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हेमंत पाल

तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में संलग्न। नवभारत, नईदुनिया (इंदौर, भोपाल) और जनसत्ता (मुंबई) में कार्य किया। नईदुनिया में लम्बे समय तक चुनाव डेस्क प्रभारी। राजनीतिक और फिल्म और टीवी पत्रकारिता में परीचित नाम। देशभर के अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन। राजनीतिक और फिल्म स्तंभकार। फिलहाल 'सुबह सवेरे' के इंदौर संस्करण में स्थानीय संपादक।


संपर्क : 9755499919

राजनीति में चुनाव प्रचार की असभ्य भाषा!

राजनीति में चुनाव प्रचार की असभ्य भाषा!

मीडियावाला.इन। लोकतंत्र में शब्दों की अपनी मर्यादा होती है? जरुरी नहीं कि प्रतिद्वंदी को गालियां देकर ही वोट कबाड़ने की जुगत जमाई जाए! नेताओं और उनके गुर्गों को ये भाषाई हमले सही लगते हों, पर...

सिनेमा में कास्ट्यूम कला की विरासत का शीर्ष!

सिनेमा में कास्ट्यूम कला की विरासत का शीर्ष!

मीडियावाला.इन।  फिल्मों के बारे में एक सामान्य दर्शक की रूचि उस फिल्म के कलाकार, निर्देशक और संगीतकार को जानने से ज्यादा नहीं होती! वास्तव में दर्शक को इससे ज्यादा जानने की जरूरत भी नहीं है। ऐसे में किसी...

सिर्फ भाजपा नहीं, ये सिंधिया की साख का सवाल!

सिर्फ भाजपा नहीं, ये सिंधिया की साख का सवाल!

मीडियावाला.इन। इन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में छाए हुए हैं। ये उनके राजनीतिक जीवन का सबसे प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव है। उनके 19 विश्वस्त साथियों के बहाने उनकी साख दांव पर लगी है।...

दलबदलुओं और मौकापरस्तों के बीच उपचुनाव की जंग

दलबदलुओं और मौकापरस्तों के बीच उपचुनाव की जंग

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने 28 में से 24 सीटों के उम्मीदवार घोषित कर दिए! बाकी बची 4 सीटों की घोषणा का इंतजार है। जबकि, भाजपा की 3 सीट छोड़कर 25 उम्मीदवार तय हैं,...

परदे के कैनवस पर 'यश' की प्रेमकथाएं!

परदे के कैनवस पर 'यश' की प्रेमकथाएं!

मीडियावाला.इन। जब से हिंदी फिल्म निर्माण का दौर शुरू हुआ, फ़िल्मकारों ने अपनी पसंद और दर्शकों के मिजाज के मुताबिक फिल्म बनाना शुरू किया। शुरूआती दौर में धर्म आधारित कहानियों पर कई फ़िल्में बनी। उस समय 'रामायण' और 'महाभारत'...

गुलजार के गीत यानी शब्दों से चुहलबाजी!

गुलजार के गीत यानी शब्दों से चुहलबाजी!

मीडियावाला.इन।  गुलज़ार फिल्मों के ऐसे गीतकार जिनके गीतों की खनक कुछ अलहदा सी है। उनके गीतों के लफ्ज़ उनके श्वेत परिधान की तरह उजले और ठसकदार आवाज की तरह ठस्की से भरपूर होते हैं। गीतों में छायावाद या...

कांग्रेस को भाजपा की हार में जीत नजर आ रही!

कांग्रेस को भाजपा की हार में जीत नजर आ रही!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की बिसात बिछने लगी है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया पूरी तरह एक्टिव हो गए। उन्होंने चुनावी बिगुल फूंक दिया! वहीं, कांग्रेस ने भी कुछ इलाकों में चुनावी...

'बंदिश बैंडिड' यानी गर्म रेत में ठंडे पानी झरना!

'बंदिश बैंडिड' यानी गर्म रेत में ठंडे पानी झरना!

मीडियावाला.इन। वेब सीरीज के बारे में लोगों में आम धारणा है कि इनमें जमकर हिंसा, अश्लीलता और गाली-गलौच होती है। ये मनोरंजन का ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसमें सबकुछ जायज है। देखा जाए तो ये बात गलत भी...

फिल्मों में बाबाओं और गुरुओं की रंगशाला!

फिल्मों में बाबाओं और गुरुओं की रंगशाला!

मीडियावाला.इन। बॉलीवुड में भी समय-समय पर ऐसी कई फिल्में बनी, जिनमें बाबाओं के अच्छे और बुरे पहलू उजागर किए गए! ये फिल्मों के लिए नया विषय तो नहीं है, पर इसके कलेवर बदलते रहे। कई फिल्मों के कथानक में...

ये कैसा विरोध, स्टार किड्स के खिलाफ नफरत का गुबार!

ये कैसा विरोध, स्टार किड्स के खिलाफ नफरत का गुबार!

