कहानी

खेमा

खेमा

मीडियावाला.इन। बाबा के संग पहली बार किस्सा खड़ा तो किया था मैंने उन्नीस सौ पैंसठ में मगर उसकी तीक्ष्णता आज भी मेरे अन्दर हाथ-पैर मारती है और लंबे डग भर कर मैं समय लांघ जाता हूँ... लांघ...

दीदी का कमरा"

दीदी का कमरा"

मीडियावाला.इन।   राजी ने बेटे सुयश की शादी से पहले मकान में कुछ फेरबदल करने का प्रस्ताव रखा। उसकी की बात से बाप-बेटे दोनों ही असहमत थे। घर में चार बैडरूम, ड्रॉइंग रूम,रसोई, ऊपर जाने की सीढ़ियां और...

‘टच मी नॉट’

‘टच मी नॉट’

मीडियावाला.इन। मुहल्ले की नई बहार थी वह. सबकी तरह आलोक को भी बहुत भाने लगी थी. वह चाहता था यह बसंत ठहर जाए. उसके घर में न सही, उसके आसपास. खूशबू आती रहे दूर से ही मगर, सामने हो...

स्पर्श

स्पर्श

मीडियावाला.इन। रूबल मुँह में उनका चश्मा दबाए आया और उनके पास पलंग पर रख दिया। सावित्री उसे देखती रहीं और रूबल भी उन्हें देखते हुए खड़ा रहा। रूबल की आँखों में हमेशा की तरह एक तरलताए मित्रता...

जुगाली

जुगाली

मीडियावाला.इन। “वनमाला के दाह-कर्म पर हमारा बहुत पैसा लग गया, मैडम|” अगले दिन जगपाल फिर मेरे दफ़्तर आया, “उसकी तनख्वाह का बकाया आज दिलवा दीजिए|” वनमाला मेरे पति वाले सरकारी कॉलेज में लैब असिस्टेंट रही थी तथा कॉलेज में...

दुनिया की सबसे करुण प्रेमकथा !

दुनिया की सबसे करुण प्रेमकथा !

मीडियावाला.इन। आज हम आपको दुनिया की सबसे करूण प्रेमकथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर शायद आप भी चौंक जाएंगे । इस प्रेमकथा का नायक प्राचीन आयरलैंड का एक योद्धा ओईसीन है । ओईसीन...

फेसबुकिया मॉम

फेसबुकिया मॉम

मीडियावाला.इन। कहानी  अगस्त माह का पहला रविवार है | सुबह-सुबह का झुटपुटा है | अभी वृक्ष सोये पड़े हैं | डालियाँ पंछियों की चहचहाहट सुनने के लिए आतुर हैं लेकिन कहीं कोई आवाज़ नहीं केवल एक आवाज़ को छोड़कर...

पुराना पता

पुराना पता

मीडियावाला.इन। ‘इन दीज न्यू टाउन्ज वन कैन फाइन्ड द ओल्ड हाउजिस ओनली इन पीपल’ (‘इन नये शहरों में पुराने घर हमें केवल लोगों के भीतर ही मिल सकते हैं।’) इलियास कानेसी वह मेरा पुराना मकान है... उस सोते का उद्गम...

विदाई

विदाई

मीडियावाला.इन। विदाई कल से दुलारी ने काम पर जाना छोड़ दिया था| उसके ब्याह को केवल पाँच दिन रह गए थे| वह सोचने लगी कम से कम पाँच दिन तो वह भी रानी महारानी की तरह आराम से...

विदूषक

विदूषक

मीडियावाला.इन। 2 जुलाई सुशील सिद्धार्थ के जन्म दिन पर उनकी  चर्चित कहानी दिवंगत सुशील  हिंदी गद्य और कविता लेखक, आलोचक, संपादक और व्यंग्यकार थे। वह एक पत्रकार और स्तंभकार और कई पत्रिकाओं के सह-संपादक थे। उनकी...

बापवाली !

