Monday, January 27, 2020

Blog

हेमंत पाल

तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में संलग्न। नवभारत, नईदुनिया (इंदौर, भोपाल) और जनसत्ता (मुंबई) में कार्य किया। नईदुनिया में लम्बे समय तक चुनाव डेस्क प्रभारी। राजनीतिक और फिल्म और टीवी पत्रकारिता में परीचित नाम। देशभर के अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन। राजनीतिक और फिल्म स्तंभकार। फिलहाल 'सुबह सवेरे' के इंदौर संस्करण में स्थानीय संपादक।


संपर्क : 9755499919

भाजपा के गुस्से पर बहुत भारी है  निधि निवेदिता की लोकप्रियता!

भाजपा के गुस्से पर बहुत भारी है निधि निवेदिता की लोकप्रियता!

मीडियावाला.इन। राजगढ़-ब्यावरा की कलेक्टर निधि निवेदिता से भाजपा के नेता बहुत नाराज है। उन्हें ये कलेक्टर खलनायिका नजर आ रही है, जिसने उनके एक कार्यकर्ता को सरेआम थप्पड़ मार दिया। भाजपा इस महिला कलेक्टर के खिलाफ राजगढ़ में हल्ला...

वैचारिक विरोध की राजनीति में निजी रिश्तों की अहमियत!

वैचारिक विरोध की राजनीति में निजी रिश्तों की अहमियत!

मीडियावाला.इन।  वैचारिक विरोध के बावजूद राजनीति में निजी रिश्तों का हमेशा सम्मान किया जाता रहा है। इसलिए कि राजनीति के अपने दायरे होते हैं, उन्हीं दायरों में शिद्दत से ये शिष्टाचार निभाया जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं,...

भूमाफियाओं को तो घेर लिया, सूदखोरों को सरकार कब पकड़ेगी!

मीडियावाला.इन। साठ के दशक में एक फिल्म आई थी 'मदर इंडिया' इसमें गाँव का सूदखोर सुक्खीलाल विधवा नर्गिस से कहता है 'तेरे गहने का तो तू मूल नहीं चुका पाई, अब तेरी उम्र ब्याज लौटाने की भी नहीं रही।...

कमलनाथ की ख़ामोशी में ही छुपी है उनकी ताकत!

कमलनाथ की ख़ामोशी में ही छुपी है उनकी ताकत!

मीडियावाला.इन। कमलनाथ के कम बोलने में ही छुपी है उनकी ताकत!  राजनीति में कोई व्यक्ति कम बोलकर कैसे सफल हो सकता है, ये मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पहले साल में साबित कर दिया।...

वे मुँह चलाने वाले, जिनके पास कोई काम नहीं बचा!

वे मुँह चलाने वाले, जिनके पास कोई काम नहीं बचा!

मीडियावाला.इन।       राजनीति की अपनी एक मर्यादा और संस्कार होते हैं! विपक्षी नेताओं पर भी शाब्दिक हमलों के समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वे किसी की भावनाओं को आहत न करें! ये भी...

सरकार के बदले तेवर से माफियाओं पर कहर बरपा!

सरकार के बदले तेवर से माफियाओं पर कहर बरपा!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में इन दिनों माफिया पर सरकार बहुत सख्त है। यहाँ माफिया का आशय सिर्फ भूमाफिया नहीं है! बल्कि, हर कारोबार में ऐसे धंधेबाजों ने अपनी पैठ बनाई है जिनकी नैतिकता संदिग्ध होती है। लेकिन,...

शिवराज के विरोध से राकेश सिंह के दोबारा अध्यक्ष बनने के आसार!

शिवराज के विरोध से राकेश सिंह के दोबारा अध्यक्ष बनने के आसार!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर पार्टी के अंदर घमासान जारी है। सतह पर शांति नजर आ रही है, पर नीचे जमकर राजनीति चल रही! एक तरफ वर्तमान अध्यक्ष राकेश सिंह को दोबारा अध्यक्ष बनाए...

भाजपा को झाबुआ की हार से कुछ सीखना चाहिए!

मीडियावाला.इन। भारतीय जनता पार्टी के साथ सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि उसे चुनावी हार बर्दाश्त नहीं होती! पार्टी के नेताओं में इतना ज्यादा आत्मविश्वास घर कर गया है, कि उन्हें चुनाव की रणनीति बनाते...

झाबुआ में भाजपा को बाहरी नेताओं की 'मनमानी' ने हरवाया!

झाबुआ में भाजपा को बाहरी नेताओं की 'मनमानी' ने हरवाया!

मीडियावाला.इन। अपनी राजनीतिक जागरूकता और बड़े उलटफेर के कारण झाबुआ हमेशा चर्चा में रहा है। इस बार भी यहाँ वही सब हुआ! झाबुआ उपचुनाव का  नतीजा अप्रत्याशित नहीं रहा। वही हुआ जिसका अनुमान लगाया गया था। वास्तव में ये...

मिलावटी सामान से भरा बाजार, पकड़-धकड़ का पाखंड!

मिलावटी सामान से भरा बाजार, पकड़-धकड़ का पाखंड!