मीडियावाला.इन। फिल्म कलाकारों और दर्शदर्शकों के बीच एक अनमोल रिश्ता रहा है। इस रिश्ते को मजबूत करते हुए दर्शक बड़े सितारों के बच्चों को भी बतौर कलाकार स्वीकार करते रहे हैं। ये परंपरा दशकों से चली आ रही है।...

भाजपा के पास मुद्दे नदारद, कांग्रेस के तरकश में बगावत में बुझे तीर!

भाजपा के पास मुद्दे नदारद, कांग्रेस के तरकश में बगावत में बुझे तीर!

मीडियावाला.इन। कांग्रेस और भाजपा में दो साल में दूसरी जंग की तैयारी शुरू हो गई! फर्क सिर्फ इतना है कि 2018 में कुछ चेहरे जो कांग्रेस के पाले में थे, वो अब भाजपा  के साथ ...

कंगना रनौत को गुस्सा क्यों आता है!

कंगना रनौत को गुस्सा क्यों आता है!

मीडियावाला.इन। काफी साल पहले एक फिल्म आई थी 'अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है!' इस फिल्म में अल्बर्ट पिंटो का गुस्सा महज अभिनय था! लेकिन, अभिनेत्री कंगना रनौत को फ़िल्मी गुस्सा नहीं आता! ये बात अलग...

उपचुनाव में कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं!

उपचुनाव में कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं!

मीडियावाला.इन। इन दिनों ये सवाल चर्चा में है, कि विधानसभा की 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव नतीजे क्या होंगे! क्या भाजपा कांग्रेस की सीटों पर कब्ज़ा करने में कामयाब होगी! इसलिए कि इस उपचुनाव ...

राजनीति में छाए राम और कांग्रेस की मज़बूरी!

राजनीति में छाए राम और कांग्रेस की मज़बूरी!

मीडियावाला.इन। राजनीति के बदलते दौर में कांग्रेस के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व मजबूरी बन गया। यही कारण है कि वो अपनी छवि से बाहर निकलने की कोशिश में है। कांग्रेस साबित करना चाहती है, कि राम...

राजनीति और जीवन से मनोरंजन तक में छाए 'राम!'

राजनीति और जीवन से मनोरंजन तक में छाए 'राम!'

मीडियावाला.इन। ये संभवतः पहली बार है कि देश में चारों तरफ माहौल राम से सराबोर है। करीब 5 दशक पुराने विवाद के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर बनने वाले मंदिर का शिलान्यास हो गया। इसे...

विधायकों का विद्रोह और कांग्रेस का वैराग्य भाव!

विधायकों का विद्रोह और कांग्रेस का वैराग्य भाव!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में कांग्रेस का सियासी संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ! जब भी पार्टी उससे उबरने और निष्ठावान के बचे रहने की बात करती है, कोई न कोई विधायक पाला बदलता दिखाई देता है। 22 विधायकों की बगावत के...

भाजपा का सत्ता मोह और उपेक्षित प्रतिबद्धता!

भाजपा का सत्ता मोह और उपेक्षित प्रतिबद्धता!

मीडियावाला.इन। किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं, जो निस्वार्थ भाव से पार्टी और नेताओं के लिए काम करते हैं। वे न तो पद की चाह रखते हैं न प्रतिष्ठा की! लेकिन,...

राजनीतिक वादों और वादाखिलाफी का काला दौर!

राजनीतिक वादों और वादाखिलाफी का काला दौर!

मीडियावाला.इन।   मोहब्बत और राजनीति में कसमों और वादों की बहुत ज्यादा अहमियत होती है। लेकिन, दोनों ही स्थितियों में वादे करने के बाद समझ आता है, कि उन्हें पूरा करना आसान नहीं है। मध्यप्रदेश की राजनीति में भी...

मंत्रिमंडल के असंतुलित विस्तार  में कई समीकरण अधूरे छूटे!  - जातीय और क्षैत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा

मंत्रिमंडल के असंतुलित विस्तार में कई समीकरण अधूरे छूटे! - जातीय और क्षैत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा

मीडियावाला.इन। शिवराजसिंह चौहान के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। 28 नए मंत्री शामिल कर लिए गए। कुछ तय नाम कट गए, तो कुछ नए नाम जुड़ गए। जो विधायक और गैर-विधायक मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किए...

कांग्रेस से आने वालों कार्यकर्ताओं  को भाजपा अब अपने रंग में रंगेगी!

कांग्रेस से आने वालों कार्यकर्ताओं को भाजपा अब अपने रंग में रंगेगी!

मीडियावाला.इन। भारतीय जनता पार्टी ने दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने रंग में रंगने की योजना बनाई है! पार्टी पहले उन्हें अपनी विचारधारा के सेनेटाइजर से सेनेटाइज़ करके उनका राजनीतिक संक्रमण दूर करेगी! फिर उन्हें...