कविता

बहुत देर कर दी आज

बहुत देर कर दी आज

मीडियावाला.इन। बहुत देर कर दी है आज  सुब्ह की किरणों की दस्तक ने। पंछी की कलरव ने यूं तो आहट दी है घर चौखट पे। लेकिन पुष्प तभी बोलेगे पल्लव की सुगंध खोलेगें जब किरणों की गरमी पाकर...

एकला चलो रे:रबींद्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ  कविताएं

एकला चलो रे:रबींद्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कविताएं

मीडियावाला.इन।  आज  की परिस्थिति में इन कविताओं में जीवन सन्देश बहुत प्रासंगिक है ----------- गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर बंग साहित्य के ही नहीं, विश्व साहित्य की महान विभूति है   उनकी जीवन दृष्टि अद्भुत थी. 26 मई, 1921 को स्टाकहोम में दिए...

पर हे मेरे प्रभु..... ज़रा आहिस्ता

पर हे मेरे प्रभु..... ज़रा आहिस्ता

मीडियावाला.इन। हे मेरे प्रभु.... तेरा जादू चल गया। इस जहान की सड़कें खाली हो गईं हैं। सारे आलम में शुद्ध हवा का झोंका चल रहा है। सारे पेड़ पोधे हवा में झूम रहे हैं। समुंदर में चलने वाली बड़े...

कपड़े के मीटर से तय होती मर्यादा

कपड़े के मीटर से तय होती मर्यादा

मीडियावाला.इन। कपड़े के मीटर से तय होती मर्यादा आधा मीटर खिड़की पर लगाया जाता लड़की झांकती थी जहां से डेढ मीटर फ्राक में लगता ढाई मीटर दुपट्टे का जिसमें हर दिन लगाई जाती बाप की इज्जत घर के मान...

किसी नदी के निर्जन किनारे पर

किसी नदी के निर्जन किनारे पर

मीडियावाला.इन। किसी नदी के निर्जन किनारे पर चाहती हूँ किसी नदी के निर्जन किनारे पर बैठी रही हूँ देर तक पानी में पैर डाले तट के सौन्दर्य को निहारती मैं चाहती हूँ किसी पत्थर पर टिक कर...

मुझे सदियों से गुम सिर्फ अपनी हँसी सहेजनी है

मुझे सदियों से गुम सिर्फ अपनी हँसी सहेजनी है

मीडियावाला.इन। मुझमें नहीं इतना धैर्य कि पी जाऊं अस्मिता और परोसूं वजूद ! मैं ऐसी ही हूँ अब तक बताया नहीं था तुम्हें बस इतना है दोष. यह सच भी क्या सच ! कि ऐसा सौंदर्य मुझमें जो बनाये...

कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी कोई फर्क नहीं पड़ता

कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी कोई फर्क नहीं पड़ता

मीडियावाला.इन। मुझे तुम्हारी गालियों से डर नहीं लगता तुम्हारे तमगे पहनकर निकलने से भी डरना बंद दिया है मैंने कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी या रंडी कोई फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी गढ़ी ये गालियां अब अर्थ नहीं पैदा करतीं कोई...

मैं भी रंडी होना चाहती हूँ.

मैं भी रंडी होना चाहती हूँ.

मीडियावाला.इन। कवि ,समाज सेवी अनुपमा तिवाडी की फेसबुक वाल से  एक कविता  ,जिसका अन्य  भाषाओँ में अनुवाद हो रहा है -यहाँ जस की तस कविता मराठी और नेपाली  अनुवाद के साथ  दे रहे है  अनुपमा की वाल से ---------...

 शिफाली  की कुछ चुनिन्दा कवितायें 

 शिफाली की कुछ चुनिन्दा कवितायें 

मीडियावाला.इन।हिंदी दिवस:१४ सितंबर पर युवा कवि शिफाली (टीवी पत्रकार और लेखिका) की कुछ चुनिन्दा कवितायें  लाल साड़ी और मांग भर सिंदूर में, उसे भी खिंचानी थी तुम्हारे बांई तरफ के कंधे पर हाथ रखे तस्वीर उसने कोशिश भी की...

शेष रह गया है सब अनकहा, अनसुना

शेष रह गया है सब अनकहा, अनसुना

मीडियावाला.इन।                       भारती पंडित शेष रह गया कह दूँगी फिर कभी सब कुछ तुमसे सोचते- सोचते  कितना सब रह गया कहने- सुनने को रह गया बताना कि तुम्हारा यूँ गहरी नज़र से देखना ...

