भाजपा के दरकते अनुशासन पर लगाम की कोशिश!

भाजपा के दरकते अनुशासन पर लगाम की कोशिश!

मीडियावाला.इन। भारतीय जनता पार्टी की अपनी अलग राजनीतिक शैली थी! जिसमें मर्यादा भी थे, संस्कार भी पार्टी से जुड़े लोगों का आचरण भी दागदार नहीं था!  लेकिन,दाढ़ में सत्ता का स्वाद लगने के बाद पार्टी की शैली बदल गई! इसलिए कि सत्ता की चाशनी राजनीति सारी मर्यादा और आचरण को खंडित कर देती है। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता जिस तरह अधिकारियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, उससे लगता है वे पार्टी की रीति-नीति से भटक गए! वे सत्ता खोने से हताशा में हैं! वे समझ नहीं पा रहे हैं कि प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। जब अधिकारी उनकी बातों को तवज्जो नहीं दे रहे, तो वे अराजक हो गए! कहीं अधिकारियों को काम करने से रोका जा रहा है! उनको हद में रहने की हिदायत दी जा रही है! कहीं उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। नेताओं के बेटे भी गोलियां चलाने में गुरेज नहीं कर रहे! भाजपा के विधायक से लगाकर सामान्य कार्यकर्ता तक कानून हाथ में लेने से नहीं हिचक रहे! ऐसे में शुचिता वाली राजनीति का दंभ कहाँ गया? लगातार ऐसी घटनाओं के बाद भाजपा के सबसे बड़े नीति-नियंता नरेंद्र मोदी की हिदायत नई दिशा का संकेत है! लेकिन, ये महज हिदायत है या कार्रवाई का संकेत, ये अभी सामने आना है! 

  मध्यप्रदेश की भाजपा राजनीति में इन दिनों सन्नाटा पसरा है! संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के अनुशासन को लेकर जिस तरह की सख्ती दिखाई, वो बात उम्मीद से परे थी! संसदीय दल की बैठक में प्रधानमत्री की इस टिप्पणी को सिर्फ नसीहत नहीं कहा जा सकता! इसे दूसरी बार केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार की रीति-नीति में आए बदलाव का संकेत भी माना जा सकता है! मोदी ने मध्यप्रदेश से सांसद प्रहलाद पटेल और पूर्व मंत्री कमल पटेल को भी अपनी हिदायत में घेरा है! इन दोनों के बेटों के खिलाफ भी मारपीट के मामले दर्ज हैं। लेकिन, आकाश विजयवर्गीय का मामला सुर्खियां में ज्यादा आया! क्योंकि, इंदौर के कई नेता उसके बचाव में आ गए थे! देखा जाए तो भाजपा की राजनीतिक शैली न तो गांधीवादी है और उतनी संस्कारित, जैसा कि प्रचारित किया जाता है! लेकिन, इतनी हिंसक भी नहीं है कि उसके नेता और कार्यकर्ता कानून को ठेंगा दिखाएं! कोई क्रिकेट के बल्ले से अधिकारियों के साथ मारपीट कर रहा है, कोई बेसवाॅल के बेट से जानलेवा हमला कर रहा है, तो कोई भरी बैठक में अधिकारियों को धमका रहा है। प्रदेश में चौथी बार सत्ता न पाने की हताशा में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता हमला करने और धमकी देने से भी बाज नहीं आ रहे! 

    प्रदेश में लगातार डेढ़ दशक तक सत्ता में रही भाजपा की एक पूरी पीढ़ी ने जब से होश संभाला, सत्ता की चाशनी का स्वाद लिया! अब, पार्टी सत्ता से बाहर है! इस वजह से अधिकारियों के कामकाज की शैली में भी बदलाव आया! वे अब भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे! ये स्वाभाविक भी है! यही फर्क भाजपा के लोगों को रास नहीं आ रहा! जो अधिकारी उनके इशारों को समझकर फर्शी सलाम करते थे, वही अब उनके निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं! अधिकारियों का ये बदला रुख उन्हें तिरस्कार जैसा लग रहा है! इंदौर में जो हुआ, वो भी इसी मानसिकता की हिंसक परिणति थी। भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय राजनीतिक हित साधने के लिए नगर निगम के अधिकारी पर क्रिकेट के बल्ले से हमला किया। ये घटना तब हुई, जब नगर निगम शहर में चिन्हित 26 अति-खतरनाक मकानों को तोड़ने की कार्रवाई कर रही थी। 

