कॉलम / नजरिया

कहीं राजनीति में दफन न हो जाए शेल्टर होम पीडि़ताओ का दर्द

कहीं राजनीति में दफन न हो जाए शेल्टर होम पीडि़ताओ का दर्द

जैसी कि आशंका थी कि पूरे देश को शर्मसार करने वाले  बिहार के मुजफ्फरपुर का शेल्टर होम कांड राजनीति का नया तंदूर बनेगा, वही हो रहा है। इस शर्मनाक कांड की शिकार बेटियों को न्याय कब और कैसे मिलेगा,...

सलोनी की धमकियों, 5 करोड़ की मांग के कारण ही कल्पेश ने आत्महत्या की 

सलोनी की धमकियों, 5 करोड़ की मांग के कारण ही कल्पेश ने आत्महत्या की 

वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक खुदकुशी मामले में पुलिस का मानना है कि सलोनी अरोरा द्वारा 5 करोड़ के लिए लगातार दी जा रही मानसिक प्रताड़ना और धमकी के कारण ही कल्पेश ने भास्कर कार्यालय भवन की तीसरी मंजिल से...

इस मदारी की यही सबसे बड़ी सफलता

इस मदारी की यही सबसे बड़ी सफलता

सफल मदारी किसे कहेंगे? डुगडुगी बजाने वाले को? मजमा इकट्ठा करने वाले को? लच्छेदार बातों में उलझाए रखने में निपुण शख्स को? नहीं। मदारी की सफलता मजमे के अंत पर निर्भर करती है। जब वह भीड़ से पापी पेट...

'सैंयाओं' के सहारे 'छा' गए 'मानवता के दुश्मन'

'सैंयाओं' के सहारे 'छा' गए 'मानवता के दुश्मन'

मुझे मालूम है कि अपनी कोई भी गंभीर बात मज़ाक से शुरू नहीं की जाती. लेकिन,आज माफ़ी के साथ निवेदन है कि हमारे यहाँ एक पुरानी कहावत है कि 'सैंयां भये कोतवाल तो डर किस बात का'.यदि इस...

ये गठबंधन के मेले राजनीति में कम ना होंगे

ये गठबंधन के मेले राजनीति में कम ना होंगे

अरे भाई, आप मायावती जी से गठबंधन करना चाहते हो तो कर लेना उनसे भी गठबंधन मगर हम जो यहां बैठे हैं हमसे भी तो गठबंधन कर लो क्योंकि हमसे बिना गठबंधन किये क्या तुम जीत पाओगे बताओ...

फ़न्ने खाँ

फ़न्ने खाँ

शायद दुनिया में हर माँ-बाप अपने सपने अपने बच्चों में पालते हैं , जो कुछ भी वो बनना चाहते थे और नहीं बन पाए उस सबकी अभिलाषा वो अपने बच्चे से चाहते हैं , इसी आदिम आकांक्षा की ख़ूबसूरत...

कल्पेश करुण कथा: उसी फिल्म वितरक की मदद से पुलिस दल को मिली सफलता

कल्पेश करुण कथा: उसी फिल्म वितरक की मदद से पुलिस दल को मिली सफलता

मीडियावाला.इन। दैनिकभास्कर के ग्रुप एडिटर कल्पेश आत्महत्या कांड की कथित मुख्य आरोपी सलोनी अरोरा को गिरफ्तार करने में सफलता भी उसी के अंतरंग मित्र आदित्य चौकसे के कारण मिली है।पुलिस ने कल्पेश के द्वारा लिखे छह पेज के...

मीडिया के नेपथ्य में सरकारी तोते की आवाज़...!

मीडिया के नेपथ्य में सरकारी तोते की आवाज़...!

अमेरिका मे डोनाल्ड ट्रंप खुले तौर पर कह रहे हैं कि मीडिया दुश्मन है। भारत में सरकार खुलकर तो ऐसा नहीं कर रही है लेकिन जो कुछ पर्दे के पीछे हो रहा है, उससे साफ है कि देश के...

अवैध नागरिकता का राजनीतिकरण गलत

अवैध नागरिकता का राजनीतिकरण गलत

असम में स्थानीय बनाम विदेशी नागरिकों का मसला राज्य के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन को लंबे समय से झकझोर रहा है। असम के लोगों की शिकायत है कि बांग्लादेश से बड़ी संख्या में घुसपैठ करके आए मुस्लिमों...

चलती सड़क पर जान से खेलता ‘किकी डांस’

चलती सड़क पर जान से खेलता ‘किकी डांस’

पचास साल पहले एक फिल्म आई थी ‘गुनाहों का देवता’। इसमें मशहूर कामेडियन महमूद पर फिल्माया गया गाना था ‘मैं मरने चला हूं...।‘ महमूद इश्क की खातिर मरने जा रहे थे। लोग उनको रोक रहे थे। लेकिन वो डांस...

