Saturday, December 14, 2019

साहित्य

खण्डित प्रतिमाएं

खण्डित प्रतिमाएं

राघव अभी भी मुँह बाए, आँखें फाड़े, जड़वत खड़े थे और वह भारी देह वाला छ: सवा छ: फुट का आदमी बड़े इत्मीनान से उसी कुएँ से पानी निकाल रहा था, जिसमें अभी कुछ देर पहले ही उसने एक...

रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र

रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र

मीडियावाला.इन।  पाठकों के लिए   क्लासिक साहित्य  शृंखला में आज एक ख़ास कहानी  रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र   लेकर आये है   कहानी : स्त्री का पत्र    पूज्यवर, आज पन्द्रह साल हुए...

वो जो भी है, मुझे पसंद है

वो जो भी है, मुझे पसंद है

मीडियावाला .इन   स्वाति तिवारी "कब आ रही हैं आप?" "परसों रात की फ्लाइट है... अच्छा मैं तुम्हें अपना टिकट मेल करती हूँ। तुम समय देख लेना।" "जी, आप बेफिक्र होकर आइए मैं आपको लेने पहुंच जाऊंगी।"...

माई री मैं टोना करिहों

माई री मैं टोना करिहों

मीडियावाला.इन। “ कहां से आ रही हो...ये तुम्हारे चेहरे का रंग क्यों उड़ा हुआ है...फोन क्यों नहीं उठाया तुम लोगो ने..कितनी बार कॉल किया है..कुछ अंदाजा है तुम दोनों को...?”   दोनों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं।...

अंतराल

अंतराल

मीडियावाला.इन। धूप लगातार तेज हो रही थी। लू ऐसी चल रही थी, मानो धूल का गुबार उड़ाकर मनुष्य का मजाक उड़ाना चाहती हो! शायद वह चुनौती दे रही थी कि मगना देखती हूँ, तू तेज चलता है या मैं?...

निगोड़ी

निगोड़ी

मीडियावाला.इन। रूपकान्ति से मेरी भेंट सन् १९७० में हुई थी. उसके पचासवें साल में. उन दिनों मैं मानवीय मनोविकृतियों पर अपने शोध-ग्रन्थ की सामग्री तैयार कर रही थी और रूपकान्ति का मुझसे परिचय ‘एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर’, अतिपाती तनाव से...

सुर्खाब: मामला भ्रामक है

सुर्खाब: मामला भ्रामक है

मीडियावाला.इन। श्री कालू राम शर्मा सुर्खाब पक्षी को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चाएं आम हैं। चित्र, वीडियो और फोटो के साथ एक संक्षिप्त नोट भी होता है: “सुर्खाब का यह वीडियो बड़ी मुश्किल से बनाया गया है।” ज्योतिषियों...

कहानी : आढ़ा वक्त 

कहानी : आढ़ा वक्त 

तब गांव में इक्का दुक्का लोग ही जागे होंगे, जब अकेली सुभद्रा ने विदिशा स्टेशन आकर सीधे भोपाल की ट्रेन पकड़ ली थी। वह रात भर से दादा की तबियत बिगड़ने की खबर से हलकान थी। पप्पू के...

एक फलसफा जिन्दगी

एक फलसफा जिन्दगी

मीडियावाला.इन। ''शाम का अखबार पढ़ा?'' अमन ने शाम को दफ्तर से घर आकर अपनी टाई ढीली टाई ढीली करते हुए मेरी तरफ देखकर पूछा। ''नहीं, अखबार आया ही नहीं।'' ''मेरी फाइल के अंदर रखा है।'' अमन यह कहते हुए...

कहानी : तितली

कहानी : तितली

यह भी फरवरी की एक सर्द सुबह थी.  असल में उन्हें इतना अचम्भा न हुआ  होता जो उस मल्टीस्टोरीड इमारत के अट्ठारहवें माले के दूसरे टावर में उनके पहुंचते ही यह घटा न होता, उन्होने उस वारदात...

