बंदूक के बल पर बोलने , नाचने , गाने का फरमान

बंदूक के बल पर बोलने , नाचने , गाने का फरमान

मीडियावाला.इन।

सचमुच क्या मुंबई जाने से पहले दस बार सोचना होगा ? क्या अपनी जान बचाने का इंतजाम करके प्रवेश करना होगा ? लेकिन आजकल बाल ठाकरे या उनसे बिछुड़े सत्ताधारी भाई उद्धव ठाकरे और उनके हथियारबंद साथी तो उत्तर  भारतीयों को सार्वजानिक रूप से धमकियां नहीं दे रहे हैं | फिर क्यों डरना ? जी नहीं डरना होगा | उनसे अधिक शक्तिशाली सत्तारूढ़  दल के अध्यक्ष परम आदरणीय श्री नाना भाऊ फाल्गुन राव पटोले ने खुले आम एलान कर दिया है कि फ़िल्मी दुनिया के विश्व विख्यात बादशाह कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन और हाल के दशकों में सफल अक्षय कुमार यदि उनके आदेशानुसार  नहीं लिखे पढ़े और बोलेंगे , तो  महाराष्ट्र में न उनकी फिल्म चलने दी जाएगी और न ही उनकी किसी फिल्म की शूटिंग होने दी जायेगी | अब मेरे जैसे लाखों लोगों के लिए यह धमकी क्या चिंताजनक नहीं होगी ? यदि इतने बड़े लोकप्रिय अभिनेताओं की ऐसी फजीहत हो सकती है , तो हम जैसों को  तो दादा पटोले , उनकी कांग्रेस पार्टी और साथी शिव सेना के सैनिक तलवार या बंदूक के निशाने पर बोलने लिखने को कह सकते हैं | खासकर जब वह पहले दल बदल और फिर पद बदलने के बाद  प्रदेश पार्टी अध्यक्ष से मुख्यमंत्री बनने की तैयारी में लगे हैं | 
गनीमत है कांग्रेस ने उनकी अद्भुत क्षमताओं को ध्यान में रखकर पार्टी सौंप दी है , वरना विधान सभा अध्यक्ष के पास अवमानना के विशेषाधिकार के नाते आदेश की अवहेलना पर अमिताभ तो क्या भारत रत्न आदरणीय लता मंगेशकरजी को सदन में हाजिर करवाकर दो चार दिन जेल भेजने का आदेश जारी कर देते | वैसे मेरे जैसे अज्ञानी लोगों को उनके इस बयान से उनकी पृष्ठ्भूमि का ज्ञान भी प्राप्त हुआ | कम उम्र मैं पत्रकारिता में आने के कारण दिल्ली में रहते हुए यशवंत राव चव्हाण , वसंत दादा पाटिल , वसंत राव नाइक , शंकर राव चव्हाण , शरद पवार और श्रीमती प्रतिभा पाटिल तक से मिलने , बात करने , उनकी राजनीति कभी मीठा कभी कड़वा लिखने बोलने के अवसर मिले हैं | लेकिन श्रीमान पटोले जब भारतीय जनता पार्टी के सम्मानित सांसद थे , तब भी उनका नाम सुनने या उनसे मिलने का अवसर नहीं मिला | हां दल बदलुओं की बारात में शामिल होने पर नाम सुनने को मिला | इस दृष्टि से स्वीकारना होगा कि कांग्रेस ने अस्सी के दशक की तरह भिंडरावाले तैयार करने के फॉर्मूले को अपना लिया है | किसान आंदोलन में घुसपैठ करने वाले हों या महाराष्ट्र में सत्ता की तलवार भांजने वाले हों या बंगाल में नक्सली आरोप में इंदिरा राज में जेल भेजे गए चौधरी हों , कांग्रेस अब बंदूक के बल पर नाचने को कहेगी | आख़िरकार शोले में दस्यु सरदार बने अमजद खान और साथियों की बंदूक के निशाने पर ही तो हेमा मालिनी को ' जब तक है जान , मैं नाचूंगी 'गाते हुए नाचना  पड़ा था | शोले के ज़माने में ही आपात काल था | अब राहुल उद्धव पार्टियों के सत्ता में रहते दादा पटोले का दस्यु रूप है |
