Blog

बदला तो काफी कुछ है यदि देखना चाहें तो

बदला तो काफी कुछ है यदि देखना चाहें तो

मीडियावाला.इन। मोदी 2.0 के एक साल पूरा होने का जश्न करोना खा गया। कुलजमा छह सालों में यह छठवां साल धमाके का रहा। ऐसे काम हुए जो युगांतकारी हैं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि कश्मीर का मसला...

एक सेनापति ऐसा भी जिसने तलवार की जगह कलम चुना

एक सेनापति ऐसा भी जिसने तलवार की जगह कलम चुना

मीडियावाला.इन। 30 मई 1826 के दिन कलकत्ता से पं.जुगुल किशोर शुक्ल के संपादन में निकले हिन्दी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड ने हिन्दी पत्रकारिता की राह को देश भर में आलोकित किया।  समाजिक क्रांति की आकांक्षा पाले...

करोना काल और उसके बाद का मीडिया

करोना काल और उसके बाद का मीडिया

मीडियावाला.इन। करोना के लाकडाउन ने जिंदगी को नया अनुभव दिया है, अच्छा भी बुरा भी। जो जहां जिस वृत्ति या कार्यक्षेत्र में है उसे कई सबक मिल रहे और काफी कुछ सीखने को भी। ये जो सबक और सीख...

भ्रष्टाचार, सचमुच भगवान की तरह सर्वव्यापी है, कण-कण में, क्षण-क्षण में,सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी को स्मरण करते हुए!

भ्रष्टाचार, सचमुच भगवान की तरह सर्वव्यापी है, कण-कण में, क्षण-क्षण में,सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी को स्मरण करते हुए!

मीडियावाला.इन। शरद जोशी ने कोई पैतीस साल पहले हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे व्यंग्य निबंध रचा था। तब यह व्यंग्य था, लोगों को गुदगुदाने वाला। भ्रष्टाचारियों के सीने में नश्तर की तरह चुभने वाला।  अब यह व्यंग्य, व्यंग्य...

पुण्य स्मरण : राजनीति में त्रिबिध बयार थे अनिल दवे जी

पुण्य स्मरण : राजनीति में त्रिबिध बयार थे अनिल दवे जी

मीडियावाला.इन। नर्मदा के नीर की तरह निर्मल निश्छल और पुराणकालीन अमरकंटक में बहने वाली त्रिबिध (शीतल,मंद,सुगंध) बयार से थे अनिल माधव दवे..जी हां उन्हें देखकर यही छवि उभरती थी।  मैं उनके निकट...

साँप से डरें नहीं, जहर की तिजारत करना सीख लें!

मीडियावाला.इन। डेल कारनेगी जीवन प्रबंधन के विश्वविख्यात गुरू माने जाते हैं। उनकी दो पुस्तकें- लोक व्यवहार व चिंता छोड़ों सुख से जियो..के नाम सबसे ज्यादा बिकने और पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में है। इन पुस्तकों की विशेषता...

'दीपनिष्ठा’ को जगाओ अन्यथा मर जाओगे

मीडियावाला.इन। यह घड़ी बिल्कुल नहीं है शांति और संतोष की, ‘सूर्यनिष्ठा’ सम्पदा होगी गगन के कोष की। यह धरा का मामला है घोर काली रात है, कौन जिम्मेदार है यह सभी को ज्ञात है। रोशनी की खोज में किस...

व्यापक लोकहित ही पत्रकारिता का नारदीय सूत्र!

व्यापक लोकहित ही पत्रकारिता का नारदीय सूत्र!

मीडियावाला.इन। मनुष्य चाहे दुर्जन हो या सज्जन, सत्य हमेशा उसकी आँखों में भटकटैया की भाँति गड़ता है। स्तुति देवताओं को भी पसंद थी और दानवों को भी। यहां नेता भी स्तुतिजीवी है और खलनेता भी। इसलिए वहां देवर्षि नारद...

साजिश की कोख से जन्मा है चीनी वायरस करोना!

साजिश की कोख से जन्मा है चीनी वायरस करोना!

मीडियावाला.इन। चीन में एक दार्शनिक थे सुन त्जू। बहुत पहले वहां के शासकों को एक मंत्र दिया था- युद्ध के बगैर शत्रु को हराना ही सबसे उत्तम कला है और यह कला आर्थिक ताकत से सधती है। करोना ने...

हकीकत और फसाने के बीच 'मीडिया बाजार'

हकीकत और फसाने के बीच 'मीडिया बाजार'

मीडियावाला.इन। भारत में पहले अखबार 'बंगाल गजट' का निकलना एक दिलचस्प घटना थी। वह 1780 का साल था ईस्ट इंडिया कंपनी वारेन हेस्टिंग के नेतृत्व में मजबूती के साथ विस्तार पा रही थी, तब कलकत्ता उसका मुख्यालय...