बापवाली !

मीडियावाला.इन।बापवाली ! “बाहर दो पुलिस कांस्टेबल आए हैं,” घण्टी बजने पर बेबी ही दरवाज़े पर गयी थी, “एक के पास पिस्तौल है और दूसरे के पास पुलिस रूल. रूल वाला आदमी अपना नाम मीठेलाल बताता है. कहता है,...

प्रेतयोनि 

प्रेतयोनि 

मीडियावाला.इन "दीदी, दीदी... उठो, उठो! बाबूजी बुला रहे हैं तुम्हे बालकनी में।" छोटी बहन चिंकी ने अधीर हो उसे बाँह पकड़कर झिंडोड़ने की कोशिश की। बड़ी मुश्किल से चिंकी की झिंझोड़न व...

मेमने की चीख

मेमने की चीख

मीडियावाला.इन। रात आधी से अधिक बीत गई है, पर चौधरी बिस्तर  पर करवट ही बदल रहे हैं | भुलई काका के खखारने की आवाज आई तो चौधरी उठकर बिस्तर पर बैठ गये | कोई अन्य दिन रहा होता तो भुलई...

बूंद गुलाबजल की

बूंद गुलाबजल की

मीडियावाला.इन। इस बार हरिद्वार जाना है, यह सोच लिया था। बाबूजी का अस्थिकलश भी वहीं गंगाजी में प्रवाहित करना है। इसी बहाने तीर्थ भी हो जाएगा और तीन साल से रमिया बुआ से नहीं मिली थी, सो उनसे मिलना...

फैसला 

फैसला 

मीडियावाला.इन। ------------------------ शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है | राघव  पहली बार अकेले सफर कर रहा है | उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा...

पुराने पन्ने

पुराने पन्ने

मीडियावाला.इन। इस सन् २०१६ के नवम्बर माह का विमुद्रीकरण मुझे उन टकों की ओर ले गया है साठ साल पहले हमारे पुराने कटरे के सर्राफ़, पन्ना लाल, के परिवार के पाँच सदस्यों की जानें धर ली थीं| अट्ठाइस वर्षीया...

.उपहार जिन्दगी का

.उपहार जिन्दगी का

मीडियावाला.इन। आज कालोनी में बडी हलचल है । हर कौई उदास है , दुखी है ।   बहुत बूरा हुआ भाई ,,,,, ,,,,, घर चलाने वाले अकेले ही थे शुक्ला जी ,,,,,, ,,,,,,,, पिछले ग्यारह महीनों से इलाज चल...

तीन सहेलियाँ, तीन प्रेमी

तीन सहेलियाँ, तीन प्रेमी

मीडियावाला.इन। ‘और बता क्या हाल है?’ ‘अपना तो कमरा है, हाल कहाँ है?’ ‘ये मसखरी की आदत नहीं छोड़ सकती क्या?’ ‘क्या करूँ आदत है, बुढ़ापे में क्या छोड़ूँ? साढ़े पाँच बज गए मेघना नहीं आई?’ ‘बुढ़ऊ झिला रहा होगा।’...

रोटियाँ

रोटियाँ

मीडियावाला.इन। रोटियाँ  उर्मिला शिरीष        यह तीसरा दिन था जब वह रोटियाँ वापस ले जा रही थी। रोटियाँ बैग में थीं... जिन्हें वह...

स्त्री सुबोधिनी:मन्नू भंडारी के जन्म दिवस पर उनकी एक कहानी

स्त्री सुबोधिनी:मन्नू भंडारी के जन्म दिवस पर उनकी एक कहानी

मीडियावाला.इन।बड़ा शायराना अन्दाज़ था उनका और जल्दी ही मालूम पड़ गया कि वे कविताएँ भी लिखते हैं। पत्र-पत्रिकाओं में वे धड़ाधड़ छपती भी रहती हैं और इस क्षेत्र में उनका अच्छा खासा नाम है। आयकर विभाग की अफसरी...