हैप्पी फादर्स डे

हैप्पी फादर्स डे

मीडियावाला.इन। हैप्पी फादर्स डे पूज्य 'पिता दिन' आपका,  करता तुम्हें प्रणाम l पहचान बनी मेरी तुमसे,  तुम्ही से पाया नाम ll पिता हमारें सहें कष्ट,  अनभिज्ञ  सारा संसार l झोली में डालीं  खुशियाँ,  झेल वक्ष पर वार ll दसरथ...

रोटियां सेंकती   मेरी माँ

रोटियां सेंकती  मेरी माँ

मीडियावाला.इन। रसोई में चूल्हे पर रोटियां सेंकती  मेरी माँ का  लाल लाल  दमकता चेहरा  मुझे साहस मेहनत  विश्वास देता है   अंधेरों में टिमटिमाती ढिबरियों में मेरी माँ की चमकती दो आंखे  टपरियो...

प्यारी माँ

प्यारी माँ

मीडियावाला.इन। "मातृ दिवस"शुभकामनाएँ मां तारों की छइयां बन लोरी गा शिशु को सुलाती हो  शीतल  छांह बन दुलराती हो जीवन पथ के संग्राम से जूझना  सिखाती हो...

वरमाला रौंद दूंगी:नारीवादी रमणिका गुप्ता की कविता 

वरमाला रौंद दूंगी:नारीवादी रमणिका गुप्ता की कविता 

मीडियावाला.इन। आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने वाली साहित्यकार और नारीवादी रमणिका गुप्ता का नई दिल्ली में निधन हो गया, वे 89 साल की थींउनकी कविता  स्त्री विमर्श विषयक कृतियां हैं,रमणिका गुप्ता देश की वामपंथी प्रगतिशील...

कहे कविराज:चमत्कार को नमस्कार है----

कहे कविराज:चमत्कार को नमस्कार है----

मीडियावाला.इन। रातों रात दुबेजी बन गये छब्बेजी पल मे धुल गये उनके सारे धब्बेजी महा सियासी साबुन का यह चमत्कार है चमत्कार को नमस्कार है। कलमघसीटे चप्पल चटकाते फिरते हैं और जुगाड़ू पाँव न धरती पर धरते हैं पढ़े क़सीदे...

ह्यूस्टन में होली

ह्यूस्टन में होली

मीडियावाला.इन।             ह्यूस्टन में आनंद भयो  ह्यूस्टन में आनंद भयो है, होरी को रंग बरसे l राम कृष्ण दोउ खेलें होरी, देख-देख मन हरसे ll                                         ह्यूस्टन में आनंद भयो...                                                                                           ...

कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो

कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो

मीडियावाला.इन।होली रंगों का त्यौहार है जिसमें रंगों का अपना महत्व है। होली के आनंद की शुरुआत रंगों से होती है और गुलाल से ही इसके आनंद का खात्मा होता है। देश के कई हिस्सों में होली पारंपरिक और आधुनिक तरीके...

गौतम राजऋषी  की तीन कवितायें

गौतम राजऋषी की तीन कवितायें

मीडियावाला.इन। 1 --ये कैसी पेड़ों से है उतरी धूप चुभती-चुभती सी ये कैसी पेड़ों से है उतरी धूप आंगन-आंगन धीरे-धीरे फैली इस दोपहरी धूप गर्मी की छुट्‍टी आयी तो गाँवों में फिर महके आम चौपालों पर चूसे...

भारतीय परंपरा में हमने समष्टि को दो रूपों में देखा है एक सत्य के रूप में एक प्रेम के रूप में:कपिल तिवारी

भारतीय परंपरा में हमने समष्टि को दो रूपों में देखा है एक सत्य के रूप में एक प्रेम के रूप में:कपिल तिवारी

मीडियावाला.इन।भारतीय परंपरा में हमने समष्टि को दो रूपों में देखा है एक सत्य के रूप में एक प्रेम के रूप में यह कहना है वरिष्ठ साहित्यकार लोक संस्कृति के विद्वान कपिल तिवारी का। वे बुधवार से महारानी...

कदम मिलाकर चलना होगा

कदम मिलाकर चलना होगा

मीडियावाला.इन। 1-कदम मिलाकर चलना होगा. उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को...