कुछ अफसर जेल में, कुछ फरार!

कुछ अफसर जेल में, कुछ फरार!

मीडियावाला.इन।

मप्र में शासन-प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी जिन अफसरों के ऊपर है वे ही कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पहली बार देखने में आया है कि इस सप्ताह कुछ जिम्मेदार अधिकारी जेल भेजे गए हैं। कुछ जिम्मेदार अधिकारी जेल के डर से फरार हो गए हैं। फर्जी दस्तावेज पर IAS बनने वाले संतोष वर्मा और आबकारी विभाग में जमकर अवैध कमाई करने वाले पराक्रम सिंह इंदौर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए हैं। उद्यानिकी विभाग के कमिश्नर रहे भारतीय वन सेवा के मप्र कैडर के IfS अधिकारी एम. कालीदुर्रई गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए हैं। 1996 बैच के यह अधिकारी पिछले 10 माह से लापता हैं। आरोप है कि उद्यानिकी विभाग में इन्होंने जमकर गोलमाल किया था। झाबुआ की डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी 42 लाख का घोटाला करके फरार हैं। अलीराजपुर के जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही पर एक महिला ने दुष्कर्म के आरोप लगाए हैं। रंगशाही भी लगभग 25 दिन से लापता हैं। 

युवा आईएएस की बोलती बंद
मप्र कैडर के युवा आईएएस अधिकारी लोकेश जांगिड़ ने अचानक मौन धारण कर लिया है और वे चुपचाप राज्य शिक्षा केन्द्र में अपर संचालक की नौकरी कर रहे हैं। कुछ दिन पहले जब उन्हें बड़वानी के CEO जिला पंचायत से हटाया गया तो उन्होंने वहां के कलेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। जांगिड़ ने शासकीय सेवा शर्तों को लांघते हुए भोपाल में जमकर बयानबाजी शुरू कर दी थी। उन्होंने प्रदेश के एक बड़े नेता की पत्नी का नाम लेकर गंभीर आरोप भी लगा दिए थे। इसके बाद अचानक लोकेश जांगिड़ ने मौन साध लिया और उन्होंने स्वयं को अपने कार्यालय तक सीमित कर लिया है। मुखबिरों की खबर है कि राज्य सरकार ने जांगिड़ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी की थी।  इस कार्रवाई से पहले उन्हें समझा दिया गया कि शासकीय सर्विस में रहकर भगतसिंह नहीं बना जा सकता। 

सट्टे में पत्नी को दांव पर लगाया और हारा
यह खबर थोड़ी चौंकाने वाली है। राजधानी भोपाल में क्रिकेट के सट्टे की लत लगने पर एक युवक लगभग 2 करोड़ की बाजी में अपनी पत्नी को दांव पर लगाकर न केवल हार गया बल्कि उसने अपनी पत्नी जीतने वाले युवक को सौंप भी दी है। मामला उपनगर बैरागढ़ का बताया जा रहा है। हारने वाला युवक पत्नी को छोड़कर अपनी मां के पास रहने दूसरे शहर में चला गया है। दूसरी ओर जुए में हारी पत्नी अब जीतने वाले के घर खुशी-खुशी रह रही है। इस मामले में अब हारने वाले युवक ने सहमति से पत्नी को तलाक देने का आवेदन जिला न्यायालय में लगा दिया है। तलाक की औपचारिकता के बाद उसकी पत्नी सट्टे में जीतने वाले युवक से औपचारिक शादी करेगी। फिलहाल वह बिना शादी के भावी पति के साथ लिव इन में रह रही है। 