कहानी : तुम लोग

कहानी : तुम लोग

       घर के भीतर चूल्हे के अंदर कसमसाती है आग. कागज पर सवार होकर आग गीली लकड़ियों के उपर चढ़ती है और दम तोड़ने लगती है. कागज जलाने से पहले पढ़ती है उन पर लिखी हुई इबारत को. उनमें...

कहानी : हिवड़ो अगन संजोय

कहानी : हिवड़ो अगन संजोय

"ऐ तवा ल्यो, कड़ाही ल्यो, चिमटा ल्यो, दरांत ल्यो ...."  बलखाती हुई आवाज़ के साथ वह लचककर मूलिया दर्जी की दुकान के नुक्कड़ से घूमी तो चौराहे पर मौजूद नज़रें उसी दिशा में उठ गईं!  हर कदम के...

कविता : पचास पार की औरतों

कविता : पचास पार की औरतों

पचास पार की औरतों थोड़ी सी आंच अपने लिए बचा कर रखो  राख़ के ढेर मे बदलने से पहले  अपनी पसंद का कोई तंदूर चुन कर रख दो अपनी थोड़ी सी आंच  खुद को भस्म करने...

कहानी : डर

कहानी : डर

लड़की के साथ गैंग रेप। भीगा तैलिया आंगन में फैलाते हुये उसके कानों में टी.वी. पर आती आवाज टकराई। लॉबी में रखा टी.वी. लगातार अमंत्रित करता है ब्रकेंग न्‍यूज् किचन की ओर जाते उसकी निगाह टी.वी. पर पड़ती...

कहानी : नदी के तहखाने में 

कहानी : नदी के तहखाने में 

उसे बता दिया गया था कि वहाँ जाने के अधिकांश  रास्ते बंद हो गए हैं। उसने अपनी पत्नी को बताया।  -''फिर?'' -''तुम चिंता मत करो। अपने घर-गाँव पहुँचने के लिए हम सरकारी रास्तों...

कविता : सादर श्रद्धांजलि आ. परम पूज्य नर्मदा पुत्र श्री वेगड़ जी को

कविता : सादर श्रद्धांजलि आ. परम पूज्य नर्मदा पुत्र श्री वेगड़ जी को

आज मै दुःखी हूँ उदास हूँ  मेरा पुत्र प्रस्थान कर गया  महा लोक को देव लोक को अंजुली की रेत बिखर गई  महा शून्य शेष रहा मै उसमे नहीँ रची बसी वह मेरी बूँद बूँद मे...

कहानी : कतरे हुए पंख

कहानी : कतरे हुए पंख

वह किशोरी थी या युवती, कहना मुश्किल था। लड़की थी, बड़ी हो रही थी, पर मुझे तो प्रौढ़ा लगती थी। सुबह के ठीक नौ बजे गेट खड़काती और बिना मालिक के अनुमति के इंतजार किए धड़ाधड़ घोड़े पर सवार...

कहानी : सावन की झड़ी

कहानी : सावन की झड़ी

"भाभी, निबंध लिखवा दो!" चीनू ने उसका ध्यान खींचा।  "किस विषय पर?" चीनू की स्कूल डायरी उठा, फिर से नजर बरामदे की ओर लग गयी। जब से सुषमा बरामदे में खड़ी हुई है और उधर...

व्यंग्य : नाम और जयंती संस्कृति

व्यंग्य : नाम और जयंती संस्कृति

1-    मंत्रालय की आपातकालीन बैठक हुई और फलां महापुरुष की जयंती का राजकीय अवकाश घोषित| 2-    कैबिनेट मीटिंग में शहरों के बदलने का प्रस्ताव हुआ सर्वसम्मति से पारित| जी हाँ, अब माननीयों की मीटिंगें देश की अन्य समस्याओं...

 कहानी : हत्यारे

 कहानी : हत्यारे

(# अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कहानी ' द किलर्स ' का हिंदी में अनुवाद) ------------------------------------------------------------------------------- - मूल लेखक : अर्नेस्ट हेमिंग्वे  - अनुवाद : सुशांत सुप्रिय  ------------------------------------------------------------------------------- ' हेनरी भोजनालय ' का दरवाज़ा...