मुख्यमंत्री जी माना आप बहादुर हैं लेकिन वक्त 'बहादुरी' का नहीं हैं

मुख्यमंत्री जी माना आप बहादुर हैं लेकिन वक्त 'बहादुरी' का नहीं हैं

मीडियावाला.इन।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कोविड- 19 के मरीजों का इलाज करने के लिये विशेष योग्यता के साथ चिन्हित किये गये राजधानी भोपाल के चिरायु मेडिकल अस्पताल में भर्ती किया गया है। प्रदेश की 7 करोड़ आबादी शुभकामनाओं और संवेदनाओं के साथ अपने 'मामा' मुख्यमंत्री के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए दिल से दुआ कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती तो अनुष्ठान भी कर रही है, यह कह कर मेंरा भाई जल्दी ठीक हो। और आप इनकी दुआओं का मजाक बनायें उचित नहीं है। इतने कडुवे शब्द का उपयोग मैरे जैसे एक अदने से पत्रकार के द्वारा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए किया जाना अटपटा जरूर है, लेकिन चार दशकों से अधिक की पत्रकारिता में हमने जो कुछ सीखा हैं और पाया है, उसकी केवल एक ही वजह है स्वस्थ आलोचना, जो कुछ समय के लिये आप जैसे महान हस्तियों को बुरी लग सकती है। मैं आज अपनी इस विशेष संपादकीय में जो कहना चाहता हं उसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नहीं बल्कि 'जैत' में जन्में एक किसान पुत्र से कह रहा हं। क्योंकि मैं जानता हं कि मैरे शब्द किसान पुत्र को ही अच्छा लगेगा मुख्यमंत्री को नही आयेगा पंसद। इसलिए आज मैरा सवाल मुख्यमंत्री से है कि क्या कोई किसान यदि 'कोरोना पॉजिटिव' घोषित होकर चिरायु में भर्ती हो गया हो तो उसे 'वीडियो कांन्फेंसिंग' के जरिये अपने घर वालों से टी.वी, कैमरे पर कोलाहल करने की इजाजत होगी। क्या अन्य मरीजों को 'डिस्टर्ब' किया जायेगा। क्या उस किसान के लिए चिरायु के डॉक्टरों द्वारा कोरोना इलाज करने का तरीका पृथक होगा, या फिर क्या वह किसान अपने इलाज की परवाह किये बिना 24 x7 अपने खेत और रेत की चिंता में व्यस्त रहकर तनाव में रहकर इलाज करावायेगा। उत्तर है कदापि नहीं। ऐसा तो उस किसान को 'चिरायु' के डाक्टर ही नही करने देंगे और जाकर उसके पास बार-बार यही समझायेंगे 'प्यारे जान प्यारी है', जान हैं तो जहान हैं, पहले इलाज करवा लो फिर खेत और रेत की चिंता करना। मतलब कहने का यही है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस वक्त जब उनकी रिपोर्ट दूसरी बार भी कोरोना पॉजिटिव निकल आई है तब 'वीडियो कांन्फेंसिंग' से सरकार चलाने तथा वर्चुअल शैली में मंत्रिमण्डल की बैठक से बचना चाहिये। सारा ध्यान सद्गुरू वासुदेव के दर्शन शास्त्र और महामण्डलेश्वर अवधेशानंद गिरी जी महाराज के गुरुमंत्रों को जप करने में लगाना चाहिए। यह सब इसलिए कि बिना तनाव के इलाज का सुख भी अद्भुत हैं, जल्द ठीक होने की संभावना इसमें ज्यादा रहती है, यदि आप बेफिक्र मस्त होकर अस्पताल को एक 'ग्रीन पार्क' की तरह देखने लगे, कुछ दिन वहां मरीजों के दुखों को साझा करें  जो जिन्दगी और मौत से जूझ रहे है तो, जो खुशी स्वस्थ होकर निकलने