कॉलम / नजरिया

रिश्तों पर खरे हैं, मुद्दों पर दृढ़ हैं और हालात का हिस्सा होकर भी उनसे परे हैं कृष्ण

रिश्तों पर खरे हैं, मुद्दों पर दृढ़ हैं और हालात का हिस्सा होकर भी उनसे परे हैं कृष्ण

मीडियावाला.इन। कृष्ण अकेले हैं, जिन्हें आप कोई चुनौती नहीं दे सकते। अन्य देवताओं के बारे में लोग दोनों तरह के विचार रख सकते हैं। कृष्ण उन सबमें अपवाद हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि वे जो हैं,...

चिंदंबरम: यह खाला का घर नहीं है

चिंदंबरम: यह खाला का घर नहीं है

मीडियावाला.इन। कांग्रेसी नेता और पूर्व वित्तंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी को इतना नाटकीय रुप देने की जरुरत क्या थी ? यदि उच्च न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत नहीं दी तो कौनसा आसमान टूट रहा था ? वे...

राम, कृष्ण और स्वाधीनता के मायने

राम, कृष्ण और स्वाधीनता के मायने

मीडियावाला.इन। सावन और भादौं तिथि त्योहारों के महीने हैं। यह सिलसिला डिहठोन तक चलता है। इन्हीं महीनों में एक महान राष्ट्रीय पर्व पंद्रह अगस्त पड़ता है उसके आगे पीछे या कभी-कभी साथ में ही कृष्णजन्माष्टमी आती है।  मुझे...

ट्रंप का गोरखधंधा

ट्रंप का गोरखधंधा

मीडियावाला.इन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गोरखधंधा भी बड़ा मजेदार है। भारत सरकार द्वारा उनकी मध्यस्थता से इंकार के बावजूद वे मध्यस्थता किए जा रहे हैं। कभी वे नरेंद्र मोदी से बात करते हैं तो कभी...

गौर साहब जैसा कोई और नहीं..!

गौर साहब जैसा कोई और नहीं..!

मीडियावाला.इन। बाबूलाल गौर खुद को कृष्ण का वंशज मानते थे। संयोग देखिए कि हलषष्ठी के दिन उनके जीवन का अंतिम संस्कार हुआ। जब वे मुख्यमंत्री थे तब बलदाऊ जयंती मनाने का कार्यक्रम शुरू किया था, हलषष्ठी को...

मंदी भी तो मुमकिन है

मंदी भी तो मुमकिन है

मीडियावाला.इन। देश अचानक मंदी की चपेट में आ गया है तो घबड़ाने की जरूरत नहीं है।मंदी भी तो एक मुमकिन चीज है ।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के रहे जब कश्मीर से अनुच्छेद 370  समाप्त हो सकता है...

खय्याम के साथ संगीत के स्वर्ण युग के अंतिम कड़ी टूटी!

खय्याम के साथ संगीत के स्वर्ण युग के अंतिम कड़ी टूटी!

मीडियावाला.इन।  संगीतकार ख़य्याम के साथ एक युग का अंत हो गया! हिंदी फिल्मों के जिस दौर को संगीत का गोल्डन युग कहा जाता है, उस दौर की वे अंतिम कड़ी थे। खय्याम के साथ ये कड़ी भी टूट...

पुलिस की रेवड़ में काली भेड़ों को ढूंढने की जरुरत!

पुलिस की रेवड़ में काली भेड़ों को ढूंढने की जरुरत!

मीडियावाला.इन। आम आदमी के जहन में बरसों से पुलिस को लेकर एक ख़ास छवि रही है। लोग मानते हैं कि पुलिस सभ्य लोगों की मदद के लिए नहीं होती! क्योंकि, सभ्य लोग पुलिस से डरते...

यह 'प्रलय'तो पानी का हमसे 'बदला'है

यह 'प्रलय'तो पानी का हमसे 'बदला'है

मीडियावाला.इन। भारत में इन दिनों आये जल-प्रलय ने अभी तक 200 जानें ले ली हैं.बेघर होने वाले लोगों की संख्या 10 लाख से थोड़ी ज्यादा ही है.प्रभावित 9 राज्यों में जिंदगी तहस-नहस हो चुकी है. केंद्र और राज्यों के...

परमाणु बमः शाब्दिक बल्लेबाजी

परमाणु बमः शाब्दिक बल्लेबाजी

मीडियावाला.इन। रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने भारत के परमाणु शस्त्रास्त्रों के इस्तेमाल के बारे में ऐसा बयान दे दिया है, जिस पर दुनिया के सभी देशों का ध्यान जाए बिना नहीं रहेगा, खासतौर से पाकिस्तान का। उन्होंने कहा...

