Kanchanbai के बलिदान पर CM का संज्ञान: परिवार को आर्थिक सहायता और बच्चों की पढ़ाई का भरोसा

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Kanchanbai के बलिदान पर CM का संज्ञान: परिवार को आर्थिक सहायता और बच्चों की पढ़ाई का भरोसा

▪️गोविंद सिंह प्लास

Neemuch: नीमच जिले के जावद तहसील अंतर्गत रानपुर गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल की शहादत अब केवल एक गांव की कहानी नहीं रही। 20 मासूम बच्चों को मधुमक्खियों के हमले से बचाते हुए अपनी जान गंवाने वाली कंचन बाई के साहस ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संज्ञान लेते हुए मृतिका के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की है।

 

● मधुमक्खियों के झुंड के सामने दीवार बन गई थी कंचन बाई

सोमवार 1 फरवरी को रानपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में बच्चे खेल रहे थे, तभी पास के पेड़ से मधुमक्खियों का झुंड अचानक बच्चों पर टूट पड़ा। अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच कंचन बाई बिना किसी डर के बच्चों की ओर दौड़ीं। उन्होंने अपनी साड़ी और पास पड़ी तिरपाल को ढाल बनाकर एक-एक बच्चे को ढकते हुए सुरक्षित कमरे तक पहुंचाया। मधुमक्खियों का पूरा झुंड उन पर हमला करता रहा, लेकिन उन्होंने तब तक कदम पीछे नहीं खींचे जब तक अंतिम बच्चा सुरक्षित नहीं हो गया।

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● हजारों डंक, फिर भी नहीं छोड़ा मैदान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कंचन बाई के शरीर पर हजारों मधुमक्खियों के डंक लगे। दर्द असहनीय था, शरीर नीला पड़ चुका था, लेकिन बच्चों को सुरक्षित देखे बिना उन्होंने हार नहीं मानी। बच्चों के बचते ही उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें 112 एंबुलेंस से सरवानिया स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

● मुख्यमंत्री का ऐलान: परिवार को 4 लाख, बच्चों की पढ़ाई सरकार उठाएगी

कंचन बाई के अदम्य साहस को नमन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मानवीय आधार पर उनके परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी घोषणा की गई है कि कंचन बाई के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताया है।

 

● प्रशासनिक बयान पर उठे सवाल, गांव में नाराजगी

जहां एक ओर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधि कंचन बाई के बलिदान को सलामी दे रहे हैं, वहीं नीमच जिला प्रशासन द्वारा जारी एक प्रेस नोट ने विवाद खड़ा कर दिया है। प्रशासन का दावा है कि कंचन बाई की मृत्यु बच्चों को बचाने के दौरान नहीं हुई। इस बयान से गांव और क्षेत्र में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि क्या प्रशासन पुरस्कार और जिम्मेदारी से बचने के लिए वीरता के तथ्य को नकार रहा है।

 

● जनप्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया पर किया नमन

कंचन बाई की शहादत को लेकर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक दिलीप सिंह परिहार, ओमप्रकाश सखलेचा और अनिरुद्ध माधव मारू सहित कई जनप्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके साहस को सलाम किया है।

● लकवाग्रस्त पति और तीन बच्चों का सहारा थीं कंचन बाई

कंचन बाई अपने परिवार की एकमात्र कमाऊ सदस्य थीं। उनके पति शिवलाल लकवा से पीड़ित हैं और तीन छोटे बच्चे हैं। गांव की मांग है कि कंचन बाई को मरणोपरांत राजकीय सम्मान दिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि उनके बलिदान पर कोई सवाल न उठे।

कंचन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन रानपुर गांव के वे 20 बच्चे हर सांस के साथ उनकी ममता, साहस और बलिदान की कहानी को जिंदा रखेंगे।