फिल्म समीक्षा: सन्दीप और पिंकी फ़रार

फिल्म समीक्षा: सन्दीप और पिंकी फ़रार

मीडियावाला.इन।

ना जाने कैसा संयोग है की परिणिति चोपड़ा की ऐसी फ़िल्में जिनके नाम कुछ अजीब से हैं, वे इन अजीब नामों के बावजूद बढ़िया निकलती हैं | हंसी तो फँसी भी ऐसी ही फ़िल्म थी और अब प्राइम विडियो पर हाल ही में रिलीज़ फ़िल्म है सन्दीप और पिंकी फ़रार, मज़े की बात ये है की पिंकी का किरदार है अर्जुन कपूर का और सन्दीप है परिणिति|

दिबाकर बनर्जी की ये फ़िल्म दिलचस्प कथानक के साथ आपको नेपाल की तलहटी में बसे सुंदर क़स्बे पिथौरागढ़ की सैर भी कराती है| फ़िल्म की कहानी कुछ यूँ है कि सन्दीप या सेंडी (परिणिति चोपड़ा) परिवर्तन बैंक की डायरेक्टर है और उसके बॉस परिचय से उसका कुछ बिगाड़ सा चल रहा होता है| सैंडी उसे मोबाइल से मेसेज करके मिलने के लिए कहती है पर निर्धारित स्थान पर उसे मिलता है पिंकी दहिया (अर्जुन कपूर) जो हरियाणा पुलिस का निलम्बित सब इंस्पेक्टर है और अपने बॉस त्यागी (जयदीप अहलावत) के कहने पर उसे उसके बॉस परिचय के पास ले जाने के लिए आता है| सैंडी पिंकी के साथ उसकी कार में परिचय से मिलने चल देती है| रास्ते में त्यागी मोबाइल से उसकी लोकेशन लेता रहता है और एक संयोग से उनकी कार को एक एस यू व्ही ओवरटेक कर लेती है और तभी पुलिसकर्मी उस एस यू व्ही पर गोलियों की बौछार कर देते हैं| पिंकी समझ जाता है कि ये षड्यंत्र उनकी हत्या के लिए रचा गया था| पिंकी सैंडी के प्रस्ताव पर दस लाख रुपयों के बदले उसे नेपाल छोड़ने को तैयार हो जाता है और दोनों ट्रेन से पिथौरागढ़ आ जाते हैं जो नेपाल से सटा हुआ क़स्बा है| यहीं पर उन्हें मिलते हैं आंटी (नीना गुप्ता) और अंकल (रघुवीर यादव) जिनके घर में ये दोनों नेपाल जाने का जुगाड़ लगने तक टिक जाते हैं| एक साथ रहने पर पिंकी जान पाता है कि सैंडी ने परिवर्तन बैंक में घपला करके करोड़ों रुपया बनाया है और उस रक़म के हिस्से देने के बजाय परिचय उसकी हत्या करना चाहता है और इसमें सस्पेंड पिंकी का इस्तेमाल उसका अफ़सर त्यागी ये सोच कर कर लेता है कि इसको कौन पूछेगा| वहीं पर रहते रहते इन्हें पता चलता है कि सीधे सादे अंकल आंटी के लाखों रुपए बैंक की घोटाले छाप जमा योजना में उलझ गए हैं| सैंडी का हृदय परिवर्तन होता है और वह अंकल की मदद करने की कोशिश करती है और इसमें पिंकी की मदद माँगती है, लेकिन इस कोशिश में त्यागी और परिचय को उनकी लोकेशन का पता लग जाता है और त्यागी अपनी टीम के साथ अधूरे काम को पूरा करने पिथौरागढ़ आ जाता है|

क्या पिंकी और सैंडी बच पाते हैं और बैंक के घोटाले के तार खुलते हैं या यूँ ही रह जाते हैं इसके लिए आप फ़िल्म देखें तो बेहतर होगा|

दिबाकर की अब तक की ये सबसे कसी हुई फ़िल्म है| अर्जुन कपूर अपने स्वाभाविक अन्दाज़ में हैं, कहीं कहीं वे सलमान की अलहड़ता की झलक भी देते हैं| ख़ास कर “पर्दे पे आने का मेरा है डिज़ायर” गाने पर उसका डांस बिंदास है| परिणिति हमेशा की तरह प्रभावी हैं, उसकी अदायगी किरदार में एकदम फ़िट बैठी है और फ़िल्म में बोनस हैं नीना गुप्ता और रघुवीर यादव| फ़िल्म तो आप इन्हीं दोनों के लिए देख सकते हो| अभिनय और स्वाभाविकता दोनों का ग़ज़ब का एकीकरण आपको एक साथ दोनों में देखने मिलेगा| बाक़ी के किरदारों में मुझे राहुल कुमार प्रभावी लगा; जी हाँ थ्री इडियट का मिलिमीटर| फ़िल्म बढ़िया है और आप बखूबी सपरिवार देख सकते हो| RB

आनंद कुमार शर्मा

आनन्द शर्मा भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत अधिकारी हैं, वर्तमान में वे मुख्यमंत्री के ओएसडी है   कविता, फ़िल्म समीक्षा, यात्रा वृतांत आदि अनेक विधाओं में फ़ेसबुकीय लेखन| विशेष तौर पर मीडिया वाला के लिए ताज़ा फ़िल्म समीक्षा के लिए चर्चित ।

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