'मेरा जलवा जिसने देखा वो मेरा हो गया'

'मेरा जलवा जिसने देखा वो मेरा हो गया'

मीडियावाला.इन।

जो दर्शक पुरानी फिल्मों के शौकीन हैं, उनके लिए अभिनेत्री कुमकुम जाना पहचाना नाम है! लेकिन, नई पीढ़ी के दर्शक उनसे अनजान थे। गुजरे ज़माने की इस जानी मानी अभिनेत्री कुमकुम ने 86 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। वे लम्बे समय से बीमार थीं। अपने दो दशक लम्बे फिल्म करियर में उन्होंने 115 फिल्मों में काम किया। उन्हें ब्लैक एंड व्हाइट दौर की डांसिंग स्टार कहा जाता था। उन पर पिक्चराइज़ गीत ओ मोरा नादान बालमा न जाने दिल की बात, कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर और 'मेरा जलवा जिसने देखा वो मेरा हो गया' जब भी सुनाई देते हैं, आँखों के आगे कुमकुम का चेहरा आ जाता है। आज लिंकिंग रोड को मुंबई का सबसे पॉश इलाक़ा कहा जाता है, कभी यहाँ कुमकुम का उनके ही नाम पर बंगला था। पर, वक़्त बदला और इस बंगले की जगह ऊँची बिल्डिंग ने ले ली। 
   कुमकुम अपने ज़माने की जानी-मानी अभिनेत्री थीं। उन्होंने उस दौर के करीब सभी बड़े कलाकारों के साथ काम किया। गुरुदत्त, राजकपूर, देवानंद, दिलीप कुमार और किशोर कुमार के साथ वे कई फिल्मों में दिखाई दीं। 'कुमकुम' मूलतः बिहार की रहने वाली थीं और उनका वास्तविक नाम जेब्बुनिसा था। कहा जाता है कि उनके पिता हुसैनाबाद के नवाब थे।फिल्मों में आने के बाद उन्होंने नाम बदलकर 'कुमकुम' रखा था। एक समय ऐसा था, जब इस एक्ट्रेस की अदाकारी का जादू चलता था। यही कारण था कि इस फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनी। उन्हें पहला ब्रेक तो गुरुदत्त ने दिया था, पर वे बरसों तक रामानंद सागर की फिल्मों की स्थाई कलाकार बनी रहीं। इंडस्ट्री में कहा जाता था कि दोनों के बीच काफी नजदीकी रिश्ता था। 
    कुमकुम को गुरुदत्त ने 'आर-पार' में पहली बार ब्रेक दिया था। वे फिल्म के गीत 'कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर' को पहले जगदीप पर फिल्माया चाहते थे। पर, जब जगदीप ने इंकार किया तो गुरुदत्त ने एक महिला अभिनेत्री को खोजा और यहीं से 'कुमकुम' का परदे पर आगमन हुआ। कुमकुम ने बाद में गुरुदत्त की फिल्म 'प्यासा' में भी काम किया। कुमकुम को 50 और 60 के दशक की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में थी। उन्होंने मिस्टर एक्स इन बॉम्बे, मदर इंडिया, सन ऑफ इंडिया, कोहिनूर, उजाला, नया दौर, श्रीमान फंटूश, प्यासा, आर-पार और एक सपेरा एक लुटेरा जैसी सफल फिल्मों में काम किया। 1963 में पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियारी चढ़ाईबो में भी कुमकुम ने काम किया था। 
   वे नावेद जाफरी और जावेद जाफरी के पिता जगदीप की भी करीबी दोस्त रही थी। कुमकुम के न रहने की पहली सूचना भी जगदीप के बेटे नावेद ने ट्वीट करके दी। उन्होंने लिखा ‘हमने एक और हीरा खो दिया। मैं उन्हें तब से जानता था जब मैं एक बच्चा था। वो एक परिवार थी। बेहद शानदार अदाकारा और बेहतरीन इंसान। कुमकुम आंटी आपकी आत्मा को शांति मिले।’ जॉनी वॉकर के बेटे नासिर ने भी उन्हें याद करते हुए ट्वीट करते हुए याद किया कि 'ये है बॉम्बे मेरी जान' गाने में वे मेरे पिता के साथ दिखाई दी थीं। 

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