
CG High Court’s Major Verdict After 13 Years: राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति निरस्त, याचिकाकर्ता के पक्ष में दिया आदेश!
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नगर पालिका परिषद भाटापारा में वर्ष 2013 में हुई राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि और संभावित पक्षपात माना। अब नई पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पुनः नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।
रायपुर । छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में स्थित नगर पालिका परिषद भाटापारा में 13 वर्ष पूर्व हुई एक नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने वर्ष 2013 में जारी राजस्व उप निरीक्षक (अनारक्षित) पद की नियुक्ति को निरस्त करते हुए पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया है कि इस पद के लिए पुनः निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाए।
मामले के अनुसार, नगर पालिका परिषद भाटापारा द्वारा 16 नवंबर 2012 को राजस्व उप निरीक्षक पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक के साथ पीजीडीसीए निर्धारित की गई थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन किया था।
हालांकि, जब पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई, तो आश्चर्यजनक रूप से देवेंद्र कुमार साहू का नाम किसी भी सूची में शामिल नहीं था। इसके बावजूद 23 मार्च 2013 को नगर पालिका परिषद ने सतीश सिंह चौहान को उक्त पद पर नियुक्ति दे दी। इस प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर देवेंद्र कुमार साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ईशान सलूजा ने पक्ष रखते हुए बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि देवेंद्र साहू का आवेदन विधिवत रूप से प्राप्त किया गया था, फिर भी उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि चयनित अभ्यर्थी सतीश सिंह चौहान के पिता उस समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के पद पर पदस्थ थे। इतना ही नहीं, चौहान के अनुभव प्रमाण पत्र को भी उनके पिता द्वारा ही जारी किया गया था, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक था।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि किसी पात्र अभ्यर्थी को बिना कारण सूची से बाहर करना न केवल गंभीर त्रुटि है, बल्कि यह पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्रभावित करता है। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि चयनित अभ्यर्थी के पक्ष में पारिवारिक प्रभाव और हितों का टकराव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिससे प्रक्रिया संदिग्ध बनती है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 23 मार्च 2013 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही नगर पालिका परिषद भाटापारा को निर्देशित किया गया है कि वह नई चयन प्रक्रिया आयोजित करे और याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार साहू की उम्मीदवारी पर विधिवत विचार करते हुए नियमों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करे।