विषय फन्ने खां, एक्टर तीसमार खां और फिल्म खामखां

विषय फन्ने खां, एक्टर तीसमार खां और फिल्म खामखां

फन्ने खां में एक गाना है – मेरे अच्छे दिन कब आएंगे। आश्चर्य हुआ कि ऐसा गाना सेंसरबोर्ड ने पास कैसे कर दिया? सवा दौ घंटे की फिल्म खत्म होते-होते गाना बन जाता है – मेरे अच्छे दिन...

कब आएगा ऐसा गुरूवार?

कब आएगा ऐसा गुरूवार?

गजब का गुरूवार! जबरदस्त जुम्मेरात! हर ओर औरत। सर्वोच्च न्यायालय की चिंता में। घुसपैठियों के रोम-रोम में। कांग्रेसी महाराजा द्वारा किए गए अपमान को बिसराने में और भोपाल के मंत्री निवास में भाई के खिलाफ मां के दर्द भरे...

सूखा सावन

सूखा सावन

पता है, सब यही पूछ रहे हैं कि आखिर ये सावन को क्या हुआ। क्यों रूठा है, जिस आसमान को वह स्नेहल श्यामल मेघों से भर देता था, उनकी जगह धूसर मटमैले बादल क्यूं डेरा जमाए बैठे हैं। सूरज...

कल्पेश याग्निक के दुखांत से जुड़ी ‘वो’ पुलिस के लिए इतनी भी सलोनी नहीं

कल्पेश याग्निक के दुखांत से जुड़ी ‘वो’ पुलिस के लिए इतनी भी सलोनी नहीं

मीडियावाला.इन। समाज में इज्जत को मटियामेट किए जाने के कथित आडियो मैसेज से उपजे अंतहीन तनाव से मुक्ति के लिए बीस दिन पहले दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर कल्पेश याग्निक ने भास्कर कार्यालय की तीसरी मंजिल से...

इमरान के न्यौते पर सिद्धू के चहकने  के मायने...!

इमरान के न्यौते पर सिद्धू के चहकने  के मायने...!

पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान के ताजा चुनाव के परिणाम स्वरूप अल्पमत सरकार के मुखिया के रूप में 11 अगस्त को शपथ ग्रहण करने वाले इमरान के पीएम बनने पर अगर कोई व्यक्ति सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहा है...

भारत  बेरोजगारी की राजधानी  और 77% जॉब्स असुरक्षित

भारत बेरोजगारी की राजधानी और 77% जॉब्स असुरक्षित

मीडियावाला.इन। डॉ अरविन्द जैन भोपाल  आज बाजार की स्थिति ऐसी हो गयी हैं की व्यापारी रोजगार करते हुए बेरोजगार हैं .कारण विगत दो वर्षों से अधिक समय हो गया जबसे सरकार ने नोट बंदी और जी एस टी के...

कैंसर एक्सप्रेस का अगला स्टेशन मालवा...!

कैंसर एक्सप्रेस का अगला स्टेशन मालवा...!

मीडियावाला.इन। दोपहर करीब 2 बजे मैं अपने खेत पर आम के पेड के नीचे बैठा आसमान में उडते पंछियों की तरफ टकटकी लगाए देख रहा था। स्वच्छंद वातावरण में उडते इन पंछियों की तरह खुद को शहर की...

अब कई बातें देखने लायक होंगी कांग्रेस में

अब कई बातें देखने लायक होंगी कांग्रेस में

अब यह बात देखने लायक होगी। इस तरह की और भी कई बातें होंगी। यह सब होगा मध्यप्रदेश की कांग्रेस में। कि क्या कमलनाथ पूरी तरह मैदान में पसीना बहाते दिखने लगेंगे। कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी दिल्ली दरबार से...

माल्या की टॉयलेट कथा

माल्या की टॉयलेट कथा

आपको पान पराग का वह विज्ञापन तो याद ही होगा, जिसमें शम्मी कपूर लडक़ी देखने के लिए दादा मुनी के घर जाते हैं। रिश्ता तय हो जाता है। तभी वे कहते हैं कि हम एक बात तो आपसे कहना...

सभ्यता और धर्म के नाम पर असभ्यता व अधर्म है 'लिंचिंग'

सभ्यता और धर्म के नाम पर असभ्यता व अधर्म है 'लिंचिंग'

यह वाक्य मेरा नहीं है कि "कालजयी व्यंग्यकार स्व.हरिशंकर परसाई यदि आज जिन्दा होते,तो इसी अगस्त महीने में,वे पिच्यानबे वर्ष के हो जाते.और,हम उनसे पूछते कि हमारी आज की परिस्थितियों पर आप क्या लिखेंगे ? तो उनका सीधा सा...