मिडिल क्लॉस फैमेली की 'छोटी सी बात' अब कौन सुनाएगा!

मिडिल क्लॉस फैमेली की 'छोटी सी बात' अब कौन सुनाएगा!

मीडियावाला.इन।

हिंदी और बंगाली फिल्मों के जाने-माने डायरेक्टर बासु चटर्जी ने जिंदगी को अलविदा कह दिया। लॉक डाउन में ये बॉलीवुड के लिए एक और बड़ी क्षति है। उनके निधन का कारण उम्र संबंधी बीमारियां बताया जा रहा है। उन्होंने सुबह के समय नींद में ही शांति से अंतिम सांस ली। वे उम्र संबंधी परेशानियों के कारण कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। 70 और 80 के दशक में उनकी फिल्मों को बेहद पसंद किया गया। उन्होंने रजनीगंधा, चित्तचोर, छोटी सी बात, खट्टा-मीठा, एक रुका हुआ फैसला और चमेली की शादी जैसी रोमांटिक कॉमेडी वाली फ़िल्में बनाई, जिन्हें हर वर्ग के दर्शक रिझाया। 
  उनकी अधिकांश फिल्मों के हीरो अमोल पालेकर और हीरोइन विद्या सिन्हा या जरीना वहाब हुआ करती थी। अपनी पहली फिल्म 'सारा आकाश' अलग तरह फिल्म की गंभीर मूड  थी, पर बाद उन्होंने ट्रेंड बदला और जीवन के छोटे-छोटे किस्सों को कहानियों  पिरोकर फ़िल्में बनाईं! अनिल कपूर को लेकर उन्होंने 'चमेली की शादी' डायरेक्ट की थी, जिसे आज भी याद किया जाता है। उनकी फिल्मों का आधार मिडिल क्लास फैमेंली की रोजमर्रा के जीवन में होने वाली कॉमेडी हुआ करती थी। 
  उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रिका में कार्टूनिस्ट और इलस्ट्रेटर के रूप में की थी। वे 18 साल तक इसी काम में लगे रहे। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माता के रूप में अपना करियर बनाया और 1966 में राज कपूर और वहीदा रहमान स्टारर फिल्म 'तेरी कसम' में असिस्टेंट बनकर काम किया। इस फिल्म ने भी अपने दौर में राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता था। उन्होंने 10 से ज्यादा सफल फिल्मों का निर्देशन किया। चटर्जी को 1969 में अपनी पहली फिल्म 'सारा आकाश' के साथ सफलता मिली। इस फिल्म के लिए उन्होंने स्क्रीन प्ले के लिए भी पुरस्कार जीता था। 
  बासु चटर्जी का जन्म अजमेर में हुआ था. फिल्मों में बासु चटर्जी के योगदान के लिए 7 बार फिल्म फेयर अवॉर्ड और दुर्गा के लिए 1992 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था. 2007 में उन्हें आईफा ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा था. 1969 से लेकर 2011 तक बासु दा फिल्मों के निर्देशन में सक्रिय रहे। बासु चटर्जी के परिवार में उनकी दो बेटियां- सोनाली भट्टाचार्य और रूपाली गुहा है। रूपाली ने फिल्में डायरेक्ट की है। वह टीवी सीरियल की भी प्रोड्यूसर हैं। 
    बॉलीवुड में बासु चटर्जी को प्यार से 'बासु दा' कहकर बुलाया जाता था। मिडिल क्लास फैमेंली की गुदगुदाती और हल्के से छू जाने वाली रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों ने बासु चटर्जी को फिल्म  इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई। बासु चटर्जी ने कुछ बंगाली फिल्मों के अलावा टीवी के लिए भी सीरियल बनाएं! इनमें 90 के दशक का 'ब्योमकेश बख्शी' सर्वाधिक लोकप्रिय रहा! ये एक जासूसी सीरियल था, जिसमें रजत कपूर मुख्य भूमिका में थे। बाद में उन्होंने दर्पण और कक्काजी कहिन जैसे सीरियल भी डायरेक्ट किए। उनकी आखिरी फिल्म बंगाली की 'साल त्रिशंकु' थी, जो साल 2011 में रिलीज हुई! 
  बासु चटर्जी के निधन पर फिल्म निर्माता और भारतीय फिल्म और टीवी निर्देशकों के एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित ने ट्विटर पर लिखा, ' मैं अशोक पंडित दिग्गज फिल्म निर्माता बासु चटर्जी जी के निधन की सूचना देते हुए काफी दुखी हूं। यह इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति है। बॉलीवुड के मशहूर निर्माता और निर्देशक मधुर भंडारकर ने ट्वीट करते हुए कहा, 'निर्माता श्रीबासु चटर्जी के निधन का सुनकर बहुत दुःख हुआ। उन्हें हमेश लाइट हार्टेड कॉमेडी और सिंपलिसिस्ट फिल्म्स के लिए याद किया जाएगा। 
उनकी फ़िल्में
   प्रतीक्षा, गुदगुदी, त्रियाचरित्र, कमला की मौत, ज़ेवर, भीम भवानी, किरायेदार, चमेली की शादी, शीशा, लाखों की बात, पसन्द अपनी अपनी, हमारी बहू अलका, शौकीन, अपने-पराये, मन पसंद, जीना यहाँ, मंज़िल, दो लड़के दो कड़के, रत्नदीप, बातों बातों में, प्रेम विवाह, तुम्हारे लिए, खट्टा मीठा, दिल्लगी, सफेद झूठ, प्रियतमा, स्वामी, चितचोर, छोटी सी बात, रजनीगंधा, उस पार, पिया का घर

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