बारिश की मार से बेजार टीवी रिपोर्टर,,

बारिश की मार से बेजार टीवी रिपोर्टर,,

मीडियावाला.इन। दृश्य एक :  सर एक चीज समझ नहीं आ रही कि इतनी अच्छी बारिश हो रही है मगर कोई चैनल तो क्या कोई अखबार भी एक फोटो नहीं छाप रहा कि किसानों के चेहरे बारिश से चमके। सब...

काश किसी लिफाफे में बहन भी आ जाए

काश किसी लिफाफे में बहन भी आ जाए

मीडियावाला.इन। अब राखी पर बहन कम ही आ पाती है। उसकी जगह एक लिफाफा आ जाता है। कूंकू-चावल के साथ चंद राखियां। रस्म तो निभ जाती है, लेकिन यादों का कारवां मीलों पहले ही ठिठक कर रह जाता है। मुंह...

जिनके व्यक्तित्व की कोई थाह नहीं

जिनके व्यक्तित्व की कोई थाह नहीं

मीडियावाला.इन। आज की उथली राजनीति और हल्के नेताओं के आचरण के बरक्स देखें तो अटलबिहारी बाजपेयी के व्यक्तित्व की थाह का आंकलन कर पाना बड़े से बड़े प्रेक्षक, विश्लेषक और समालोचक के बूते की बात नहीं। बाजपेयी...

लाल किले से नया मोदी

लाल किले से नया मोदी

मीडियावाला.इन।                                   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किले से अब तक जितने भी भाषण दिए हैं, उनमें आज का भाषण सर्वश्रेष्ठ रहा, हालांकि उसमें कुछ जरुरी बातें और भी होनी चाहिए थीं। इस भाषण की सबसे बड़ी खूबी यह रही...

ये कश्मीर के नवविहान का मंगलाचरण है

ये कश्मीर के नवविहान का मंगलाचरण है

मीडियावाला.इन।                                             आजादी के बाद कश्मीर का यह पहला पंद्रह अगस्त होगा जब वहां एक विधान और एक निशान की प्राणप्रतिष्ठा होगी। दो प्रधान की बात दशकों पहले से ही अप्रसांगिक है। यह वह सपना था जिसे डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने...

सिर्फ याद करने की तारीख न रहे आजादी का ये दिन!

सिर्फ याद करने की तारीख न रहे आजादी का ये दिन!

मीडियावाला.इन। देश का जनमानस उस तिथि या घटना को ही अक्षुण्ण बनाए रख पाता है, जिसमें आध्यात्मिकता का पुट हो! क्योंकि, एतिहासिकता में आध्यात्मिकता का भाव होना जरुरी है। अन्यथा, भारतीय जनमानस औपचारिकताओं में अपनी रुचि कम कर देता है।...

आज राज-चिंतन की बजाए, राष्ट्र-चिंतन की जरूरत

आज राज-चिंतन की बजाए, राष्ट्र-चिंतन की जरूरत

मीडियावाला.इन।                                       आजादी की 72वीं वर्षगांठ पर राष्ट्र चिंतन करने की महती आवश्यकता है।  पिछले एक पखवाड़े में सरकार के एक बड़े कदम को राष्ट्र चिंतन के नजरिए से देखा जाना चाहिए था, मगर उस पर राज चिंतन हावी है। जम्मू-कश्मीर...

कश्मीर-   दुखद प्रहसन

कश्मीर- दुखद प्रहसन

मीडियावाला.इन। कश्मीर से भारतीय संविधान की धारा ३७० हटाने के बाद से मोदी और शाह की सरकार यह सिद्ध करने पर आमादा है कि वहाँ किसी प्रकार का कोई भी विरोध नहीं हो रहा है। दूसरी तरफ़...

गांधी के सपनों का भारत..

गांधी के सपनों का भारत..

मीडियावाला.इन। स्वतंत्रता दिवस मनाने से पहले पढ़ने और विचार करने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का यह आलेख प्रस्तुत है जिसे उन्होंने 15  अगस्त 1947 से पहले लिखा था। लेख में परिकल्पना है कि स्वतंत्रता मिलने के...

कश्मीरः खस्ता-हाल पाकिस्तान

कश्मीरः खस्ता-हाल पाकिस्तान

मीडियावाला.इन। विदेश मंत्री जयशंकर बिल्कुल ठीक मौके पर चीन पहुंचे। उनके पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन जाकर खाली हाथ लौट चुके थे लेकिन चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानी दबाव में आकर कोई अप्रिय रवैया अख्तियार...