
73 डिप्टी रेंजर को रेंजर का प्रभार देने का मामला: हाई कोर्ट ने दिए APCCF को कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश
गणेश पांडे की विशेष रिपोर्ट
भोपाल। उच्च न्यायालय जबलपुर ने डीपीसी में योग्य पाए गए 73 डिप्टी रेंजर को रेंजर का प्रभार नहीं देने के मामले में वन मुख्यालय के एफिडेविट देने वाले संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने मप्र कर्मचारी कांग्रेस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुनेंद्र सिंह परिहार की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिए हैं।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुनेंद्र सिंह परिहार के अनुसार उच्च न्यायालय जबलपुर के डब्ल्यू पी 19886/2025 का आदेश के तहत डीपीसी में योग्य पाये गये 73 डिप्टी रेंजर को कार्यवाहक रेंजर का प्रभार देने के निर्देश दिए। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी डिप्टी रेंजर को कार्यवाहक रेंजर का प्रभार नहीं दिया गया। इस पर संगठन ने न्यायालय के आदेश का पालन न किये जाने पर कंटेंप्ट पिटिशन 5014/2025 दायर की।

हाई कोर्ट जबलपुर ने कंटेंप्ट पिटिशन पर एक अप्रैल 2026 को सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश पारित किया है कि अवलोकन करने से स्पष्ट परिलक्षित होता है कि जबाब एक दूसरे आदेश के विपरीत है, और न्यायालय से पारित आदेश का पालन नहीं किया गया है। पारित आदेश का उलंघन किये जाने पर जबाब दावा के प्रस्तुत शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रभारी अधिकारी को उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए न्यायालय से आदेश जारी किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में जवाब दावे पर हस्ताक्षर करने वाली अधिकारी APCCF कामालिका मोहंता है।
हाई कोर्ट में यह मामला अब आगामी 10 अप्रैल को सूचीबद्ध किया गया है।





