अगला मुख्यमंत्री कौन? शिवराज का नाम आगे, नरेंद्र तोमर भी है दावेदार

अगला मुख्यमंत्री कौन? शिवराज का नाम आगे, नरेंद्र तोमर भी है दावेदार

मीडियावाला.इन।

मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों के साथ ही आम नागरिक के मन में एक ही सवाल चर्चा में चल रहा है, वह यह है कि एमपी का अगला मुख्यमंत्री कौन? वैसे तो इसका फैसला भाजपा हाईकमान को करना है लेकिन वर्तमान में लगभग सभी मोर्चो पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम आगे चल रहा हैं। 

शिवराज सिंह चौहान के के बाद अगर किसी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं तो वह है केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। वैसे तो पूर्व मंत्री  नरोत्तम मिश्रा , केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और वर्तमान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी  मुख्यमंत्री की  दौड़ में सम्मिलित हैं। लेकिन इनमें से किसी नाम पर मुहर लगना लगभग मुश्किल है।

 दिल्ली के सूत्रों के अनुसार अब यह लगभग तय है कि शिवराज सिंह और नरेन्द्र सिंह तोमर में से ही किसी एक को मुख्यमंत्री का ताज मिलेगा।

शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बन सकते हैं। क्यों? 

 भारतीय जनता पार्टी तो ठीक है लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों में अगर आज कोई मास लीडर है तो वह है शिवराज सिंह चौहान। जनता में सभी वर्गों में यदि लोकप्रियता की दृष्टि से देखा जाए तो शिवराज सिंह चौहान के अलावा कोई नेता सामने नजर नहीं आता है। हालांकि  पिछले तीन बार मुख्यमंत्री रहने के कारण कई मामलों में उनकी खिलाफत भी होती रहती है फिर भी वह इस दौड़ में फिलहाल नंबर एक हैं। 

 नरेंद्र सिंह तोमर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। क्यों? 

नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर चंबल क्षेत्र के बड़े कद्दावर नेता हैं तथा कांग्रेस सरकार को अपदस्थ करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। उनकी रणनीति को प्रमुखता से देखा जा सकता है । साथ ही मोदी और अमित शाह की गुड बुक में भी वे सम्मिलित हैं। साइलेंट वर्कर हैं और अपने कामों को बहुत सोच समझकर अंजाम देते हैं । लेकिन ठाकुर होने के कारण कहीं वे इस दौड़ से पृथक ना हो जाएं।

प्रदेश के कुछ लोग नरोत्तम मिश्रा को अपना मुख्यमंत्री देख रहे है। क्यों?

क्योंकि वह अमित शाह के करीबी और उनके भरोसे के माने जाते हैं तथा ग्वालियर रीजन में एक प्रभुत्व वाले नेतृत्व की छवि उनमें दिखाई देती है।  लेकिन  प्रदेशाध्यक्ष और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष दोनों ब्राह्मण नेता है। अतः कहीं ब्राह्मण वर्ग को आगे बढ़ाए जाने का आरोप पार्टी पर न लगे इसलिए  वे मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर माने जा रहे हैं।

अब एक एंगल यह भी है कि उपचुनाव जो होने हैं उनमें अधिकांश ग्वालियर चंबल रीजन के ही त्यागपत्र देने वाले विधायक उम्मीदवार होंगे, ऐसी संभावना है। इस स्थिति में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की सहमति भी आवश्यक होगी। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस बारे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहले ही कोई ऐसी चर्चा भाजपा के हाईकमान से कर रखी हो कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री किसको बनाया जाएगा। 

इस सबके बीच एक संभावना  यह भी हो सकती है कि पार्टी  अनुसूचित जाति कार्ड खेले और  थावरचंद गहलोत का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए  उभर कर सामने  आ जाए ? या कोई और नाम जो  आलाकमान सामने ला कर सबको चोंका दे, जैसा कि उत्तर प्रदेश में हो चुका है?

फिर भी  जो  स्थिति आज है उसमें अचानक कभी भी कोई भी फेरबदल हो सकता है और यह देखने का समय  बिल्कुल नजदीक है।  2 या 3 दिन में हम स्पष्ट रूप से जान लेंगे कि प्रदेश की कमान  किस नेता के हाथ में रहेगी?

RB

 

 

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राजेंद्र कानूनगो

श्री राजेंद्र कानूनगो भोपाल में रहते हुए प्रशासन और शासन को बहुत करीब से देखते रहे है ,पोलिटिक्स और ब्युरोकेसी के सूक्ष्म विश्लेषक के रूप में  राजेन्द्रजी की एक ख़ास पहचान है यूँ वे स्वतंत्र पत्रकार, लेखक, कवि, समीक्षक और  मुख्यमंत्री निवास पर लम्बे समय तक सम्बद्ध अधिकारी रहे है . अपनी निर्विवाद कार्यशैली और ख़ास अंदाज उन्हें दूसरों से अलग खडा करता है .सोनकच्छ के मूल निवासी राजेंद्र मालवा के मालवी  अंदाज से लोगों में खासे लोकप्रिय है .