में उस समय होगी वह खुशी वहां बैठकर इलाज के दौरान बहादुरी करने में नहीं मिलने वाली है। ऐसा इसलिए लिखा जा रहा है कि एक किसान और मुख्यमंत्री का इस दुनिया में प्रकट होने का रास्ता एक ही है, अलग-अलग नहीं है, बस फर्क इतना ही है, आपको अपने माता-पिता के आशीर्वाद से वरदान इतना बड़ा मिला कि आप राजयोगी बने और आज मध्यप्रदेश जैसे विशाल राज्य के मुख्यमंत्री चौथी बार बन गए हैं। लेकिन ध्यान रखिए आप असल में किसान ही हैं, किसान पुत्र ही है, इसलिए आपको इलाज भी कोरोना संक्रमण का एक साधारण कर्मठ किसान की तरह ही कराना चाहिए। शिवराज जी माना आप बहादुर हैं, लेकिन यह वक्त बहादुरी का नहीं है, मध्यप्रदेश की जनता, हमारे जैसे छोटे-छोटे मीडिया के दोस्त भी यही चाहते हैं 'स्वस्थम् शीघ्रम् शुभम्' के साथ फिर से आकर जनता से मिलिए और अपने 'मामा' होने के दर्शन  को न्याय संगत बनाइए। मैं यह लेख आपके उस जीवन को समर्पित करता हूं जब आप चिरायु से दीर्घायु होकर बाहर आएंगे तो नए मध्यप्रदेश की पुरानी परिकल्पना को साकार करेंगे। परंतु ईश्वर के लिए हमारी इस बात का बुरा मत मानिए। सरकार चलाने दीजिए अपने 'भरत' जैसे मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, ठाकुर भूपेन्द्र सिंह, विश्वास सारंग को, इन्हें भी सरकार चलाने की चुनौतियों का अंदाजा लग जाएगा। आप तो राम भक्त हैं, भगवान राम ने तो सत्ता 14 वर्षों के लिए छोड़ी थी, आपको मात्र 14 दिनों का ही त्याग अपने जीवन को स्वस्थ रखने के लिए करना है, क्यों चिंता करते हैं, यह मध्यप्रदेश है, यहां जनता सरकार के बारे में कभी बुरा सोचती ही नहीं, कोई बुरा कर जाए तो उसे तकलीफ होती है, जिसका चुनाव में पता चलता है। फिर उस वक्त जनता को बुरा मानने का हक ही नहीं होगा, जब आप कोरोना का इलाज करा रहे होंगे और अनजाने में किसी स्कूल के बच्चे या फिर आपके किसी भांजे को लेपटॉप प्राप्त करने में जो विलंब हो रहा होगा, छोडि़ए, मंत्रियों पर, जो स्वस्थ हैं, कोरेंटाइन पर नहीं है और अपने नौकरशाहों पर जो भरोसेमंद हो, सब ठीक चलेगा। इसलिए यदि यह शब्द अच्छे लगे तो कुछ शब्दों को दिल में जरूर उतार लें और आग्रह विनम्र है, सरकार चलाने के लिए तनाव ना पालें, चंद दिनों की बात है। इस बात का खयाल जरूर रखिए, आप इस वक्त कोरोना वारियर्स नहीं हैं, कोरोना कैरियर हैं इसलिए बहादुरी का यह वक्त नहीं है। आप तो हट्टे-कट्टे किसान हैं, बहादुर हैं, बहादुरी दिखाने के लिए इंतजार है 27 विधानसभा के उपचुनाव। शुभकामनाएं हैं शीघ्र स्वस्थ होकर आएं, आपकी बहादुरी का जायजा लेने, हम मीडिया वाले वहां जरूर आएंगे। जहां-जहां चुनाव होंगे आप स्टार प्रचारक बनकर पहुंचेंगे।

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विजय कुमार दास

  वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय दास राष्ट्रीय हिंदी मेल  समाचार प त्र के  प्रधान सम्पादक है .साथ ही पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवी श्री दास सेन्ट्रल पत्रकार क्लब के संस्थापक है .