 नानाभाऊ पटोले ने अमिताभ बच्चन को मनमोहन सिंह के सत्ता काल में पेट्रोल डीजल के मूल्य बढ़ने पर ट्वीट करने की याद दिलाई है | लेकिन मिस्टर पटोले को शायद याद नहीं या देर से अपने साथी शिव सेना के सामना में (  जुलाई 2012 )    आदरणीय बाल ठाकरे का सम्पादकीय ध्यान में लाया जाए , जिसमें बाला साहब ने मनमोहन सिंह को ' राजनीतिक नपुंसक " कहकर कांग्रेस पार्टी , सरकार और सोनिया गाँधी पर कितने गंभीरतम आरोप लगाए थे | अब क्या वह शिव सेना से उसी शैली में कांग्रेस पर वार करने को कहना चाहेंगें | वैसे कह भी सकते हैं | भाजपा से कांग्रेस में आए थे | अब बड़ा पद पाने को देर सबेर शिव सेना में शामिल हो जाएं | लेकिन तब एक समस्या होगी - अमिताभ के सम्बन्ध बाला साहेब से बहुत अच्छे थे |  यों राजीव गाँधी के बाल सखा होने के कारण कांग्रेस से भी उनके सम्बन्ध रहे थे और जब पटोले 23 साल के नादान युवक थे , तब अमिताभ उसी पार्टी से लोक सभा का चुनाव भी जीते थे | इसलिए उनकी राजनीतिक सोच समझ के लिए पटोले पाठ  या राहुल क्लास की आवश्यकता नहीं होगी |
लोकतंत्र में पटोले मंडली को भी आलोचना का अधिकार है | अमिताभ - अक्षय कुमार या किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की गलती या अपराध पर क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है | इसी तरह उनके किसी वक्तव्य या टिपण्णी पर पटोले महाशय मानहानि का मुकदमा दर्ज कर सकते हैं | लेकिन न बोलने और उनके आदेश पर काम न करने पर पटोले कैसे जबरदस्ती कर सकते हैं | नेता गण और सामान्य पाठक बंधु भी कृपया सोचिये - संभव है - कुछ महीने बाद यही दादा पटोले की मंडली टाटा , अम्बानी , गोदरेज , मित्तल जैसे उद्यमियों को आदेशानुसार बोलने , चंदा देने की धमकी देने लगे | हाँ उनके सहयोगी दल के पचासों पट्ठे मुंबई में हफ्ता वसूली के लिए बदनाम रहे हैं | 
आश्चर्य और दुखद बात यह है कि पटोले की जहरीली धमकी पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और अनुभवी वरिष्ठ नेता शरद पवार ने तत्काल सार्वजनिक रूप से फटकार नहीं लगाई | आप कह सकते हैं कि इस तरह की धमकी की परवाह न की जाए | लेकिन यह तो सोचें कि जब पार्टी अध्यक्ष ऐसा करेगा तो जिला , ग्रामीण स्तर के नेता कार्यकर्ता समाज के अन्य लोगों को इसी तरह बोलने काम करने के लिए धमकाने लगेंगे | उनको कौन बचाएगा ? पार्टी या किसी भी संगठन का नाम लेकर विभिन्न राज्यों में होने वाली किसी भी गतिविधि का कड़ाई और क़ानूनी ढंग से प्रतिकार होना चाहिए | अन्यथा नक्सली अदालत की तरह समाज में कोई भी गिरोह गैर क़ानूनी  आदेश और सजा देने लगेगा | अभी सड़कों , रेल मार्गों पर जबरन कब्ज़ा करके व्यवस्था और सामान्य जनों को निरंतर संकट में डाला जा रहा है | देर सबेर किसी दफ्तर या घरों पर कब्जा ज़माने की हिमाकत होने लगेगी | सत्ता और विपक्ष की लड़ाई अराजकता की और ले जाना सबके लिए घातक होगा | 

 

आलोक मेहता

पद्मश्री (भारत सरकार) से सम्मानित, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार-पत्रकार सम्मान-2006, दिल्ली हिन्दी अकादमी द्वारा श्रेष्ठ लेखन पुरस्कार-1999 पद्मश्री आलोक मेहता हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे "नई दुनिया" के प्रधान सम्पादक हैं।

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