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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


संपर्क : 8989789896

धुंधली यादें : तब सेकंडहैंड साइकिल ₹125 में ली थी और 1984 के सिख दंगों की भेंट चढ़ गई मेरी साइकिल भी

धुंधली यादें : तब सेकंडहैंड साइकिल ₹125 में ली थी और 1984 के सिख दंगों की भेंट चढ़ गई मेरी साइकिल भी

मीडियावाला.इन। अपनी आंखों के सामने भी सवा सौ रु में खरीदी वो सेकंडहैंड साइकिल घूम गई जब गूगल पर ‘वर्ल्ड साइकिल डे-3जून’ की जानकारी देखी। उस लेडीज साइकिल के पहिये की तरह यादों की चकरी भी घूम गई....। ...

समझिए प्लाजमा थैरेपी: प्लाजमा छानकर वापस डोनर को चढ़ा दिया जाता है ब्लड…

समझिए प्लाजमा थैरेपी: प्लाजमा छानकर वापस डोनर को चढ़ा दिया जाता है ब्लड…

मीडियावाला.इन। कीर्ति राणा की विशेष रिपोर्ट यदि आप कोरोना संक्रमित होने के बाद लड़ाई में विजयी योद्धा साबित हो चुके हैं तो इस महामारी से जूझ रहे मरीजों के लिए आप जीवनदाता भी...

लॉक डाउन: खुलेगा जरूर पर उतना खुला खुला थोड़ी होगा !

लॉक डाउन: खुलेगा जरूर पर उतना खुला खुला थोड़ी होगा !

मीडियावाला.इन। बकरे की मां आखिर कब तक खैर मनाएगी कि तर्ज पर मई नहीं तो जून में तो लॉकडाउन खोलना ही पड़ेगा। आखिर सरकार और कलेक्टर भी कोरोना से ज्यादा लॉकडाउन पर लोगों की नाराजी कब तक झेलेंगे। स्वाइन फ्लू...

शरद जी ने तो मना किया था बंबई मत छोड़ो.....

शरद जी ने तो मना किया था बंबई मत छोड़ो.....

मीडियावाला.इन। ये किस्सा है सन 1982 नवंबर महीने का...मुंबई (तब बंबई) में हिंदी ‘करंट’ साप्ताहिक से मैं 1 दिसंबर से कामनहीं करने संबंधी इस्तीफा दे चुका था। तब शरद जी इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की पत्रिका ‘हिंदी एक्सप्रेस’ केसंपादक हुआ ...

दद्दा जी भी पार्थिव शिवलिंग हो गए.....

दद्दा जी भी पार्थिव शिवलिंग हो गए.....

मीडियावाला.इन। गृहस्थ संत शायद इसीलिए कहा जाता है कि इस श्रेणी वाले संत घर-गृहस्थी के साथ रहते हुए धर्म-कर्म की राह पर चलते रहते हैं।कबीर, तुकाराम आदि संत इसी परंपरा के तो रहे हैं। सिंहस्थ...

रतन खत्री का सट्टा मैंने भी खूब लगाया

रतन खत्री का सट्टा मैंने भी खूब लगाया

मीडियावाला.इन। अरे..! सट्टा किंग रतन खत्री का निधन हो गया....मुझे दशकों पहले के दिन याद आगए। ‘प्रभात किरण’ पहले साप्ताहिक अखबार था। किशनराव उस्ताद जो मुंह बोले किशन मामा थे, मुझे प्यार से किरन कहा करते थे। उन्होंने झाडू...

देश में किसी आयएएस की राजनीति में एंट्री का गवाह रहा है इंदौर अर्जुन सिंह ने नेता बनाया अजित जोगी को

देश में किसी आयएएस की राजनीति में एंट्री का गवाह रहा है इंदौर अर्जुन सिंह ने नेता बनाया अजित जोगी को

मीडियावाला.इन। इंदौर कलेक्टरों में सर्वाधिक लोकप्रिय कलेक्टर हुए नरेश नारद और उनकी ही तरह अजित जोगी भी शहर से गांवों तक लोकप्रिय रहे।ऐसा नहीं कि इनके बाद कलेक्टर नहीं आए पर इन के कार्य-व्यवहार की तरह उतने...

छात्रों के बाद अब अन्य राज्यों में फंसे हजारों मजदूरों को वापस लाने में जुटी है सरकार •••

छात्रों के बाद अब अन्य राज्यों में फंसे हजारों मजदूरों को वापस लाने में जुटी है सरकार •••

मीडियावाला.इन। इंदौर कीर्ति राणा।कोटा में एजुकेशन के लिए गए प्रदेश के सैकड़ों छात्रों को वापस लाने के बाद कोरोना कहर के बाद से मध्य प्रदेश के उन हजारों मजदूर परिवारों को वापस लाने के लिए भी सरकार ने अपने...

माइक्रो प्लानिंग और डेथ एनालिसिस से रोका जा सकता है महामारी को फैलने से ••••स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया, डेंगू, कालरा पर काबू पाया था इसी प्लानिंग से

माइक्रो प्लानिंग और डेथ एनालिसिस से रोका जा सकता है महामारी को फैलने से ••••स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया, डेंगू, कालरा पर काबू पाया था इसी प्लानिंग से

मीडियावाला.इन। इंदौर कीर्ति राणा।तेजी से फैलने वाले कोरोना की गति बाधित करने में कलेक्टर मनीष सिंह ने एक हद तक सफलता पाई है लेकिन यदि स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से चली आ रही माइक्रो प्लानिंग और हर मरीज की...

