चिड़चिड़ी 'सास' पर प्यारी 'दादी' बहुत याद आएगी!

चिड़चिड़ी 'सास' पर प्यारी 'दादी' बहुत याद आएगी!

मीडियावाला.इन।

 बड़े और छोटे परदे की चर्चित 'दादी' सुरेखा सीकरी नहीं रही। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। वे 75 साल की थी और लम्बे समय से बीमार थीं! पिछले साल वे ब्रेन स्ट्रोक का शिकार भी हुई, जब शूटिंग के दौरान सुरेखा बाथरूम में गिर गई थी। उन्होंने कई साल फिल्मों में काम करने के बाद जब टीवी का रुख किया, तो अपनी हम उम्र भूमिका करने वाली कई अभिनेत्रियों को पीछे छोड़ दिया। टीवी सीरियल 'बालिका वधू' से 'बधाई हो' फिल्म तक चिड़चिड़ी सास के रूप में उनके काम को दर्शकों ने बहुत ज्यादा पसंद किया। 1996 की संगीतमय फिल्म 'सरदारी बेगम' और 2001 की 'जुबैदा' में उनके काम को बहुत सराहा गया था। सिनेमा में सुरेख सीकरी ने रितुपर्णो घोष, अपर्णा सेन और मणि कौल जैसे प्रसिद्ध निर्माताओं के साथ काम किया। 90 के दशक में 'सांझा चूल्हा' से टीवी पर अपनी शुरुआत के बाद कभी कभी, बस मोहब्बत, सीआईडी, बनेगी अपनी बात और 'बालिका वधू' जैसे शो में काम किया। उन्होंने 'परदेस में है मेरा दिल' और 'एक था राजा एक थी रानी' जैसे सोप ओपेरा में भी 'दादी' की भूमिका निभाई। 

    सुरेखा सीकरी थियेटर, टीवी और फिल्मों में लम्बे समय तक हिस्सा रही। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1978 में पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ से की। उन्हें 3 बार बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। उन्होंने तमस, मम्मो, बधाई हो, सलीम लंगड़े पे मत रो और 'जुबैदा' में भी काम किया। सुरेखा ने 1971 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से पढ़ाई की। 1989 में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड भी जीता। लेकिन, उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली टीवी शो 'बालिका वधु' में दादी की भूमिका कल्याणी देवी से मिली। वे 2008 से 2016 तक इस शो का हिस्सा रही। सुरेखा को आखिरी बार नेटफ्लिक्स के एंथोलॉजी 'घोस्ट स्टोरीज' (2020) में जोया अख्तर द्वारा निर्देशित कहानी में देखा गया था। पिछले साल जब सुरेखा ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुई, तब खबरें आई कि वे आर्थिक संकट में हैं। बाद में उनके मैनेजर ने इन खबरों को गलत बताया। कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक है और उनके बच्चे साथ में हैं। उन्हें किसी आर्थिक मदद की जरूरत नहीं! लेकिन, फिर भी उनके कई शुभचिंतक, साथी  कलाकार और फिल्ममेकर्स उनकी सहायता के लिए आगे आए थे। 

Veteran actress Surekha Sikri is out of danger and can speak now; tweets  Director Anubhav Sinha - IBTimes India

   सुरेखा सीकरी मूलत: उत्तर प्रदेश से थीं। उनका बचपन अल्मोड़ा और नैनीताल में बीता। उनके पिता एयरफोर्स में थे और मां टीचर थीं। सुरेखा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से स्नातक की पढ़ाई की और 1968 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दाखिला लिया। 1971 में एनएसडी से स्नातक होने के बाद सीकरी ने थिएटर में काम करना जारी रखा और एक दशक से अधिक समय तक एनएसडी रिपर्टरी कंपनी से जुड़ी रहीं। यहाँ उन्होंने संध्या छाया, तुगलक और आधे अधूरे' जैसी हिट नाटकों में काम किया। मुंबई में सुरेखा ने अमृत नाहटा की विवादास्पद राजनीतिक फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' से फिल्मों में शुरुआत की थी। 1986 में गोविंद निहलानी निर्देशित 'तमस' में भी काम किया। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। 1989 में सईद अख्तर मिर्जा की फिल्म 'सलीम लंगड़े पे मत रो' की। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। श्याम बेनेगल की 1994 में आई फिल्म 'मम्मो' में सीकरी को महत्वपूर्ण सहायक भूमिका मिली, जिसे काफी पसंद किया। फिल्म में दादी रिफुजी के रूप में उनके अभिनय ने उन्हें दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाया। टीवी पर दादी के रूप में सुरेखा सीकरी के प्रभावशाली परफॉर्मेंस ने उन्हें नई पहचान दी और 2018 की फिल्म 'बधाई हो' के लिए तीसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। लेकिन, अब ये सब पुरानी बात हो गई! दर्शकों की पसंदीदा 'दादी' मनोरंजन की दुनिया से हमेशा के लिए बिदा हो गई! 

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