दर्शन और कोरोना

दर्शन और कोरोना

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वेद , पुराण , उपनिषद , ग्रन्थ , इत्यादि का सार लगभग एक ही है -मानव कल्याण और मनुष्य जीवन की क्षण भंगुरता | भारतीय दर्शन जीवन की सम्पूर्ण और सूक्ष्म व्याख्या है |ये मनुष्य मात्र को जीवन का वास्तविक अर्थ और इस अस्थाई जीवन यात्रा के मार्ग को सुगम बनाने की शिक्षा देता है | पुराण जिनकी रचना आज से दस हजार वर्ष पूर्व हुई आज कोरोना काल में क्यूँ और कैसे प्रासंगिक हैं कुछ बहुत संक्षिप्त लेकिन प्रामाणिक जानकारियाँ जुटाई हैं | उल्लेखनीय है कि विभिन्न अनुभवी और ज्ञानी विद्वजनों के द्वारा ये बातें द्वापर में आज से दस हजार वर्ष पूर्व कही गयी थी | कुछ ग्रंथों आदि के अंश -

मनुस्मृति में लिखित –

ना वार्यांजलि पिबेत
नान्जलिपुरे नापः पिबेत
(अ) अर्थ - _कभी अंजुली में जल भरकर नहीं पीना चाहिए | पानी चलते हुए या ओक से नहीं पीना चाहिए |

(ब) –
अनातुराह स्वानि खानि .....

अकारण नाक कान मुंह को नहीं छूना चाहिए |

(स)- अगर किसी लाचार वृद्ध को देखा है तो तुरंत उसे सहायता करना चाहिए

(1) महाभारत का अनुशासन पर्व लिखित -

(अ)-कभी भी किसी दूसरे का कपड़ा नहीं पहनना चाहिए , इससे नकारात्मकता बढ़ती है

(ब)- सुबह शाम ५ ५ बार ॐ बोलना चाहिए | विपरीत स्थितियों में मन की बैचेनी और घबराहट को राहत मिलती है

(स)- हर मनुष्य का अपना औरा ( आभामंडल )होता है लेकिन किसी नकारात्मक उर्जायुक्त व्यक्ति से हाथ मिलाने या गले मिलने से दूसरे व्यक्ति में नकारात्मकता संक्रमित हो सकती है | विशेषरूप से हथेली में ऊर्जा का वास होता है जो हाथ मिलाने से प्रभावित हो सकती है

(द)_ शुद्ध आचरण से ही संतुष्ट जीवन संभव है

(1)विष्णु पुराण में लिखित –

(अ) हाथ से कोई चीज परोसनी नहीं चाहिए |हमेशा किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल करें | खाना खाने से पूर्व या कहीं से आकर हाथ पैर अवश्य धोने चाहिए

(ब )– गीला कपड़ा कभी नहीं पहनना चाहिए और ना ही गीले कपडे से बदन पोंछना चाहिए नेगेटिव ऊर्जा बढ़ती है |इसमें जीवाणु होते हैं संक्रमण से प्रभावित भी सकते हैं

(2)-_विष्णु स्मृति में लिखित –
(अ)-एक बार पहने हुए कपडे को बिना धोये कभी दुबारा न पहने ना ही किसी और के कपड़ों को पहने |

(ब)—
चिता धूम सेवने सर्वे
वर्णाः स्नानं आयेरयु ..
अर्थात , शमशान से लौटकर स्नान अवश्य करना चाहिए और धुले वस्त्र धारण करना चाहिए

(स)-
दाडी मूंछ कटवाकर ( शेविंग ) के बाद अच्छे से नहाना और स्वच्छ वस्त्र अवश्य पहनाना चाहिए | ऐसा न करने पर नाई का संक्रमण लग सकता है ( कोरोना में अभी खबर थीकी ब्यूटी पार्लर के व्यक्ति से ग्राहकों में १२ में संक्रमण फैला )

(3)- )_पद्म पुराण एवं स्कन्द पुराण में लिखित –

(अ )- दौनों मूल संस्कृत में और बेहद जटिल हैं में कहा गया है हाथ पैर और मुंह बिना धोये भोजन नहीं करना चाहिए | न धारयेत परस्येव..... अपना तौलिया व् अंगवस्त्र अलग रखना चाहिए

(ब )-भोजन बैठकर , मौन होकर शांतचित्त भाव से करना स्वास्थ्य वर्धक होता है | पानी बैठकर और ग्लास से पीना चाहिए | ओक अथवा बोतल से ऊपर से पानी पीने से आंत्रशोध हो सकता है | गौरतलब है कि पहले के लोग इन इन बातों पर अमल करते थे इसलिए बुढापे तक स्वस्थ्य और उर्जावान रहते थे जिसे आज लोग ‘’ असल घी पीये हुए या शुद्ध रासायनिक मुक्त खाध्य पदार्थ खाए हुए शरीर की वजह बताते हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं वे लोग बिना अविश्वास किये इस बातों पर अमल करते थे

(स)- -किसी भी जल में कुल्ला, मल, थूकना नहीं करना चाहिए | इसे पाप तुल्य माना गया है और इससे वरुण देवता अप्रसन्न होते हैं |

(4)-- मार्कंडेय पुराण में लिखित –

(अ)-स्नान करने के उपरान्त अपने पहने हुए गीले कपड़ों से बदन नहीं पोंछना चाहिए ना ही गीले तौलिये का इस्तेमाल करना चाहिए | अन्य व्यक्ति द्वारा उपियोग किये गए तौलिये का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए

(ब)जनेऊ धारण का भी वैज्ञानिक महत्व है

(6)- गीता -

(अ) -जीवन और मानव शरीर नश्वर है अतः मन को इन्द्रियों के वश में नहीं करना चाहिए

(7)- ईशावास्योपनिषद'

आज मनुष्य का जीवन कितना मूल्यहीन और डरावना हो गया है | अमानवीयता और हिंसा चहुँ और व्याप्त है |इसके पीछे स्वार्थ और असंवेदनशीलता है |ईशावास्योपनिषद' में मनुष्य को सत्कर्म करने तथा पूर्ण अहिंसा वादी होने का सूत्र है ये सभी उपनिषदों का निचोड़ है |

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वंदना देव शुक्ल

संगीत/ हिंदी में एम् ए , बी एड , शोध

आकाशवाणी की अस्थाई उद्घोषिका, रंगकर्मी , आकाशवाणी पर संगीत / नाटक एप्रूव्ड कलाकार ,एक नाटक का दूरदर्शन से प्रसारण

2010 में पहली कहानी ''उड़ानों के सारांश'' वागर्थ में प्रकाशित |सभी प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में कहानियाँ / लेख/ कविता प्रकाशित

चार कहानी संग्रह और एक उपन्यास ..एक उपन्यास शीघ्र प्रकाश्य |कहानियों का अंग्रेजी, उर्दू, कन्नड़ , पंजाबी, सहित चीनी भाषा में अनुवाद