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रहिमन विपदा हू भली जो थोरे दिन होय..!

रहिमन विपदा हू भली जो थोरे दिन होय..!

मीडियावाला.इन। संकट के समय मनुष्य दार्शनिक बन जाता है। एकांतवास में नाना प्रकार के विचार आते रहते है- सोचो आखिर साथ क्या जाएगा। मुट्ठी बाँधे आया है.. हाथ पसारे जाएगा। आया है तो जाएगा राजा रंक फकीर..।   ...

चौथी बार भी शिवराज इसलिए..!

चौथी बार भी शिवराज इसलिए..!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश से कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का तो जाना पहले दिन से ही तय था, पर इसकी कल्पना तक न थी कि नये मुख्यमंत्री ऐसे भुतहे सन्नाटे में शपथ लेंगे जब पंडाल के ऊपर ...

मध्यप्रदेश में अब क्या..क्यों और आगे..!

मध्यप्रदेश में अब क्या..क्यों और आगे..!

मीडियावाला.इन। पिछले तीन-चार दिनों से जिस तरह भागते भूत की लगोंटियाँ नीलाम हो रहीं थी उससे ही लगने लगा था कि कमलनाथ की कांग्रेस सरकार अब चलाचली की बेरा में है। बहुमत साबित करने के दावे युद्ध...

लोकतंत्र के 'खुनिहाव' में चढ़ गई हमारी रंगपंचमी

मीडियावाला.इन। इस साल होली, फगुआ के बाद रंगपंचमी और बुढ़वा मंगल बिना हो हल्ले चुप्पे से निकल गए। न नगड़िया की तड़तड़ाहट न ढोलक की थाप न हुरियारों की हुड़दंग। अँग्रेजी में एक कहावत है- जब दाँत...

मध्यप्रदेश का पालटिकल ड्रामा अभी आग का दरिया है और डूबके जाना है

मध्यप्रदेश का पालटिकल ड्रामा अभी आग का दरिया है और डूबके जाना है

मीडियावाला.इन। देश के पैमाने पर खबरों में मामले में अमूमन नीरस माने जाने वाले मध्यप्रदेश में होली के दिन ब्रेकिंग खबरों की ऐसी रसवर्षा हुई कि चैनलोंं के प्राइम टाइम से पूरे दिन करोना वायरस, सीएए, दंगे गधे की सींग...

राजमाता से ज्योतिरादित्य तक प्रश्न प्रतिष्ठा का..।

राजमाता से ज्योतिरादित्य तक प्रश्न प्रतिष्ठा का..।

मीडियावाला.इन। ....राजनीति में प्रतीकों और शब्दों का बड़ा महत्व होता है। जिनको यह नहीं मालूम वे 1967 के उस प्रकरण को याद करें जब पचमढ़ी में मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष अर्जुन सिंह के संयोजकत्व में आयोजित   सम्मेलन में...

इनकी टोपी, उनकी चड्डी हुर कबड्डी-कबड्डी-कबड्डी

मीडियावाला.इन। इन दिनों अपने सूबे में राजनीति और मौसम का मिजाज एक सा है। दोनों कब धोखा देदें किसको पता..! घर से निकले टी शर्ट पहनकर लौटे तो निमोनिया हो गया। गए थे भाजपा से मिलकर सेटिंग...

सीएए:अब आगे क्या अब तो और भी दृढ़ता से आगे बढ़ना होगा..!

सीएए:अब आगे क्या अब तो और भी दृढ़ता से आगे बढ़ना होगा..!

मीडियावाला.इन। यह स्वाभाविक ही है कि जब शरीर पर चोट का बड़ा घाव हो जाता है तब फोड़े-फुंसी,सर्दी-जुखाम की तकलीफें दब जाती हैं। दंगे ने सीएए के फिलहाल दबा दिया है। बुधवार को राहुल गांधी उत्तर-पूर्व दिल्ली की राख...

दिग्विजय सिंहः एक अबूझ व्यक्तित्व

दिग्विजय सिंहः एक अबूझ व्यक्तित्व

मीडियावाला.इन। विधानसभा की एक पत्रकार वार्ता में स्पीकर श्रीनिवास तिवारी से पत्रकारों ने पूछा-दिग्विजय सिंह आपको गुरूदेव कहते हैं उनके व्यक्तित्व के बारे में आपकी क्या राय है--? तिवारीजी ने जवाब दिया- एक शब्द में...

