तेलंगाना में चंद्रशेखर राव की लम्बी रणनीति

तेलंगाना में चंद्रशेखर राव की लम्बी रणनीति

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी, जिसके आधार पर राज्यपाल ने विधानसभा को भंग कर दिया। विधानसभा का कार्यकाल 8 महीने और शेष था, लेकिन केसीआर ने बहुत सोच समझकर यह फैसला किया। 

वर्तमान में तेलंगाना की विधानसभा में कुल 119 सीट हैं, जिनमें सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी (टीआरएस) के पास 90, विपक्षी कांग्रेस के पास 13 और भारतीय जनता पार्टी के पास 5 सीट हैं। केसीआर ने बहुत ही सोच समझकर यह फैसला लिया, जिसकी प्रमुख वजह ये हैं :

अल्पसंख्यक वोटों का गणित :

केसीआर को लगता है कि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव हुए तो असदुद्दीन ओवैसी की आई एम आई एम के साथ गठबंधन करके अल्पसंख्यक वोटों को प्रभावित किया जा सकता है। तेलंगाना में ऐसे मतदाताओं की संख्या 12 प्रतिशत है। 

विपक्ष को चुनाव की तैयारी का मौका नहीं मिले :

केसीआर चाहते थे कि तेलंगाना में विधानसभा का चुनाव जल्दी हो जाए, ऐसी हालत में विपक्ष के पास चुनाव के तैयारी करने के लिए समय नहीं रहेगा। लोकसभा में अविश्वास मत के दौरान और राज्यसभा में उपसभापति चुनाव में कांग्रेस और तेलुगु देसम पार्टी साथ में थी। ऐसे में केसीआर को लगा कि हो सकता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी ये दल मिल जुल कर चुनाव लड़ें, इसलिए बेहतर है कि चुनाव पहले करा लिए जाएं।

लोकसभा चुनाव के पहले विधानसभा चुनाव : 

केसीआर को महसूस हुआ कि तेलंगाना में विधानसभा चुनाव अगर लोकसभा चुनाव के साथ हुए तो उनकी पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसी वर्ष के अंत तक मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के चुनाव होने हैं। पहले चुनाव होने से केंद्र में होनेवाले चुनाव की रणनीति तेलंगाना में उतनी प्रभावी नहीं हो सकेगी।

कांग्रेस-टीडीपी से मुकाबला आसान 

केसीआर जानते हैं कि विधानसभा की अवधि समाप्त होने का इंतज़ार करते तो उन्हें अप्रैल 2019 तक रुकना पड़ता। अगर ऐसे में कांग्रेस अपने प्रधानमंत्री उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर देती तो पार्टी के वोटर प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि तेलंगाना में कांग्रेस प्रमुख विरोधी दल है। 

लोकसभा चुनाव की तैयारी :

विधानसभा चुनाव पहले होने की स्थिति में केसीआर के ऊपर ज्यादा भार नहीं आएगा. पहले विधानसभा चुनाव होने पर उन्हें जितने की संभावना नज़र आ रही है। इससे उनके लिए लोकसभा चुनाव लड़ने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री को दोनों चुनाव की तैयारियों के लिए पर्याप्त वक्त मिल सकेगा।

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।