Wednesday, January 22, 2020

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स्मृतिशेष/श्रीनिवास तिवारी: वे शेर की सवारी गाँठना जानते थे

स्मृतिशेष/श्रीनिवास तिवारी: वे शेर की सवारी गाँठना जानते थे

मीडियावाला.इन। श्रीयुत श्रीनिवास तिवारीजी के गुजरे हुए दो साल पूरे हो गए। उनसे पाँच साल पहले अर्जुन सिंह जी इहलोक से विदा हुए थे। ये दोनों ही विंध्य की राष्ट्रीय पहचान, इस माटी की आन-बान-शान थे। ये...

माघ सप्तमी:स्वामी रामानंदाचार्य जयंती

माघ सप्तमी:स्वामी रामानंदाचार्य जयंती

मीडियावाला.इन। कल माघ सप्तमी थी स्वामी रामानंद का अवतरण दिवस। जाति-'पाँति पूछै नहिं कोय हरि को भजै सो हरि का होय' का नारा देने वाले इस महान क्रांतिकारी संत को अपन भूल ही गए थे, क्योंकि कहीं कोई आयोजन-प्रयोजन...

किसान की किस्मत और गरीब की अस्मत

किसान की किस्मत और गरीब की अस्मत

मीडियावाला.इन। किसानों की धान खुले में पड़ी है, मौसम का भरोसा नहीं। खरीद केंद्रों में कड़कड़ाती ठंड में वे अपने ट्रैक्टरों के नीचे सोकर रात गुजार रहे हैं। सोसायटी का मैनेजर रोज-ब-रोज यह कहते हुए पल्ला झाड़ लेता है...

हिंदी की नियति और हम पाखंडी लोग

हिंदी की नियति और हम पाखंडी लोग

मीडियावाला.इन। पाँच साल पहले भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया था तब ऐसा लगा था कि सरकार के साथ ही हम प्रदेशवासी सोते जागते इसी की माला जपेंगे। पूरा शहर हिंदी मय, तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वयं...

न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे! वस्तुतः

मीडियावाला.इन। लोकभाषा के बडे़ कवि कालिका त्रिपाठी ने कभी रिमही में एक लघुकथा सुनाई थी। कथा कुछ ऐसी थी कि..दशहरे के दिन ननद और भौजाई एक खेत में घसियारी कर रही थी। घास काटते-काटते बात चल पड़ी.....

सँभल सको तो सँभलो आगे अंधी खोह है.! साँच कहै ता

मीडियावाला.इन। देश में हिंदू-मुसलमान को लेकर आज जो चल रहा है उसे देखते हुए मेरे अवचेतन मन में अपने गाँव के कुछ वाकए, कई निर्दोष किस्से रह-रह कर याद आते हैं..। ढूँढिये आपके इर्द-गिर्द भी ऐसे ही बिखरे मिलेंगे।...

सँभल सको तो सँभलो, आगे..अंधी खोह है.!

मीडियावाला.इन। देश में हिंदू-मुसलमान को लेकर आज जो चल रहा है उसे देखते हुए मेरे अवचेतन मन में अपने गाँव के कुछ वाकए, कई निर्दोष किस्से रह-रह कर याद आते हैं..। ढूँढिये आपके इर्द-गिर्द भी ऐसे ही...

कल क्या होगा, किसको पता!

मीडियावाला.इन। समय की गति के हिसाब से हर नया विहान ही नया वर्ष है। हर क्षण अगले क्षण की पृष्ठभूमि बनता जाता है। सृष्टि के अस्तित्व में आने के बाद से समय की गति ऐसी ही है......

मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए

मीडियावाला.इन। गोपालदास नीरज जी मेरे सदा सर्वप्रिय गीतकार रहे हैं। धर्म-संप्रदाय को लेकर बहस में जब मुझे कोई छोर नहीं मिलता तो उनका एक गीत गुनगुनाने लगता हूँ। इस समस्या का इससे श्रेष्ठ हल और कहीं नहीं...

किसका है देश, हम किसके लिए मरें!

मीडियावाला.इन। इस साल का सोलह दिसम्बर वीर जवानों के पराक्रम और बलिदान को हमने भोपाल के शौर्य स्मारक में दिए जलाकर और रात को रवीन्द्र भवन में कविताएं सुनते हुए मनाया। मानें तो यह दिन देश के...

ये कम्बख्त मन जो जो न करा दे!

