Monday, December 09, 2019

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हम फादर जाति के लोग!

मीडियावाला.इन। हम साल में दो बार मातृशक्ति का पर्व नवदुर्गा मनाते हैं। अबोध कुँवारी कन्याओं को साक्षात देवी का अवतार मानकर पूजते हैं।  साल में एक दिन जब मदर्स डे मनाते हैं तब सोशल मीडिया में मातृभक्ति का ऐसा...

राजनीतिक सुचिता की पुरातत्वीय संपदा थे जोशी जी

मीडियावाला.इन। आज जब राजनीति में सुचिता रुई के धूहे में सुई ढूंढने जैसा है ऐसे में कैलाश जोशी जी का जाना लोकतंत्र के कलेजे में हूक देने वाला है। मनुष्य उम्रजयी तो नहीं बन सकता पर उसका...

हवा-पानी में बेइमानी घोलने वालो सुनों!

मीडियावाला.इन। देशभर का अमन चैन हरने वाली दिल्ली की नीद हराम है। वो धुंधकाल से गुजर रही है। हर साल यह और गहन होता जाता है। मैंने मित्र से पूछा तो बोले पता नहीं किनके पापों का फल भोग...

दुनिया में ऐसा वन्यजीव प्रेमी और कहां!

दुनिया में ऐसा वन्यजीव प्रेमी और कहां!

मीडियावाला.इन। इंदिरा गांधी को विरोधी पक्ष भले ही स्वेच्छाचारी व निरंकुश कहे पर यथार्थ में वे बेहद संवेदनशील और करुणा की प्रतिमूर्ति थीं।  निजी उपक्रमों का राष्ट्रीयकरण, प्रीवीपर्स विलोपन, बांग्ला विजय, आपातकाल, आपरेशन स्वर्णमंदिर के लिए उनका नाम...

रिस्क उठा नाम कमा,डर के आगे जीत है!

मीडियावाला.इन। कई विग्यापनों के स्लोगन बड़े प्रेरक होते हैं। बैद्धिक लोग प्रायः इन्हें बाजारू समझकर अपने विमर्श से दूर ही रखते हैं, जबकि एक पंक्ति के कुछ शब्द इनके निबंधों, कविताओं पर बहुत भारी पड़ते हैं। जहाँ...

वनवासी संस्कृति में ही गड़ी है हमारी गर्भनाल!

वनवासी संस्कृति में ही गड़ी है हमारी गर्भनाल!

मीडियावाला.इन। जननायक बिरसा मुंडा जयंती पर विशेष "रामायण कथा वनवासियों के पराक्रम और अतुल्य सामर्थ्य की कथा है, जिसमें उन्होंने राम के नेतृत्व में पूंजीवाद, आतंकवाद के पोषक साम्राज्यवादी रावण को पराजित कर...

इस मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या..!

इस मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या..!

मीडियावाला.इन। अभी कुछ दिन पहले एक कवि सम्मेलन में जाना हुआ। कभी कविताई भी कर लेता था सो पुराना कवि मानते हुए आयोजकों ने अध्यक्ष बना दिया। संगोष्ठी और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करना बड़ा दुश्कर काम है। सबकी...

फैसले ने संविधान के समदर्शी रूप  की प्राणप्रतिष्ठा की है

फैसले ने संविधान के समदर्शी रूप की प्राणप्रतिष्ठा की है

मीडियावाला.इन। भारतीय संविधान सिर्फ ग्रंथरूप में ही समदर्शी, सर्वस्पर्शी नहीं है, व्यवहार रूप में भी है। रामजन्मभूमि प्रकरण पर शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय के पाँच न्यायाधीशों की न्यायपीठ के फैसले के बाद इस अवधारणा की प्राणप्रतिष्ठा हो...

किसको कहेें मसीहा किस पर यकीं करें साँच कहै ता

मीडियावाला.इन। (नोटबंदी दिवस पर विशेष) आज डिहठोन के पर्व पर देश में पुष्यनक्षत्र सा कोई योग बन रहा है। एक कालाधन दिवस मना रहे है, तो दूजे धन का कालादिवस। एक दिन में...

ये पांड़े जी का प्राइमटाइम है.!

ये पांड़े जी का प्राइमटाइम है.!

मीडियावाला.इन। ये कौन..? मीडिया के इस बातूनी चेहरे को भला कौन नहीं जानता.. उस दिन गृहमंत्री द्वारा रफेल की पारंपरिक पूजा में नीबू-मिर्च लगाकर पूरा प्राइम टाइम होम दिया था..। आज सूर्य भगवान की आराधना हेतु छठ की पूजनसामग्री...

