Tuesday, February 25, 2020

कॉलम / नजरिया

गंगाजल : नया प्रसाद

गंगाजल : नया प्रसाद

मीडियावाला.इन। चुनाव की तैयारियां चरम पर थीं। विरोधी नेताजी पर रोज नए-नए आरोप लगा रहे थे। कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि कैसे इस चक्रव्यूह से निकलें। पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी मतदाता के...

'सपाक्स' की आहट से बदलती चुनावी राजनीति!

'सपाक्स' की आहट से बदलती चुनावी राजनीति!

दो साल पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण के लिए बनाए कानून एवं नियमों को असंवैधानिक मानते हुए इसे निरस्त कर दिया था। इस निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार के सुप्रीम कोर्ट में जाने से गैर-आरक्षित वर्ग के...

लोकतंत्र में अधिकार महत्वपूर्ण, पर अधिकार स्वयं में पूर्ण नहीं !

लोकतंत्र में अधिकार महत्वपूर्ण, पर अधिकार स्वयं में पूर्ण नहीं !

आधुनिक लोकतंत्र की अनिवार्य शर्तों में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है कि समाज के हर तबके को समुचित अधिकार प्राप्त हों, ताकि समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने की आदर्श स्थितियों की निर्मिति हो सके। भारत के प्रधान न्यायाधीश...

पेट्रोल रेट घटाने की बजाए ‍पब्लिक जनता को पेट काटने की नसीहत !

पेट्रोल रेट घटाने की बजाए ‍पब्लिक जनता को पेट काटने की नसीहत !

मीडियावाला.इन। देश की पब्लिक को पेट्रोल-डीजल के अब तक के सर्वाधिक महंगे होने और रूपए के गर्त में जाने से उतना झटका नहीं लगा, जितना कि इस हकीकत पर दिए जा रहे एरोगेंट बयानों से लगा है। राजस्थान...

ये तीसरा बंद है सरकार !

ये तीसरा बंद है सरकार !

मीडियावाला.इन। यह तीसरा भारत बंद बहुत कुछ कहता है। विपक्ष के पास चेहरा नहीं है लेकिन तीन साल पहले की अपेक्षा आज के इस बंद से नीति और रणनीति के मामले में विपक्ष अधिक एकजुट नजर आया...

रुपया अभी दबाव में है और मजबूत होने के संकेत नहीं दिखते

रुपया अभी दबाव में है और मजबूत होने के संकेत नहीं दिखते

हर देश की करेंसी की एक वाजिब कीमत होती है जो उस देश की माली हालत को बयां करती है। लेकिन कई बार इन करेंसियों में असमय ही अप्राकृतिक उतार-चढ़ाव आ जाते हैं जिन्हें उस देश की सरकार...

जयस की आहट: अबकी बार आदिवासी सरकार, मप्र में राजनीति समीकरणों के नए गुणा-भाग

जयस की आहट: अबकी बार आदिवासी सरकार, मप्र में राजनीति समीकरणों के नए गुणा-भाग

मप्र में इनदिनों तमाम तरह के विरोध के स्‍वर गुंजायमान हैं। जहां एक ओर सवर्ण समाज /एसटी कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है तो दूसरी तरफ आदिवासी समाज एकजुट हो कर अपनी ताकत दिखाने में जुटा है।...

कर्म फल वाद और ‘आलसी’ देशों की सूची में अपना इंडिया

कर्म फल वाद और ‘आलसी’ देशों की सूची में अपना इंडिया

भारत जैसे धर्म प्रधान देश में शारीरिक कर्म ( या श्रम ?) को आईना दिखाने वाली डब्लूएचअो की  ताजा लिस्ट आ गई है। विश्व के आलसी देशों  की सूची में हमारा नंबर 117 वां है। सूची में कुल 168...

एट्रोसिटी एक्ट की आग में घी का काम करेगा कांग्रेस का यह बंद ?

एट्रोसिटी एक्ट की आग में घी का काम करेगा कांग्रेस का यह बंद ?

दरअसल बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर अब कांग्रेस की नींद खुली है कि भारत बंद कराना चाहिए। दरअसल इन दिनों कांग्रेस की हालत चौराहे पर भीड़ में घिरे उस युवक सी हो गई है जिसकी टप्पल (सिर) पर...

सूबेदार पर मेहरबानी, नरेंद्र से सौतेला बर्ताव, यह कैसा न्याय सरकार !

सूबेदार पर मेहरबानी, नरेंद्र से सौतेला बर्ताव, यह कैसा न्याय सरकार !

मीडियावाला.इन। सरकार ने रेत माफ़िया से जूझते प्राण न्योछावर करने वाले डिप्टी रेंजर सूबेदार सिंह को शहीद का दर्जा दिया है। सरकार का यह क़दम सराहनीय है। पर यह फ़ैसला चुनावी मौसम की देन प्रतीत होता हैं। क्योंकि इससे पहले...