डिजिटल इंडिया..तेरी तो.. बस जय हो साँच कहै ता

मीडियावाला.इन। डिजिटल फ्राड..! कंप्यूटर युग की शुरुआत में जो आशंका थी अब यथार्थ है। हजारों-लाखों करोड़ का फ्राड। नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्र्या समेत अन्य फ्राडियों का आधारकार्ड तो जरूर होगा, मोबाइल और पैन के साथ लिंकिंग भी...

अरविंद का ब्रांड केजरीवाल बन जाना!

अरविंद का ब्रांड केजरीवाल बन जाना!

मीडियावाला.इन। हमारे जमाने में एक क्रिकेटर थे गुंडप्पा विश्वनाथ। कमाल के बैट्समैन थे, वे फ्रंटफुट पर आकर शायद ही कभी स्ट्रोक मारते। उनकी खासियत थी अपनी कलाई के कमाल से तूफान की गति से आती गेंद की सिर्फ दिशा...

'राइट टू वाटर' यथार्थ के धरातल पर उतरे तो!

'राइट टू वाटर' यथार्थ के धरातल पर उतरे तो!

मीडियावाला.इन। मंंगलवार को भोपाल के मिंटो हाल (पुरानी विधानसभा) में पानी पर चर्चा हुई, भागीदारों में, मैं भी था। जलपुरुष के नाम से विख्यात राजेन्द्र सिंह राणा की पहल...

राष्ट्र का सांस्कृतिक एकात्म

राष्ट्र का सांस्कृतिक एकात्म

मीडियावाला.इन। पण्डित दीनदयाल उपाध्याय स्वतंत्र भारत के तेजस्वी, तपस्वी व यशस्वी चिन्तकों में से एक हैं। उनके चिन्तन के मूल में लोकमंगल और राष्ट्र का कल्याण सन्निहित है। उन्होंने राष्ट्र को धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का सनातन...

इनके बाप का क्या जाता है!

मीडियावाला.इन। उज्जैन में एक मोहल्ला है फ्रीगंज...। महाकाल की कृपा से बसी विक्रमादित्य की अवंतिका यानी आज के उज्जैन में इस फ्रीगंज मोहल्ले का नाम फ्रीगंज कैसे पड़ा इसकी अपनी कोई कहानी जरूर होगी। लेकिन अपन यह...

राजनीति में शाब्दिक व्यभिचार की हदें..!

मीडियावाला.इन। लोकप्रिय व्यंगकवि माणिक वर्मा की एक कविता की अर्धीली है..इन नीचाइयों की अजब ऊँचाइयाँ..। पैमाना सफलता या उपलब्धि भर नापने का नहीं होता,उसके विलोम को भी आँकने का होता है।   

मुख्यमंत्री जी नर्मदा मैय्या को धन-धरम के धुरंधरों से बचाइये..!

मुख्यमंत्री जी नर्मदा मैय्या को धन-धरम के धुरंधरों से बचाइये..!

मीडियावाला.इन। संदर्भ: नर्मदा महोत्सव मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने भक्तिभाव के साथ माँ नर्मदा के महात्म्य को रेखांकित किया है, लेकिन जनजन की अपेक्षा यही है कि "नर्मदा मैय्या को धन और धरम के उन धुरंधरों से भी मुक्ति...

गणतंत्र की मुंडेर पर बैठे हुए महाजनों से!

गणतंत्र की मुंडेर पर बैठे हुए महाजनों से!

मीडियावाला.इन। क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि रोशन रंगीनियों के जमाने में अपने देश की तस्वीर कुछ ज्यादा ही श्वेत-श्याम बनकर उभर रही है?    भारत के आँगन में ताड़ के...

इस गणतंत्र दिवस पर जरा सोचिएगा!

इस गणतंत्र दिवस पर जरा सोचिएगा!

मीडियावाला.इन। देश में कुछ समूह खुद को संविधान से ऊपर या संविधान को ही नहीं मानते। (माओवादी भी हमारा संविधान कहाँ मानते हैं) इन्हें संसद समेत अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास नहीं। इन्हें न्यायपालिका पर भी अँगुली...

आईएएस का थप्पड़: यह तो लोक की पीठ पर तंत्र का चाबुक है

आईएएस का थप्पड़: यह तो लोक की पीठ पर तंत्र का चाबुक है

मीडियावाला.इन। प्रदर्शन कर रहे राजनीतिक कार्यकर्ताओं को राजगढ कलेक्टर की झन्नाटेदार झपड़, एक मंत्री का सांसद के प्रति उत्श्रृखंलता पूर्ण अहंकार की चर्चा...