काश ! कोरोना कार्यकर्ताओं के लिए भी होते पर्याप्त इंतजाम

काश ! कोरोना कार्यकर्ताओं के लिए भी होते पर्याप्त इंतजाम

मीडियावाला.इन। एक तो पहले ही झाड़ू आधी हो चुकी थी और इस लॉकडाउन के चलते दूसरी झाड़ू का विकल्प ना होने से कचरा साफ करने का सारा दबाव उस पर ही पड़ गया।फिर भी वह काम आ...

अंबानी वाली दुनिया अभी तो कोरोना की मुट्ठी में!

अंबानी वाली दुनिया अभी तो कोरोना की मुट्ठी में!

मीडियावाला.इन। याद है ना धीरुभाई अंबानी ने 2002 में आर कॉम लांच की थी और रिलायंस समूह ने ‘कर लो दुनिया मुट्ठी में’ के स्लोगन के साथ मोबाइल की दुनिया में तहलका मचा दिया था। इन 18...

ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

मीडियावाला.इन। मुंह पर दुपट्टा लपेटे या हिजाब पहने जब लड़कियां घूमा करती थीं तो इन्हें देखने वालों की चाहत होती थी किसी एक का चेहरा तो नजर आए। वो चांद से चेहरे तो एटीएम से पैसा निकालते भी नहीं...

युद्ध में चीन को हराया लेकिन भारत ने देश को नहीं बताया

युद्ध में चीन को हराया लेकिन भारत ने देश को नहीं बताया

मीडियावाला.इन। भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध में भारत की पराजय तो सब को पता है लेकिन 1967 में भारत केहाथों चीन बुरी तरह पराजित भी हुआ है, इस जीत के कहीं दस्तावेज उपलब्ध ...

सांसद शंकर लालवानी: दोस्तों ने बर्थ डे पर खिला दी थी भांग वाली   मिठाई !

सांसद शंकर लालवानी: दोस्तों ने बर्थ डे पर खिला दी थी भांग वाली मिठाई !

मीडियावाला.इन। शिवरात्रि की धूम हो, नाम भी शंकर हो, जन्मदिन भी इस महापर्व पर हो तो महादेव की प्रिय भांग का भोग न लगे ऐसा संभव है क्या? सांसद शंकर लालवानी बीते वर्षों के अपने जन्मोत्सव के ...

तुम्हारे बिना कैसे बीता साल, किसे सुनाएं दिल का हाल

तुम्हारे बिना कैसे बीता साल, किसे सुनाएं दिल का हाल

मीडियावाला.इन। वही चौराहे, वही गलियां, वही संगीत की महफिलें, वही भंडारे, वही भजन संध्या के आयोजन, वही शादी समारोह, शवयात्रा-उठावने, चाय की चर्चा वाले वही सारे ठीये और वही शहर...। बस कमी है तो इस शहर की पहचान बन...

बैसाखी पर चलते हुए दौड़ा रहे हैं रंगकर्म को

बैसाखी पर चलते हुए दौड़ा रहे हैं रंगकर्म को

मीडियावाला.इन। करीब 25 साल पहले शिवाजी वाटिका के समीप हीरो होंडा पर जा रहे रंगकर्मी सुशील गोयल ट्रक की टक्कर में घायल हो गए थे।तब से शरीर का निचला हिस्सा निष्क्रिय है। शारीरिक पीड़ा के बाद भी नाटकों का...

हां मैं मिला था हाजी मस्तान से !

हां मैं मिला था हाजी मस्तान से !

मीडियावाला.इन। हां मैं कुबूल करता हूं कि मुंबई के डॉन रहे हाजी मस्तान से मैं मिला था।यह मुलाकात इंदौर में ही हुई थी।शायद 33-34 साल पहले 1986 में।  गौर करने लायक यह कि जिला प्रशासन और पुलिस की खुफिया...

भोपाल के डॉ सुरेश मेहरोत्रा जैसा और कोई दूसरा पत्रकार है क्या?

भोपाल के डॉ सुरेश मेहरोत्रा जैसा और कोई दूसरा पत्रकार है क्या?

मीडियावाला.इन। मीडिया हाउस जब भरपूर कमाई के बाद भी अपने संस्थानों से जुड़े पत्रकारों की स्वास्थ्य बेहतरी के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहे हों, दशकों तक एक ही संस्थान में सेवा के बाद रिटायर हुए कर्मियों के निधन...

बाप रे...! इन आचार्य श्री को ठंड नहीं लगती?

बाप रे...! इन आचार्य श्री को ठंड नहीं लगती?

मीडियावाला.इन। घना कोहरा ऐसा कि लॉन में पेड़ बनने की राह पर बढ़ रहे घनेरे पौधों की पत्तियों से भी ठंडी बूंदे टपक रही थी। पेपर उठाकर तेजीसे दरवाजा बंद कर दिया कि कहीं पीछा करता कोहरा...

नए साल में पद से बढ़ सकता है विजयवर्गीय का कद

मीडियावाला.इन। आने वाला नया साल कैलाश विजयवर्गीय का राजनीतिक कद बढ़ाने वाला हो सकता है, इसकी संभावना अधिक है।बहुत संभव है उन्हें नड्डा की जगह कार्यकारी अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री का दायित्व या कुछ महीनों बाद राज्यसभा में भेज दिया...