Monday, January 27, 2020
केरल से सीखे सारा देश

केरल से सीखे सारा देश

मीडियावाला.इन।

केरल में कल-परसों ऐसा काम हुआ है, जो पूरे देश में बड़े पैमाने पर होना चाहिए। कोची के समुद्रतट के किनारे चार गगनचुंबी भवनों को कुछ ही सेकेंड में जमीदोज़ कर दिया गया। ये भवन 17 से 19 मंजिले थे। इनमें तीन सौ से ज्यादा फ्लैट बने हुए थे। इन फ्लैटों में 300 से ज्यादा परिवार कई वर्षों से रह रहे थे। इन फ्लैटों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत गिराया गया। ये फ्लैट निजी बिल्डरों ने गैर-कानूनी ढंग से बनाकर लोगों को कई वर्ष पहले बेच दिए थे। इन्हें बनाने की इजाजत केरल के नौकरशाहों ने दी थी। जब इनके खिलाफ मुकदमा चला तो उच्च न्यायालय ने इन्हें निर्दोष पाया लेकिन सबसे बड़ी अदालत के सामने यह मामला टिक नहीं पाया। साल भर पहले उसने इन गैर-कानूनी फ्लैटों को गिराने का फैसला दिया। फ्लैट के निवासियों ने काफी शोरगुल मचाया, काफी उठा-पटक की लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। अदालत ने प्रत्येक फ्लैट-मालिक को 25-25 लाख रु. का हर्जाना देने का आदेश दिया और आखिरकार इन भव्य भवनों को गिरवा दिया। इतने बड़े पैमाने पर अवैध भवन गिरवाने का कारनामा पहली बार हुआ है। अभी तो ऐसे सिर्फ चार भवन ही गिरे हैं, अभी देश में ऐसे ही हजारों भवन हैं, जिन्हें तुरंत गिराया जाना चाहिए। कई पड़ौसी देशों का हाल हमसे भी बुरा है। ऐसे अवैध भवनों से प्राकृतिक संपदा की हानि तो होती ही है, आम नागरिकों के हक भी मारे जाते हैं। ऐसे भवनों को सिर्फ गिरवा देना काफी नहीं है। जिन नौकरशाहों ने इनकी अनुमति दी है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे अवैध भवन-निर्माताओं को भी कठोर सजा मिलनी चाहिए। पैसों के लालच में वे इतने पागल हो गए थे कि उन्होंने अदालत के आदेश के बावजूद अपना निर्माण-कार्य जारी रखा। उनसे भी कम से कम आधा जुर्माना लिया जाना चाहिए था।

 

0 comments      

Add Comment


डॉ. वेदप्रताप वैदिक

  • डॉ॰ वेद प्रताप वैदिक (जन्म: 30 दिसम्बर 1944, इंदौर, मध्य प्रदेश) भारतवर्ष के वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, पटु वक्ता एवं हिन्दी प्रेमी हैं। हिन्दी को भारत और विश्व मंच पर स्थापित करने की दिशा में सदा प्रयत्नशील रहते हैं। भाषा के सवाल पर स्वामी दयानन्द सरस्वती, महात्मा गांधी और डॉ॰ राममनोहर लोहिया की परम्परा को आगे बढ़ाने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है।
  • वैदिक जी अनेक भारतीय व विदेशी शोध-संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में ‘विजिटिंग प्रोफेसर’ रहे हैं। भारतीय विदेश नीति के चिन्तन और संचालन में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने लगभग 80 देशों की यात्रायें की हैं।
  • अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले हिन्दी में बेहतर पत्रकारिता का युग आरम्भ करने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है। उन्होंने सन् 1958 से ही पत्रकारिता प्रारम्भ कर दी थी। नवभारत टाइम्स में पहले सह सम्पादक, बाद में विचार विभाग के सम्पादक भी रहे। उन्होंने हिन्दी समाचार एजेन्सी भाषा के संस्थापक सम्पादक के रूप में एक दशक तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में काम किया। सम्प्रति भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष तथा नेटजाल डाट काम के सम्पादकीय निदेशक हैं।