इसलिये फिर शिवराज, फिर 6 माह में चुनाव

इसलिये फिर शिवराज, फिर 6 माह में चुनाव

मीडियावाला.इन।

अब जबकि शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, तब यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि आखिरकार उन पर मोदी-शाह-नड्डा ने भरोसा किस वजह से किया। वह भी तब जबकि वे तो पहले ही तीन बार इस पद पर रह चुके हैं और अनेक दावेदार मौजूद हैं। जवाब बेहद साफ है कि तीन बार में जो उन्होंने प्रदेश के निचले तबके को साध रखा था, उसकी बदौलत पांचवीं बार भाजपा संपूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी चाहती है।
    इस समय प्रदेश के जो राजनीतिक हालात हैं, उसके मद्देनजर आलाकमान प्रदेश को लंबे वक्त तक बिना चुनाव के नहीं रखना चाहता। उसकी कोशिश रहेगी कि नवंबर-दिसंबर में मध्यप्रदेश में मध्यावधि चुनाव करवा लिये जायें। जिन 24 विधानसभाओं में उप चुनाव कराये जाने हैं, वे कमोबेश अक्टूबर तक करवाने होंगे। जिसमें नतीजों के एकतरफा होने का खतरा उठाना राजनीतिक तौर पर सही शायद ही रहे। 4-6 सीटें गड़बड़ाने पर कांग्रेस फिर से सत्ता छीन सकती है। जबकि पूर्ण चुनाव में भाजपा बेहतर काम दिखा सकती है।
    सबसे बड़ा फायदा उसे यह हो सकता है कि वह इन 6-8 माह में खजाना खोल दे। जिसे जो दिया जा सके, वह लुटा दे। क्या सवर्ण, क्या पिछड़ा, क्या आरक्षित वर्ग, क्या शासकीय सेवक और क्या कार्यकर्ता ? सबको भरपल्ले बांट कर वह सबसे स्वाभावकि उम्मीद कर सकती है कि गुरु दक्षिणा भी उसी खुले मन से दे। इसमें यह सुविधा भी है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ जो कांग्रेसी आये हैं, उनमें से अभी जिनको भी मंत्री बनाना है, वह 6 महीने तक बिना चुनाव लड़ाये बना सकती है। इस बीच बचे बाकी एक दर्जन(कुल 16 हैं) के करीब सिंधिया समर्थकों को टिकट देने के लिये उस क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं/संभावित प्रत्याशियों को मना भी सकेगी और उपकृत भी कर सकेगी।
    बेशक,भाजपा की कार्य प्रणाली में किसी भी पद पर किसी को भी बिठाने के अपने मानदंड हैं और उस दृष्टि से मप्र मेंं दावेदारों की कमी नहीं, लेकिन यहां सवाल सर्व प्रभावी व्यक्तित्व का है। इस मापदंड पर शिवराज अव्वल हैं। प्रदेश अध्यक्ष इस वक्त ब्राह्मण हैं तो नरोत्त्म मिश्रा का नाम विचारणीय कभी नहीं रहा। नरेंद्र सिंह तोमार पसंद हो सकते थे, लेकिन उनका जादू ग्रामीण इलाके और गैर भाजपाई मतदाता में नहीं है, जबकि शिवराज में वो माद्दा है।
     चुनाव के बाद कुछ भी समीकरण बने, उससे फर्क नही पड़ता। वैसे भी राजनीतिक दल अपने एजेंडे पर चलते हैं, जिसमें व्यक्ति का उपयोग कर आगे चल दिया जाता है। भाजपा नेता के तौर पर शिवराज कमोबेश हर वर्ग के बीच अपेक्षाकृत अधिक लोकप्रिय हैं, जो चुनाव जिताने की गारंटी है।

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

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संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                            

प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

शहर संपादक - नईदुनिया, इंदौर

समाचार संपादक - दैनिक भास्कर, इंदौर 

कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

उप संपादक - नवभारत, इंदौर

साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० 1990 में  दैनिक नवभारत के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया।

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985।

० 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का विभिन्न अखबारों में प्रकाशन, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के एक माह के भीतर किताब युग-युग मोदी का प्रकाशन 23 जून 2019 को।

सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।

विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।

मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।

किताबें-इंदौर के सितारे(2014),इंदौर के सितारे भाग-2(2015),इंदौर के सितारे भाग 3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) , युग-युग मोदी(2019) सहित 8 किताबें प्रकाशित ।

भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी।

रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार ।

संप्रति- 2014 से बतौर स्वतंत्र पत्रकार भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण,अग्निबाण, चौथा संसार,दबंग दुनिया,पीपुल्स समाचार,आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में लेखन।