मीडियावाला.इन। व्यंग, निबंध, लेख तो रोज पढ़ते हैं, आज मेरा प्रवचन पढ़ें। प्रवचन पवित्र शब्द है जो आत्मसात करने की बजाय दूसरों को सुनाने के काम आता है। काम-क्रोद-मद-मोह-लोभ पर प्रवचन देने वालों में कई आज भले जेल में...

हम फादर जाति के लोग!

मीडियावाला.इन। हम साल में दो बार मातृशक्ति का पर्व नवदुर्गा मनाते हैं। अबोध कुँवारी कन्याओं को साक्षात देवी का अवतार मानकर पूजते हैं।  साल में एक दिन जब मदर्स डे मनाते हैं तब सोशल मीडिया में मातृभक्ति का ऐसा...

राजनीतिक सुचिता की पुरातत्वीय संपदा थे जोशी जी

मीडियावाला.इन। आज जब राजनीति में सुचिता रुई के धूहे में सुई ढूंढने जैसा है ऐसे में कैलाश जोशी जी का जाना लोकतंत्र के कलेजे में हूक देने वाला है। मनुष्य उम्रजयी तो नहीं बन सकता पर उसका...

हवा-पानी में बेइमानी घोलने वालो सुनों!

मीडियावाला.इन। देशभर का अमन चैन हरने वाली दिल्ली की नीद हराम है। वो धुंधकाल से गुजर रही है। हर साल यह और गहन होता जाता है। मैंने मित्र से पूछा तो बोले पता नहीं किनके पापों का फल भोग...

दुनिया में ऐसा वन्यजीव प्रेमी और कहां!

दुनिया में ऐसा वन्यजीव प्रेमी और कहां!

मीडियावाला.इन। इंदिरा गांधी को विरोधी पक्ष भले ही स्वेच्छाचारी व निरंकुश कहे पर यथार्थ में वे बेहद संवेदनशील और करुणा की प्रतिमूर्ति थीं।  निजी उपक्रमों का राष्ट्रीयकरण, प्रीवीपर्स विलोपन, बांग्ला विजय, आपातकाल, आपरेशन स्वर्णमंदिर के लिए उनका नाम...

रिस्क उठा नाम कमा,डर के आगे जीत है!

मीडियावाला.इन। कई विग्यापनों के स्लोगन बड़े प्रेरक होते हैं। बैद्धिक लोग प्रायः इन्हें बाजारू समझकर अपने विमर्श से दूर ही रखते हैं, जबकि एक पंक्ति के कुछ शब्द इनके निबंधों, कविताओं पर बहुत भारी पड़ते हैं। जहाँ...

वनवासी संस्कृति में ही गड़ी है हमारी गर्भनाल!

वनवासी संस्कृति में ही गड़ी है हमारी गर्भनाल!

मीडियावाला.इन। जननायक बिरसा मुंडा जयंती पर विशेष "रामायण कथा वनवासियों के पराक्रम और अतुल्य सामर्थ्य की कथा है, जिसमें उन्होंने राम के नेतृत्व में पूंजीवाद, आतंकवाद के पोषक साम्राज्यवादी रावण को पराजित कर...

इस मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या..!

इस मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या..!

मीडियावाला.इन। अभी कुछ दिन पहले एक कवि सम्मेलन में जाना हुआ। कभी कविताई भी कर लेता था सो पुराना कवि मानते हुए आयोजकों ने अध्यक्ष बना दिया। संगोष्ठी और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करना बड़ा दुश्कर काम है। सबकी...

फैसले ने संविधान के समदर्शी रूप  की प्राणप्रतिष्ठा की है

फैसले ने संविधान के समदर्शी रूप की प्राणप्रतिष्ठा की है

मीडियावाला.इन। भारतीय संविधान सिर्फ ग्रंथरूप में ही समदर्शी, सर्वस्पर्शी नहीं है, व्यवहार रूप में भी है। रामजन्मभूमि प्रकरण पर शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय के पाँच न्यायाधीशों की न्यायपीठ के फैसले के बाद इस अवधारणा की प्राणप्रतिष्ठा हो...

किसको कहेें मसीहा किस पर यकीं करें साँच कहै ता

मीडियावाला.इन। (नोटबंदी दिवस पर विशेष) आज डिहठोन के पर्व पर देश में पुष्यनक्षत्र सा कोई योग बन रहा है। एक कालाधन दिवस मना रहे है, तो दूजे धन का कालादिवस। एक दिन में...