दर्द के रिश्तों की बुनियाद पर हमारा भविष्य

मीडियावाला.इन। देखते- देखते काफी कुछ बदल गया, दो महीने के ही भीतर। रहन-सहन, नाते-रिश्ते, जीवनदृष्टि, जल-थल-नभ का वातावरण। संकट ऐसी कसौटी है जिससे कसकर निकला मनुष्य भविष्य में धोखा नहीं खाता..। संकट की पाठशाला से जो सबक...

धन्य वह भूमि जहां साक्षात् शंकर के चरण पड़े

धन्य वह भूमि जहां साक्षात् शंकर के चरण पड़े

मीडियावाला.इन। भगवान शंकराचार्य अवतरण दिवस अपने देश की सनातन संस्कृति के अविरल प्रवाह की प्रशस्ति के लिए सर्वप्रिय गीत.. सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा की एक पंक्ति है- कुछ बात है कि...

ब्राह्मणत्व जन्म नहीं आचरण का विषय

ब्राह्मणत्व जन्म नहीं आचरण का विषय

मीडियावाला.इन। "यदि शूद्र में सत्य आदि उपयुक्त लक्षण हैं और ब्राह्मण में नहीं हैं, तो वह शूद्र शूद्र नहीं है, न वह ब्राह्मण ब्राह्मण। युधिष्ठिर कहते हैं कि हे सर्प जिसमें ये सत्य आदि ये लक्षण मौजूद...

धरती माता को बुखार, है कोई सुनने वाला

धरती माता को बुखार, है कोई सुनने वाला

मीडियावाला.इन। इस साल धरतीमाता को पूरे साल शरद-गरम रहा। जब हम धूप की उम्मीद करते तो पानी गिरता। जब चाहते कि इंद्रदेव खेती पर कृपा करें तब आसमान से आग बरसती। कभी आँधी-तूफान, तो कभी ओला-पाला। धरती माता की...

विपत्ति में भी बैर भँजाने वालों की सजा क्या हो!

विपत्ति में भी बैर भँजाने वालों की सजा क्या हो!

मीडियावाला.इन। टाइटैनिक फिल्म आपने भी देखी होगी, ग्लैशियर से टकराकर डूबते हुए जहाज़ की कहानी। किशोर प्रेम की मूलकथा के साथ विपत्तिकाल में भी जहाज़ के भीतर कई उपकथाएं चलती है। जहाज के डेक पर आर्केस्ट्रा अपने धुन में...

बहरहाल मीडियावाला.. मीडियावाला है..हाल फिलहाल अतुलनीय.. मैचलेस..एलोन

बहरहाल मीडियावाला.. मीडियावाला है..हाल फिलहाल अतुलनीय.. मैचलेस..एलोन

मीडियावाला.इन। सोशल मीडिया के भेडियाधसान दौर में 'मीडियावाला' हम जैसे बहुतों के लिए उसी तरह है जैसे मेले में सही ठीहे की पहचान बताने वाली ध्वजा। इस वेबसाइट के...

"बजरंगबली हम गरीब गुरबों के अभिभावक हैं। लिखने पढ़ने वालों के प्रेरक हैं। वे भगवान नहीं वास्तव में सद्गुरु हैं"

"बजरंगबली हम गरीब गुरबों के अभिभावक हैं। लिखने पढ़ने वालों के प्रेरक हैं। वे भगवान नहीं वास्तव में सद्गुरु हैं"

मीडियावाला.इन। कृपा करहुँ गुरुदेव के नाईं प्रकटोत्सव अपन के गुरदेव बजरंग बली हैं। गोस्वामी जी कह गए.. अउर देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्व सुख करई। गोसाईं जी के लिए बजरंगबली देवता,...

जो खबरों में नहीं आ पाते .... जरा इन पर नजर डालों अरे ओ रोशनी वालो..!

जो खबरों में नहीं आ पाते .... जरा इन पर नजर डालों अरे ओ रोशनी वालो..!

मीडियावाला.इन। यह कहानी है... सतना की एक जाँबाज लड़की मांडवी गुप्ता की जो शहर में घर घर अखबार बाँटती थी, यानी कि हाकर थी। हमने 'स्टार समाचार' के वर्ष 2013 के 26 मार्च के अंक में प्रकाशित की थी।...

रहिमन विपदा हू भली जो थोरे दिन होय..!

रहिमन विपदा हू भली जो थोरे दिन होय..!

मीडियावाला.इन। संकट के समय मनुष्य दार्शनिक बन जाता है। एकांतवास में नाना प्रकार के विचार आते रहते है- सोचो आखिर साथ क्या जाएगा। मुट्ठी बाँधे आया है.. हाथ पसारे जाएगा। आया है तो जाएगा राजा रंक फकीर..।   ...

चौथी बार भी शिवराज इसलिए..!

चौथी बार भी शिवराज इसलिए..!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश से कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का तो जाना पहले दिन से ही तय था, पर इसकी कल्पना तक न थी कि नये मुख्यमंत्री ऐसे भुतहे सन्नाटे में शपथ लेंगे जब पंडाल के ऊपर ...