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निरुपमा खरे

निरुपमा खरे यदाकदा लिखते हुए अपने भाव अपने विचार हम तक अपने फेसबुक पोस्ट से रखती है .सजग ,भारतीय संस्कारों की संरक्षक कलात्मक अभिरुचि की सोशल मिडिया लेखक और कवि है ,भोपाल में रहती है .

पर हे मेरे प्रभु..... ज़रा आहिस्ता

पर हे मेरे प्रभु..... ज़रा आहिस्ता

मीडियावाला.इन। हे मेरे प्रभु.... तेरा जादू चल गया। इस जहान की सड़कें खाली हो गईं हैं। सारे आलम में शुद्ध हवा का झोंका चल रहा है। सारे पेड़ पोधे हवा में झूम रहे हैं। समुंदर में चलने वाली बड़े...