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ब्राह्मणत्व जन्म नहीं आचरण का विषय

ब्राह्मणत्व जन्म नहीं आचरण का विषय

मीडियावाला.इन। "यदि शूद्र में सत्य आदि उपयुक्त लक्षण हैं और ब्राह्मण में नहीं हैं, तो वह शूद्र शूद्र नहीं है, न वह ब्राह्मण ब्राह्मण। युधिष्ठिर कहते हैं कि हे सर्प जिसमें ये सत्य आदि ये लक्षण मौजूद हों, वह...

अब इससे दर्दनाक/शर्मनाक और क्या? सरकार की हेठी और उसके हनक का डंडा न किसी की विवशता देखता और न उसका मर्म।

अब इससे दर्दनाक/शर्मनाक और क्या? सरकार की हेठी और उसके हनक का डंडा न किसी की विवशता देखता और न उसका मर्म।

मीडियावाला.इन। आज एक खबर ने विचलित कर दिया। मेरे फेसबुक मित्र सीएस तिवारी जी के पुत्र विजय को करोना ने छीन लिया। इस ह्रदयविदारक घटना के कुछ पल बाद ही तिवारी जी के दूसरे पुत्र अजय भी आईसीयू वेंटीलेटर...

प्रेस को 'पेन प्रस्टीट्यूट' किसने बनाया..!

प्रेस को 'पेन प्रस्टीट्यूट' किसने बनाया..!

मीडियावाला.इन। भारत में पहले अखबार 'बंगाल गजट' का निकलना एक दिलचस्प घटना थी। वह 1780 का साल था ईस्ट इंडिया कंपनी वारेन हेस्टिंग के नेतृत्व में मजबूती के साथ विस्तार पा रही थी, तब कलकत्ता उसका मुख्यालय था। कंपनी...

भारत का संविधान: सवाल यह है कि अंबेडकर के अलावा बाकी छह सदस्यों को हम क्यों भूल जाते हैं?

भारत का संविधान: सवाल यह है कि अंबेडकर के अलावा बाकी छह सदस्यों को हम क्यों भूल जाते हैं?

मीडियावाला.इन। बाबा साहब डा.भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का वास्तुकार माना जाता है, संविधान सभा में उनकी विद्वतायुक्त व तार्किक बहसों के आलोक में देखें तो यह बात अपनी जगह दुरुस्त है, लेकिन बड़ा प्रश्न यह कि इस समिति...

जेपी,लोहिया की जुबानी, विन्ध्यप्रदेश के दमन की कहानी..

जेपी,लोहिया की जुबानी, विन्ध्यप्रदेश के दमन की कहानी..

मीडियावाला.इन। "एक दस्तावेजी ऐतिहासिक बुलेटिन जिसे प्रत्येक विन्ध्यवासी को पढ़ना और साझा करना चाहिए..!  जब जयप्रकाश, लोहिया और अशोक मेहता ने विन्ध्य के दमन का मुद्दा विश्व के सामने रखा..और जनक्रान्ति का आवाहन किया"....! --------------- विन्ध्यप्रदेश आज जिंदा...

डा.लोहिया: गांधी को पढ़ा भगत सिंह को जिया

डा.लोहिया: गांधी को पढ़ा भगत सिंह को जिया

मीडियावाला.इन। आज जयंती पर विशेष राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर...

सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा कांशीराम जी को याद करते हुए..

सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा कांशीराम जी को याद करते हुए..

मीडियावाला.इन। यह सही है कि देश में जाति के आधार पर शोषण और अत्याचार हुए हैं। इस सिलसिले ने ही अँबेडकर साहब की प्राणप्रतिष्ठा की और राजनीति में कांशीराम जैसे महानायक को गढ़ा। आज कांशीराम का जन्मदिन है।  ...

चुनावी लोकतंत्र में वोटरों से 'डाटागीरी'..!

चुनावी लोकतंत्र में वोटरों से 'डाटागीरी'..!

मीडियावाला.इन। बंगाल समेत चार राज्यों में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव मेरे लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहे हैं। मीडिया में आने के बाद तो समझिए किसी जश्न से कम नहीं। बिना मगजमारी के विषयवस्तु मिल...

जेपी के आग्रह पर चुनाव लड़ने को तैयार हुए थे नानाजी..।

जेपी के आग्रह पर चुनाव लड़ने को तैयार हुए थे नानाजी..।

मीडियावाला.इन। "दूसरी गुलामी से मुक्ति का आंदोलन परवान पर नहीं चढता यदि जेपी को नानाजी जैसे सारथी नहीं मिले होते।" वैचारिक पृष्ठभूमि  अलग-अलग होते हुए भी जेपी और नाना जी के बीच दुर्लभ साम्य है। जेपी विजनरी थे, नानाजी...

मध्यप्रदेश के नए विधानसभाध्यक्ष गिरीश गौतम इसलिए कुछ अलग,कुछ हटकर

मध्यप्रदेश के नए विधानसभाध्यक्ष गिरीश गौतम इसलिए कुछ अलग,कुछ हटकर

मीडियावाला.इन। श्री गिरीश गौतम चौदहवें विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर शपथ लेंगे। राजनीतिक गुणाभाग के हिसाब से देखा जाए तो यह विंध्य के प्रतिनिधित्व को साधने का उपक्रम है। पिछले साल मार्च में जब से भाजपा की सरकार बनी थी...

