Thursday, December 05, 2019
हड़बड़ी में गड़बड़ी तो होना ही थी

हड़बड़ी में गड़बड़ी तो होना ही थी

मीडियावाला.इन।

आज नहीं तो कल, महाराष्ट्र में फडणवीस-पवार को मुंह लटकाकर बेआबरू बिदाई का प्रहसन खेलना ही था। यह तभी तय हो गया था, जब अजित पवार राज्यपाल के पास एक दर्जन विधायक भी न ले जा सके थे। देवेंद्र फडणवीस और मोठा भाई अमित शाह ने हड़बड़ी में जो फैसला किया, वह भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी की गंभीर चूक तो है ही, शाह की कथित चाणक्य प्रतिष्ठा पर भी धूल फेरने वाली साबित हुई। इसे ही कहते हैं विनाश काले, विपरीत बुद्धि।

राजनीति में अब शह और मात का जो मूल्यविहीन खेल शुरू हुआ है, वह इसके समूल सर्वनाश के अंजाम तक पहुंचने को बेताब है। माफ करें, लेकिन अब कोई भी दल बेहयाई के शिखर से उतरने को तैयार नहीं है। सच तो यह है कि इनमें एक-दूसरे को  नीचा दिखाने की होड़ नहीं है, बल्कि कौन कितने रसातल में गिर सकता है, ऐसी होड़ लगी है।

इस समय चूंकि भाजपा लगातार दूसरी बार केंद्र में पदारूढ़ है और देश के सबसे अधिक राज्यों में सत्तारूढ़ होकर सबसे बड़े दल का खिताब पाए हुए है तो बेहद स्वाभाविक है कि देश को सबसे ज्यादा नीति, मूल्य, उसूल बरतने की अपेक्षा भी उसी से है। महाराष्ट्र के संदर्भ में देखें तो भाजपा ने देश को निराश ही किया और इसका खामियाजा भी उसे उठाना होगा।

तात्कालिक रूप से महाराष्ट्र में वह आने वाले कुछ अरसे तक नुकसान में रहेगी और नैतिक तौर पर दमदार विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पाएगी । दूसरी तरफ खास तौर से शिव सेना उसे बात-बेबात पर जलील करती रहेगी। एक और जो नुकसान महाराष्ट्र भाजपा को होगा, वह यह कि करीब तीन दशक से समान विचारधारा के साथी होने का जो स्वाभाविक सौजन्य शिव सेना बरत सकती, वह तो गया ही, उलट भाजपा को बार-बार औकात दिखाएगी।

भाजपा का नुकसान केवल इतना नहीं है कि उसके हाथ महाराष्ट्र की सत्ता नहीं आई। उसे सख्त चोट तो भविष्य में सामने आने वाली इस सच्चाई से होगी कि सेना-एनसीपी-कांग्रेस अब संभलकर अपनी पारी खेलेंगे। साफ है कि कल तक तीनों ही दल अलग-अलग दिशाओं में अपने घोड़े दौड़ाने वाले अब कोशिश करेंगे कि एक ही दिशा में आगे बढ़ें। 

यदि भाजपा हड़बड़ी न करती तो संभव था कि शिव सेना सोनिया कांग्रेस को ज्यादा समय बरदाश्त नहीं कर पाती या कांग्रेस को  शिव सेना की ओर से  अतीत में दिए जख्म से मवाद रिसने का अहसास होता और मझदार में वह कश्ती से शिव सेना को धकेल देती। यह भी संभव था कि शरद पवार टेढ़ी चाल चलन लगते जो कांग्रेस को रास नहीं आता। अब इतना तो पक्का है कि भाजपा के हद दर्जे के उतावलेपन के अंजाम के मद्देनजर ये तीनों दल अतिरिक्त सतर्कता बरतेंगे। बहरहाल।

भाजपा यदि धीरज धरती तो संभव था कि सत्ता की मलाई में हिस्सेदारी न मिलने पर शिव सेना, कांग्रेस, एनसीपी के बागी उसकी शरण में आ जाते , तब आसानी से वह खम ठोंककर मैदान में आ सकती थी। अब भाजपा के पास एकमात्र शालीन विकल्प यह है कि वह जिम्मेदार विपक्ष के तौर पर पेश आये और युति सरकार को गिराने की कोई बेजा हरकत न करे। देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल होने के नाते बड़प्पन दिखाए और लोकतांत्रिक तरीके से ऐसा जनादेश जुटाए, जिसमें किसी सहारे की या अमर्यादित आचरण की बैसाखी न थामना पड़े।

RB

 

 

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

स्थानीय संपादक - पीपुल्स समाचार,इंदौर                               

संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                            

प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

शहर संपादक - नईदुनिया, इंदौर

समाचार संपादक - दैनिक भास्कर, इंदौर 

कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

उप संपादक - नवभारत, इंदौर

साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० १९९० में एक दैनिक अखबार के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985

० म.प्र., छत्तीसगढ़ व राजस्थान के विधानसभा चुनाव 2013 के तमाम विश्लेषण सटीक रहे, जिनमें सीटों का भी उल्लेख था।

० 2014 के लोकसभा चुनाव में म.प्र. की सीटों का विश्लेषण शत-प्रतिशत व देश में भाजपा की 260 व गठबंधन की 300 सीटों का सटीक आकलन। साथ ही 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का प्रकाशन भी किया, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 


सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकाारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।


विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।


मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।


किताबें- इंदौर के सितारे (2014), इंदौर के सितारे भाग-2(2015) , इंदौर के सितारे भाग-3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) सहित 7 किताबें प्रकाशित ।


भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी


रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार 


संप्रति- भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण, दबंग दुनिया, आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में नियमित लेखन।