और झांकियों तक फैलता सियासत का जहर....

मीडियावाला.इन। बीते साल की एक ‘उपलब्धि’ यह भी मान लें कि देश में सियासत का जहर अब झांकियों तक फैल गया है। इस बार 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में तीन राज्यों की झांकियों को खारिज...

क्या मानवीय संवेदनाएं भी दलीय निष्ठाओं से तय होनी चाहिए?

मीडियावाला.इन। दुर्भाग्य से यह देश तभी जागता है, जब किसी सरकारी अस्पताल में बड़ी संख्या में मासूमों की मौत होती है। ताजा मामला राजस्थान के कोटा के एक सरकारी अस्पताल जे.के.लोन मातृत्व एवं शिशु अस्पताल का है,...

अब एनपीआर पर भी राजनीतिक घमासान होने के आसार

मीडियावाला.इन। देश में सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) के विरोध और झारखंड में चुनावी हार से बेफिकर मोदी सरकार ने देश में एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) का काम आगे बढ़ाने को मंजूरी दे...

अब ‘राशन एकीकरण’ की तैयारी, क्या हाजमा भी एक होगा?

मीडियावाला.इन। ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’ के बहाने ‘राष्ट्रीय एकीकरण अभियान’ के तहत केन्द्र की मोदी सरकार की सूची में अगला नंबर अब राशन कार्ड का है। इसे सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' नाम दिया है।...

फास्टैग जुनून: अच्छी नीयत के साथ नजाकत भी चाहिए...

मीडियावाला.इन। कोई भी नई व्यवस्था, कितनी भी अच्छी क्यों न हो, बगैर पूरी तैयारी के लागू हो तो हालत फास्टैग जैसी हो जाती है। बीते 15 दिसंबर से पूरे देश में ई टोलिंग की फास्टैग व्यवस्था लागू हो चुकी...

‘दूध’ को ‘जहर’ बनाने वाली दानवता के खिलाफ निर्णायक ‘युद्ध’ जरूरी...

मीडियावाला.इन। जिस देश में (मां के) दूध की शपथ सत्यनिष्ठा के लिए ली जाती हो, उसी देश और खासकर मध्यप्रदेश में दूध के साथ यह अनाचार सचमुच गुस्से से भर देने वाला है। राज्य में पांच महीने...

केवल सावरकर पर हमला कर भारत को कैसे बचाएंगे राहुल गांधी?

केवल सावरकर पर हमला कर भारत को कैसे बचाएंगे राहुल गांधी?

मीडियावाला.इन। मोदी 2.0 कार्यकाल में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की पहली प्रभावी विरोध रैली ‘भारत बचाओ’ से ‘सावरकर हटाओ बनाम सावकर बचाओ’ में कैसे और क्यों तब्दील हो गई, यह राजनीतिशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए रोचक विश्लेषण...

कैब के खिलाफ नौकरशाहों की इस ‘सविनय अवज्ञा’ का अर्थ...

मीडियावाला.इन। संसद से पारित नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) के खिलाफ भड़कती आग और इसे लागू करने के मोदी सरकार की जिद के बीच देश में कुछ नौकरशाहों ने भी इसके विरोध में ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ छेड़ दिया है ।...

‘सरस्वती’ की बलिहारी, हमारी भैंसे भी पाक पर भारी...!

मीडियावाला.इन। नागरिकता संशोधन बिल, एनआरसी, गैंगरेप और दूभर होती प्याज जैसी दिल बैठाने वाली खबरों के बीच दूध सी सफेदी लिए एक खबर यह आई है कि हमारी भैंसे भी पाकिस्तान पर भारी हैं। अमूमन हर मामले में पाकिस्तान...