मीडियावाला.इन।                                                 खाद्य विभाग और प्रशासन को नकली मिठाई और मावा त्यौहार के नजदीक आते ही दिखाई देता है! ऐसा साल में दो या तीन बार ही होता है! लेकिन, त्यौहार के बाद सारी सख्ती नदारद हो जाती है! सरकार किसी...

झाबुआ उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए 'अहम्' का मुद्दा!

झाबुआ उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए 'अहम्' का मुद्दा!

मीडियावाला.इन।   झाबुआ में चुनाव प्रचार थम गया! उपचुनाव के लिए दोनों प्रमुख प्रतिद्वंदी पार्टियों की सारी कवायद पूरी कर ली! बाकी जो प्रबंधन बचा है, वो आज रात पूरा हो जाएगा! कांग्रेस और भाजपा दोनों ने चुनाव जीतने...

गोपाल भार्गव के चुनावी भाषण के निहितार्थ समझिए!

गोपाल भार्गव के चुनावी भाषण के निहितार्थ समझिए!

मीडियावाला.इन। भाजपा के कुछ नेताओं ने कमलनाथ सरकार गिराने का शिगूफा छोड़कर ख़बरों में छाए रहने का अचूक फार्मूला ढूंढ लिया है! वे जानते हैं कि राजनीति के मंच से बोली गई, ये लाइनों के सुर्खियां बनने में देर...

कीर्तिमान बनना था पौधरोपण का, बन गया घोटाले का!

कीर्तिमान बनना था पौधरोपण का, बन गया घोटाले का!

मीडियावाला.इन।शिवराजसिंह की भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के किनारों पर पौधारोपण करके विश्व कीर्तिमान बनाने का दावा किया गया था। 2 जुलाई 2017 को एक दिन में 7 करोड़ 10 लाख से ज्यादा पौधे लगाकर 'गिनीस बुक ऑफ़...

अनुशासन की बागड़ लांघते कांग्रेस के मंत्री!

अनुशासन की बागड़ लांघते कांग्रेस के मंत्री!

मीडियावाला.इन।  राजनीति में वैसे तो अनुशासन का कोई मतलब नहीं होता! ये सिर्फ कहने की बात होती है। अब वो समय भी नहीं बचा, जब राजनीति में अनुशासन को गंभीरता से लिया जाता हो! ये बात आजकल कांग्रेस...

'मधु' की चाह में लार टपकाती राजनीति और नौकरशाही!

'मधु' की चाह में लार टपकाती राजनीति और नौकरशाही!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश की राजनीति और नौकरशाही आजकल जिस्मानी लालच की पीड़ा भोग रही है! ये जानते हुए कि ये घृणित लालच वक़्त आने पर ब्याज समेत वसूली करता है, फिर भी लोग इसके मोहपाश से मुक्त नहीं होते! होना...

उम्मीदवार के नाम से तय होगी झाबुआ में जीत!

उम्मीदवार के नाम से तय होगी झाबुआ में जीत!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य में कभी ऐसे राजनीतिक हालात नहीं बने कि दोनों प्रमुख पार्टियों को एक-एक सीट के लाले पड़े हों! सरकार बनाने वाली कांग्रेस भी बहुमत के किनारे पर है! ऐसे में झाबुआ सीट के लिए...

गुटबाजी की गर्मी से दोफाड़ होती कांग्रेस !

गुटबाजी की गर्मी से दोफाड़ होती कांग्रेस !

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब लगा था कि पार्टी के तीनों क्षत्रप सामंजस्य से पाँच साल सरकार चला लेंगे! शुरू में ऐसा लगा भी, पर धीरे-धीरे सामंजस्य का शिखर दरकने लगा! क्षत्रप खुद तो दिल की...

उमंग के इस राजनीतिक दुस्साहस के निहितार्थ को समझिए!

उमंग के इस राजनीतिक दुस्साहस के निहितार्थ को समझिए!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में धार जिले की धारदार राजनीति हमेशा चौंकाती रही है! न सिर्फ कांग्रेस में, बल्कि भाजपा में भी इस जिले से कई मुखर नेता निकले! लेकिन, किसी ने भी अपनी पार्टी का नुकसान करने और राजनीतिक बदतमीजी...

अध्यक्ष के लिए सिंधिया का नाम आने पर किसके पेट में दर्द उठा?

अध्यक्ष के लिए सिंधिया का नाम आने पर किसके पेट में दर्द उठा?

मीडियावाला.इन।  इन दिनों मध्यप्रदेश की कांग्रेस में घमासान मचा है। प्रदेश में पार्टी के नए मुखिया का नाम तय होना है, जो आसान नहीं लग रहा! प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है! ऐसी स्थिति में एक सर्वमान्य...

पुलिस की रेवड़ में काली भेड़ों को ढूंढने की जरुरत!

मीडियावाला.इन। आम आदमी के जहन में बरसों से पुलिस को लेकर एक ख़ास छवि रही है। लोग मानते हैं कि पुलिस सभ्य लोगों की मदद के लिए नहीं होती! क्योंकि, सभ्य लोग पुलिस से डरते...