पत्रकार बने ज्योतिषाचार्य 
मप्र में पत्रकारों को राजनीति में पद लेते तो देखा था। कुछ पत्रकारों ने अपने व्यवसाय भी स्थापित किए। लेकिन पत्रकारिता से ज्योतिष में जाते हुए पहली बार देखा जा रहा है। भोपाल में एक बड़े अखबार के स्थानीय संपादक रहे आईबी रस्तोगी काफी अच्छे ज्योतिष के जानकार थे। वे दिन भर ज्योतिष की पुस्तकें पढ़ते रहते थे। एक अन्य अखबार में काम करने वाले कृष्णराव दौंड़ काकाजी  ने ज्योतिष को व्यवसाय के रूप में शुरू किया। कोलार रोड पर उनके परामर्श केन्द्र पर लोगों की भीड़ रहती है। भोपाल में ही कई प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी कलम से पहचान बनाने वाले भूपेन्द्र निगम भी आजकल पत्रकार की बजाए ज्योतिषाचार्य कहलाना पसंद करते हैं। वे लोगों को ज्योतिष की सलाह दे रहे हैं। पत्रकारिता में तेजी से उभरी भूमिका कलम पहले खेती के व्यवसाय में गईं लेकिन आजकल वे भी लोगों का भविष्य बताने में लगी हैं। भोपाल के दैनिक अखबार में संवाददाता रहे अरविन्द तिवारी ने भी ज्योतिष को व्यवसाय बना लिया है। वे कई टीवी चैनलों पर अपने ज्योतिष ज्ञान को लेकर छाए रहते हैं।

यह नवाब रजा कौन है?
इस सप्ताह कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलामनबी आजाद भोपाल में नवाब रजा नामक व्यक्ति के घर शोक व्यक्त करने आए थे। गुलामनबी ने भोपाल आने से पहले कमलनाथ को सूचना दी तो कमलनाथ ने कांग्रेस के दो विधायक उनके स्वागत में लगा दिए। गुलामनबी की यात्रा के बाद लोग नवाब रजा को जानने के बारे में उत्सुक हो गए हैं। मप्र पुलिस में सब इंस्पेक्टर से नौकरी शुरू करने वाले नवाब रजा को आजकल मप्र का शुगर किंग कहा जाने लगा है। उन्होंने जमीनों के धंधे में भी जबर्दस्त निवेश किया है। भोपाल में वीआईपी रोड पर एक शानदार बंगला खरीदने के लिए उन्होंने शर्मिला टैगोर से हाथों हाथ एनओसी ली थी। फिलहाल नवाब रजा और उनके कारोबार चर्चा का विषय बन गए हैं। 

तीन विधायक आउट ऑफ कंट्रोल!
प्रदेश भाजपा में अनुशासन का हंटर कुछ कमजोर नजर आने लगा है। प्रदेश के तीन भाजपा विधायक आउट ऑफ कंट्रोल हैं। इनमें से दो विधायक पार्टी लाईन से हटकर न केवल बयानबाजी कर रहे हैं बल्कि पार्टी को परेशानी में भी डाल रहे हैं। अजय विश्नोई सरकार की नीतियों पर जमकर हमले कर रहे हैं। इस सप्ताह उन्होंने किसानों के नाम पर शिवराज सरकार को घेरा है। नारायण त्रिपाठी ने विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है। त्रिपाठी भी सरकार की योजनाओं पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा के शरद कौल बेशक मुखर नहीं है लेकिन उनका शरीर भाजपा में और आत्मा कांग्रेस में बताई जा रही है। यह भी तय है कि अजय विश्नोई बेशक बयानबाजी करें लेकिन भाजपा में रहेंगे। जबकि नारायण त्रिपाठी और शरद कौल कमलनाथ के संपर्क में अभी भी बने हुए हैं। 

और अंत में....
मप्र भाजपा सत्ता और संगठन में एक सवाल लंबे समय से पूछा जा रहा है जिसका अभी तक किसी के पास जवाब नहीं है। सवाल है कि यशोधरा राजे सिंधिया को गुस्सा क्यों आता है? शिवराज के पिछले कार्यकाल में यशोधरा राजे सिंधिया अपनी मां राजमाता सिंधिया की कथित उपेक्षा को लेकर पार्टी के सामने नाराजगी व्यक्त करती रही हैं। मौजूदा कार्यकाल में यशोधरा राजे की ख्याति कैबिनेट की बैठकों में अपनी ही सरकार के मंत्रियों से भिड़ने के कारण फैल रही है। प्रदेश संगठन महामंत्री उन्हें बुलाकर समझा चुके हैं लेकिन यशोधरा राजे पर फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है। मुखबिरों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद यशोधरा राजे पार्टी में स्वयं को अपेक्षित महसूस कर रही हैं। उनकी नाराजगी का कारण भी यही है।

रवीन्द्र जैन

रवीन्द्र जैन न्यूज वर्ल्ड चैनल के स्टेट एडीटर हैं.

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