

Clash Between Ex CM and IAS Lobby: Ex CM और IAS लॉबी में टकराव की स्थिति क्यों बनी!
जानिए बाद में पूर्व CM ने अपनी सफाई में क्या कहा!
Clash Between Ex CM and IAS Lobby: उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और IAS लॉबी के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश की IAS लॉबी रावत के खिलाफ लाम बंद हो गई है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने राज्य के IAS एसोसिएशन के साथ टकराव मोल ले लिया है। एक IAS अधिकारी पर उनकी टिप्पणी से IAS लॉबी भड़क गई है।
पूरा मामला यह है कि रावत ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि उनके गृह राज्य में अवैध खनन का बोलबाला है। खनन सचिव ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। खनन सचिव बृजेश कुमार संत का एक वीडियो राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया, जिसमें वे आरोपों से इनकार कर रहे थे। यह साबित हो गया कि रावत IAS अधिकारी को निशाना बना रहे थे। हैरान रावत ने पलटवार करते हुए कहा, “शेर कुत्तों का शिकार नहीं करता”। और मामला शुरू हो गया।
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उत्तराखंड IAS एसोसिएशन ने रावत की ताजा टिप्पणी के मद्देनजर एक बैठक बुलाई और एक बयान जारी कर कहा कि एसोसिएशन को स्वाभाविक रूप से आत्मसम्मान और गरिमा का अधिकार है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि लोक सेवक के रूप में वे संवैधानिक ढांचे के भीतर निर्वाचित सरकारों की नीतियों को लागू करते हैं और इसलिए वे सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा करते हैं। एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर राज्य राज्य के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपने का फैसला किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अवैध खनन पर दिए गए बयान को लेकर सफाई दी है।
मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी अधिकारी का नाम नहीं लिया। उनके बयान के आगे और पीछे के हिस्से को काट कर केवल कहावत को मुद्दा बनाया गया जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सब अधिकारी अपने हैं और प्रिय हैं।
एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं अब संसद में हूं। मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है। मैं तो दिल्ली में हूं। सागर में चला गया हूं। कहा, जब मैं मुख्यमंत्री था, तब आप लोग कहते थे कि अधिकारियों की चलती है। त्रिवेंद्र अधिकारियों को बहुत ज्यादा लिफ्ट देते हैं।
व्यक्ति विशेष या अधिकारी का नाम नहीं लिया
सच्चाई यही है कि मेरे लिए सारे अधिकारियों ने मिल जुलकर काम किया। दिल्ली में मैंने सारे अधिकारियों को अपने आवास पर बुलाया। हमने बहुत प्रेम से चार साल काम किया। उन्होंने मुझे सम्मान दिया। वे मेरा इशारा समझकर काम करते थे। मैंने भी उन्हें भरपूर प्यार दिया।
सभी अधिकारी इस बात को बहुत अच्छे ढंग से समझते हैं। लेकिन मेरे बयान से आगे और पीछे का हिस्सा काट कर कहावत को मुद्दा बना दिया गया, यह भी उचित नहीं है। मैं इसका खंडन करता हूं। मेरा बयान यदि सुनेंगे तो मैंने किसी व्यक्ति विशेष या अधिकारी का नाम नहीं लिया। मैंने तो यह कहा कि किस अधिकारी ने कहा, मुझे पता नहीं है।
उधर खनन कारोबारियों ने हल्द्वानी बाईपास पर पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला फूंककर उनके खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सीएम रावत ने खनन पॉलिसी और दलितों पर गलत टिप्पणी की है। जिसके लिए उनको माफी मांगनी होगी।
चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रावत ने माफी नहीं मांगी तो वह आंदोलन करेंगे। बाईपास पर जुटे खनन कारोबारियों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने गलत टिप्पणी की है। जबकि भाजपा सरकार प्रदेश में सराहनीय कार्य रही है। खनन नियमावली से सरकार का राजस्व बढ़ा है। इसलिए उनको बयान वापस लेना चाहिए। चेतावनी दी कि जब तक रावत माफी नहीं मांगते उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।