मच्छरकांड पर एक पुरानी टीप को पढ़ते हुए!

मच्छरकांड पर एक पुरानी टीप को पढ़ते हुए!

मीडियावाला.इन। हाल ही एक सरकारी गेस्टहाउस मे घटित मच्छर कांड पर अपनी लिखी हुई एक पुरानी टीप याद आ गई। छह सात पहले का वाकया है एक मंत्री को रातभर मच्छरों ने काटा तो सुबह होते ही...

"छत्रपति शिवाजी महाराज का वो ऐतिहासिक पत्र जो औरंगजेब के  कारिंदे गद्दार राजा जय सिंह के नाम था"

"छत्रपति शिवाजी महाराज का वो ऐतिहासिक पत्र जो औरंगजेब के कारिंदे गद्दार राजा जय सिंह के नाम था"

मीडियावाला.इन। आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। छह साल पहले जब "शिवाजी का पत्र मिर्जा राजा जय सिंह के नाम" को केंद्र में रखते हुए महाप्राण निराला की लंबी कविता के संदर्भ के साथ मेरा  एक...

ऩिदा फाजली को याद करते हुए

ऩिदा फाजली को याद करते हुए

मीडियावाला.इन। निदा साहब को इस दुनिया से रुखसत हुए आज के दिन पाँच साल पूरे हो गए। निदा साहब गजल और शाइरी को कोठे की रूमानियत से निकाल कर खेत, खलिहान में गेहूं, धान, और आंगन में तुलसी के...

इस गणतंत्र दिवस पर जरा सोचिएगा!

इस गणतंत्र दिवस पर जरा सोचिएगा!

मीडियावाला.इन। "ऐसी कोई स्वतंत्रता नहीं हो सकती, जो अमूर्त और परम हो। सभी स्वतंत्रताएं तर्कसंगत सीमा का विषय होती हैं, और इसमें जिम्मेदारी भी निहित होती है। एक लोकतंत्र मे हर कोई जनता के प्रति...

इन्हें चिंदियों में हिंदुस्तान चाहिए!

इन्हें चिंदियों में हिंदुस्तान चाहिए!

मीडियावाला.इन। अरुंधती राय को कौन नहीं जानता? चिंदियों का देवता(गाड आफ स्माल थिंग) नामक उपन्यास के लिए इन्हें बुकर पुरस्कार मिला है। इस नाते वे अंर्तराष्ट्रीय बौद्धिक व्यक्तित्व हैं। इन दिनों अपनी पूरी टीम के साथ दिल्ली की सीमाओं...

न जाने किस जहन्नुम से  उतरे हैं 'उफ ये मौलाना'

न जाने किस जहन्नुम से उतरे हैं 'उफ ये मौलाना'

मीडियावाला.इन। पोंगा पंडितों और धर्म गुरुओं के पतन और पाखंड पर लिखना बड़ा आसान है। हिंदू धर्म व संस्कृति पर अमर्यादित टिप्पणियां करना सेकुलरियों के लिए एक फैशन सा है। लेकिन मजाल क्या कि दकियानूस मुल्लाओं और फरेबी मौलानाओं...

सुना आपने! हाय..हाय मोदी मर जा तू

सुना आपने! हाय..हाय मोदी मर जा तू

मीडियावाला.इन। मेरी दादी माँ कहा करती थी- "जेखा जेतनिन गारी मिलति है ओखर उतनै उमिर बढ़ति है तूँ ओखर जवाब भर न दिहे कबौ"। यानी कि जिसको जितनी गालियां मिलती हैं वह उतना ही चिरंजीवी होता है। संतों-कवियों ने...

किसान आंदोलन: कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

किसान आंदोलन: कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

मीडियावाला.इन। कृषि सुधार कानून, उससे उपजे आंदोलन में छिपी हुई मंशा और उससे आगे की बात करें, उससे पहले मेरी अपनी बात। वह इसलिए कि आपनी भी गर्भनाल खेत में गड़ी है। देश में मेरे जैसे साठ...

मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या..!

मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या..!

मीडियावाला.इन। अभी कुछ दिन पहले एक कवि सम्मेलन में जाना हुआ। कभी कविताई भी कर लेता था सो पुराना कवि मानते हुए आयोजकों ने अध्यक्ष बना दिया। संगोष्ठी और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करना बड़ा दुश्कर काम है। सबकी...

इसलिए संकट में है गाँवों का अस्तित्व!

मीडियावाला.इन। स्वतंत्रता के बाद भारतमाता की पुनर्प्राणप्रतिष्ठा का सपना पाले गांधी जी इहलोक से प्रस्थान कर गए। अन्ना समेत सभी समाजसेवी कहते हैं कि आज गांव संकट मेंं हैंं, इस देश को बचाना है तो गांवों को बचाना होगा।...