इसलिए जानना जरूरी है 'विंध्यप्रदेश' की हत्याकथा

मीडियावाला.इन। हर साल 1 नवंबर की तारीख मेरे जैसे लाखों विंध्यवासियों को हूक देकर जाती है। मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस का जश्न हमें हर साल चिढ़ाता है। जो इतिहास से सबक नहीं लेता वह बेहतर भविष्य को लेकर सतर्क...

इसलिए राष्ट्रवादियों के नायक हैं सरदार पटेल

इसलिए राष्ट्रवादियों के नायक हैं सरदार पटेल

मीडियावाला.इन। पटेल चाहते थे कि पाकिस्तान से सभी हिन्दू सिख निकल आएं। मुसलमानों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं थी क्योंकि उन्हें पाकिस्तान मिल चुका था...। -यदि नेहरू कश्मीर की आशक्ति छोडकर पटेल के फार्मूले पर अड़ जाते तो...

चित्रकूट की चिंता राम हवाले

मीडियावाला.इन। शब्द यदि वाकय में ब्रह्म होते तो इनकी अवहेलना करने वाले सारे पापी आज नरक में होते और इस धरती का बोझ कुछ कम होता। मैं ये इसलिये कह रहा हूँ कि पिछले तीन दशक में भाई लोगों...

प्रश्न विरोध की मर्यादा और स्तर का भी..!

मीडियावाला.इन। डाक्टर राममनोहर लोहिया के व्यक्तित्व के इतने आयाम हैं जिनका कोई पारावार नहीं। उनसे जुडा़ एक प्रसंग प्राख्यात समाजवादी विचारक जगदीश जोशी ने बताया था, जो विपक्ष के विरोध की मर्यादा और उसके स्तर के भी उच्च आदर्श...

पर्वसंस्कृति का द्वंद्वात्मक बाजारवाद

पर्वसंस्कृति का द्वंद्वात्मक बाजारवाद

मीडियावाला.इन। बाजार के ढंग निराले होते हैं। वह हमारी जिंदगी को भी अपने हिसाब से हांकता है। कभी पंडिज्जी लोग तय करते थे कि किस त्योहार को कैसे मनाया जाय अब बाजार तय करता है।  शरद ऋतु के...

शिव परिवार का अनूठा  लोकतांत्रिक समाजवाद

शिव परिवार का अनूठा लोकतांत्रिक समाजवाद

मीडियावाला.इन। गणपत बप्पा घर-घर बिराज गए। क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश गणपतिमय है। बडे़ गणेशजी, छोटे गणेशजी, मझले गणेशजी।  गणेशजी जैसा सरल और कठिन देवता और कौन? लालबाग के राजा के गल्ले में एक अरब का चढावा आया।...

शिक्षानीति को चौराहे की कुतिया बनाने वाले!

शिक्षानीति को चौराहे की कुतिया बनाने वाले!

मीडियावाला.इन। तीज त्योहारों की तरह हर साल शिक्षक दिवस भी आता है। पूजाआराधना में जैसे गोबर की पिंडी को गणेश मानकर पूज लिया जाता है वैसे ही एक दिन के लिए सभी गोबर गणेश बन जाते हैं। यह एक...

जादूगर नहीं, हाकी के वैज्ञानिक थे दद्दा

जादूगर नहीं, हाकी के वैज्ञानिक थे दद्दा

मीडियावाला.इन। खेल के प्रग्या पुरुष मेजर ध्यानचन्द हाकी के जादूगर नहीं.. हाकी के वैग्यानिक थे.. जादूगरी भ्रम में डालने की ट्रिक है..जबकि विज्ञान..यथार्थ ..।   -कैप्टन बजरंगी प्रसाद.. (देश के प्रथम अर्जुन अवार्डी) ने राष्ट्रीय खेल दिवस की...

राम, कृष्ण और स्वाधीनता के मायने

राम, कृष्ण और स्वाधीनता के मायने

मीडियावाला.इन। सावन और भादौं तिथि त्योहारों के महीने हैं। यह सिलसिला डिहठोन तक चलता है। इन्हीं महीनों में एक महान राष्ट्रीय पर्व पंद्रह अगस्त पड़ता है उसके आगे पीछे या कभी-कभी साथ में ही कृष्णजन्माष्टमी आती है।  मुझे...

गौर साहब जैसा कोई और नहीं..!

मीडियावाला.इन। बाबूलाल गौर खुद को कृष्ण का वंशज मानते थे। संयोग देखिए कि हलषष्ठी के दिन उनके जीवन का अंतिम संस्कार हुआ। जब वे मुख्यमंत्री थे तब बलदाऊ जयंती मनाने का कार्यक्रम शुरू किया था, हलषष्ठी को...