हे भगवान इनको माफ करना ये नहीं जानते मीडिया क्या है....

हे भगवान इनको माफ करना ये नहीं जानते मीडिया क्या है....

मीडियावाला.इन। वो हमारे शर्मा जी के मित्र वर्मा जी थे जिनसे थोडी देर पहले ही परिचय हुआ था। सेंट्रल सर्विस के रिटायर्ड अफसर थे जिनके बच्चे विदेश में हैं और यहां चाय पीने और गप्पें करने गाहे बगाहे...

शब्द संभारे बोलिए

शब्द संभारे बोलिए

फर्ज करिए कि एक ऐसी प्रयोगशाला बना ली जाए जो हवा में तैरते हुए शब्दों को पकड़कर एक कंटेनर में बंद कर दे, फिर भौतिकशास्त्रीय विधि से  उसका घनत्वीकरण कर ठोस पदार्थ में बदल दिया जाए तो उसका स्वरूप...

तेलंगाना में चंद्रशेखर राव की लम्बी रणनीति

तेलंगाना में चंद्रशेखर राव की लम्बी रणनीति

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी, जिसके आधार पर राज्यपाल ने विधानसभा को भंग कर दिया। विधानसभा का कार्यकाल 8 महीने और शेष था, लेकिन केसीआर ने बहुत सोच...

प्रेम कैसे अपराध हो सकता है

प्रेम कैसे अपराध हो सकता है

मीडियावाला.इन। भीड़ का अपना चरित्र होता है। वह आसपास अपने जैसे चेहरे-मोहरे देखना पसंद करती है। क्योंकि अलग दिखने और होने वाले लोग उसे खलते हैं। हम तय परिभाषाओं के परकोटे से ही क्यों घिरे रहना चाहते हैं। दुनिया...

नाथू ला दर्रे के पास असली झड़प के नायकों की कहानी हें 'पल्टन'

नाथू ला दर्रे के पास असली झड़प के नायकों की कहानी हें 'पल्टन'

मीडियावाला.इन। ज्योति प्रकाश दत्ता सरहद, बॉर्डर, रिफ्यूजी, एलओसी कारगिल जैसी फिल्में बना चुके हैं, अब वे पल्टन लेकर आए हैं। इस फिल्म में उन्होंने नाथू ला दर्रे के पास की हुई झड़प को सिनेमा के पर्दे पर उतारा है।...

मोतीलाल दायमा हैं इंदौर के अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर

मोतीलाल दायमा हैं इंदौर के अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर

मीडियावाला.इन।   मध्यप्रदेश पुलिस के कांस्टेबल, हनुमान जी के भक्त और मिस्टर इंदौर रह चुके मोतीलाल दायमा एक बेहद लोकप्रिय शख्सियत हैं।  कुछ अख़बार उन्हें आयरनमैन भी लिखते हैं, पर वे हैं एकदम बेहद...

सवर्णों के 'भारत बंद' को  ‍किस खुली  कुंजी से नापे

सवर्णों के 'भारत बंद' को ‍किस खुली कुंजी से नापे

अगर ‍किसी बंद को उसमें होने वाली हिंसा, आगजनी तोड़फोड़ और जनधन हानि में ही मापा जाए तो सवर्णों के आव्हान पर 6 सिंतबर को आ‍योजित 'भारत बंद' शायद उतना 'सफल' नहीं कहलाएगा, जितना कि ऐसे पूर्ववर्ती बंद के...

हो कहीं भी, लेेकिन आग जलनी चाहिए

हो कहीं भी, लेेकिन आग जलनी चाहिए

मुर्दा जिस्म सिर्फ श्मशानों के काम आते हैं। जिंदा कौमें अपनी बारी का इंतजार नहीं करती। वह लडऩा जानती है। हार-जीत का सवाल तो कभी रहा ही नहीं।  सवाल अपनी बात रखने और उसके लिए जान लड़ा देने का...

बोहरा समाज का महाकुंभ इंदौर में मुझे याद आ रहा था 52वें धर्मगुरु के स्पर्श वाला रुमाल

बोहरा समाज का महाकुंभ इंदौर में मुझे याद आ रहा था 52वें धर्मगुरु के स्पर्श वाला रुमाल

इसे बोहरा समाज का महाकुंभ कहना ज्यादा बेहतर होगा। जिन सैयदना की एक आहट सुनने को समाज बैचेन रहे वो सैयदना करीब डेढ़ पखवाड़े के लिए उज्जैन होते हुए इंदौर आए हैं।देश ही नहीं विश्व में विभिन्न जगहों पर बसे...