बड़े बड़ों को 'ग़रीब' बना दिया कोरोना ने

बड़े बड़ों को 'ग़रीब' बना दिया कोरोना ने

मीडियावाला.इन।

कोरोना ने कई लोगों को 'ग़रीब' बना दिया है। अब मुकेश अम्बानी की गिनती दुनिया के सबसे अमीर लोगों में नहीं होती क्योंकि शेयर बाज़ार में उनकी कंपनियों के शेयरों की कीमत अब वह नहीं बची है, इसलिए फ़ोर्ब्स की सूची से उनका नाम नदारद है। लोगों की सूची जब भारत के शेयर बाजार बुधवार को तेजी के साथ खुले तभी अंदाज़ था कि यह तेज़ी ज़्यादा देर टिक नहीं सकेगी। हुआ भी वही। शुरू में  रिलायंस इंडस्ट्रीज, नेस्ले इंडिया, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी, पावरग्रिड और एचयूएल में भी तेजी रही लेकिन  इंडसइंड बैंक, आईटीसी, एलएंडटी और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर नीचे चले गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार की रात  कोरोना  से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पंद्रह हज़ार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा भी की। शेयर बाज़ार को आशा थी कि प्रधानमंत्री द्वारा पंद्रह हज़ार करोड़ के आवंटन का सकारात्मक असर पड़ेगा,  धीरे-धीरे इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला जब सेंसेक्स और निफ़्टी दोनों के ही सूचकांक ऊपर की ओर बढ़ाते नज़र आए। कुछ शेयर में  तो दस प्रतिशत तक की तेज़ी नज़र आई। इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को किए गए उपायों का भी योगदान रहा। कोरोना वायरस के फ़ैलाने से दुनियाभर के बाज़ारों में मंदी छाई हुई है। केवल मार्च में यूरोजोन (यूरो मुद्रा अपनाने वाले देशों) की कारोबारी गतिविधियों में ‘अभूतपूर्व गिरावट’ रही। 19 सदस्य देशों वाले यूरोजोन में शेयर की कारोबारी गतिविधियां  वैश्विक वित्तीय संकट के समय से भी नीचे चली गयी। फरवरी में यूरोजोन के लिए पीएमआई सूचकांक 51.6 अंक रहा था। कोरोना वायरस से यूरोजोन की इटली, फ्रांस ,जर्मनी और स्पेन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा है। वहां के बाज़ारों का स्तर  2009 के वैश्विक आर्थिक संकट से भी गहरा है।

शेयर बाज़ार में भारी गिरावट के कारण निवेशक चिंता में हैं। सरकार चाहकर भी उन्हें बचाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है। बीएसई  में पर सूचीबद्ध कंपनियों की कुल बाजार पूंजी करीब 52 लाख करोड़ रुपये घट गई है। 31 दिसंबर, 2019 को कंपनियों की कुल बाजार पूंजी 155 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा थी, जो 23 मार्च, 2020 को घटकर महज 103 लाख करोड़ रुपये ही रह गई है। कंपनियों को हुआ यह नुकसान भारत के वित्त वर्ष 2020 के लिए संशोधित राजकोषीय घाटा 7.67 लाख करोड़ रुपये के सात गुने के बराबर है। महज 44 सत्रों में ही बेंचमार्क इंडेक्स में 37 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। इसका मतलब यह है कि महज 44 दिनों में देश के सालाना जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा  स्वाहा हो गया। बाजार में जिस रफ्तार से गिरावट हो रही है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। भीषण  ऐतिहासिक मंदी के साल यानी  2008 में बेंचमार्क इंडेक्स 200 सत्रों में 66 प्रतिशत  गिरा था, जबकि साल 2011 में 275 सत्रों में 28 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों को जो घाटा हुआ है, उसमें लार्जकैप (बड़ी कंपनियों के) स्टॉक्स के करीब 26 लाख करोड़ रुपये, जबकि मिडकैप तथा स्मॉलकैप्स शेयरों के करीब  सात-सात लाख करोड़ रुपये डूबे हैं।बाजार को जो भी नुकसान हुआ है  उसे इक्विटी वेल्थ कहा जाता है। यह वित्त वर्ष 2019-20 की असली  जीडीपी का करीब 147  लाख करोड़ रुपये का 40 प्रतिशत  तथा नॉमिनल जीडीपी  का करीब 28.4 प्रतिशत है। इतने भारी नुकसान के बाद  देश की जीडीपी की विकास दर कहाँ पहुंचेगी, इसका अंदाज़ लगाना कठिन नहीं है। यह हमारी विकास दर में वृद्धि की सम्भावनों पर पानी फेरने के सामान है। इसी बीच कई बड़ी कंपनियों ने सरकार के निर्देशों की अवहेलना करते हुए वेतन में कटौती की घोषणा कर दी है।  कई कंपनियों ने अपना कारोबार सीमित कर दिया है तो कई ने कारोबार समेटने की तैयारी कर ली है।  ऐसे में देशवासियों के सामने धैर्य रखने के सिवाय कोई और रास्ता ही  नहीं है। यह  आर्थिक मोर्चे पर डटे रहने का वक़्त है। जो भी हालात हों, उससे निपटने के लिए हौसला और संकल्प का मार्ग है।

RB

 

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।