   इसी तरह दमोह के अदने से भाजपा नेता विवेक अग्रवाल भी क्रिकेट का बल्ला लेकर एक अधिकारी को धमकाने ऑफिस पहुंच गए! सतना के रामनगर नगर पंचायत के अध्यक्ष रामसुशील पटेल पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी देवरत्नम सोनी पर बेसवाॅल के बल्ले से जानलेवा हमला करते हैं! केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के बेटे और भतीजे सरेआम गोलियां चलाकर भाग जाते हैं। प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक कमल पटेल के बेटे सुदीप पटेल की गुंडगर्दी के तो कई किस्से सुर्ख़ियों में हैं। सुदीप ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता सुखराम बामने को अपशब्द कहते हुए भी धमकाया था! इसका ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया था। वो लम्बे समय से फरार था। पुलिस ने उस पर 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। आखिर उसे भी गिरफ्तार किया गया। ये किसी राजनीतिक पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनके परिवार वालों के कृत्य तो नहीं है! ये साफ़-साफ़ अनुशासनहीनता है। लेकिन, भाजपा की प्रदेश इकाई ने सारे मामलों को नजरअंदाज किया। ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए जरुरी हो गया था कि वो कोई सख्त कदम उठाए!

   एक और भाजपा की विधायक महिला लीना जैन ने एक अधिकारी को बैठक में सबके सामने नौकरी नहीं करने देने के लिए धमकाया! विदिशा जिले की गंजबासौदा विधानसभा क्षेत्र की इस विधायक ने अपना आपा खोते हुए अधिकारी को नौकरी नहीं करने देने की खुली धमकी इसलिए दी कि उन्होंने एक कार्यक्रम में कांग्रेस के नेताओं को बुला लिया था। उनका ये धमकाने वाला वीडियो भी खूब चला! किसी जनप्रतिनिधि से ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं की जाती कि वो किसी अधिकारी को बैठक में इस तरह की भाषा में हिदायत दे! कम से कम एक महिला विधायक से तो बिल्कुल नहीं! लेकिन, जब पुरुष विधायक हाथ चलाएंगे तो स्वाभाविक है कि महिला विधायक जुबान तो चला ही सकती है! 

   ये सारी घटनाएं तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं कही जा सकती! तो फिर क्या ये माना जाए कि ये कार्यकताओं की कुंठा है, जो हिंसक रूप में सामने आ रही है? अपनी डेढ़ दशक की आदत के मुताबिक जब ये नेता अधिकारियों से अपनी मर्जी के काम करवाना चाहते हैं, और वे नहीं करते तो उनका गुस्सा फट पड़ता है! नेता और कार्यकर्ता ये भुला देते हैं कि उनकी पार्टी अब सत्ता में नहीं विपक्ष में है! बेहतर हो कि वे अपना आचरण भी उसी के अनुरूप ढाल लें! अब, जबकि भाजपा के नीति-नियंताओं ने ऐसी अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्ती के संकेत दिए हैं, उम्मीद की जा सकती है कि अमर्यादित आचरण पर लगाम लगेगी! मोदी की टिप्पणी के बाद साफ हो गया कि भाजपा में 'पहले आवेदन, फिर निवेदन और उसके बाद दनादन' का फार्मूला अब नहीं चलेगा।

 

 

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हेमंत पाल

तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में संलग्न। नवभारत, नईदुनिया (इंदौर, भोपाल) और जनसत्ता (मुंबई) में कार्य किया। नईदुनिया में लम्बे समय तक चुनाव डेस्क प्रभारी। राजनीतिक और फिल्म और टीवी पत्रकारिता में परीचित नाम। देशभर के अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन। राजनीतिक और फिल्म स्तंभकार। फिलहाल 'सुबह सवेरे' के इंदौर संस्करण में स्थानीय संपादक।


संपर्क : 9755499919