Thursday, December 05, 2019
हिंदी पत्रकारिता के एक तीर्थ में निष्पक्षता की चर्चा

हिंदी पत्रकारिता के एक तीर्थ में निष्पक्षता की चर्चा

मीडियावाला.इन।

दो दिन पहले धार में था । धार ज़िला याने हिंदी पत्रकारिता के श्रेष्ठतम संपादकों में से एक राजेंद्र माथुर का ज़िला । इसी आदिवासी ज़िले के बदनावर कस्बे में माथुर जी का जन्म और शुरुआती पढ़ाई हुई । इसके बाद उन्होंने धार में भी अध्ययन किया । आप कह सकते हैं कि इसी ज़िले से उन्हें शब्द संस्कार मिले । धार ज़िला पत्रकार संघ ने यह आयोजन किया था । उन्होंने इस ज़िले के तीन पत्रकारों की स्मृति में यह आयोजन किया था । एक तो राजेंद्र माथुर ,दूसरेे कृष्णलाल शर्मा और तीसरे अरविंद काशिव । तीनों ही अब इस लोक में नहीं हैं मगर उनके साथ मेरा संपर्क  रहा ।इसलिए और भी भावुक अवसर था । इसमें मेरे साथ दिल्ली प्रेस  क्लब के साथी संजय सिंह, मध्यप्रदेश के पर्यटन मंत्री राजेंद्र सिंह बघेल, सांसद श्री दरबार,विधायक प्रताप जी तथा अन्य मित्र थे । इंदौर के पुराने दोस्त हेमंत पॉल से इस समूची यात्रा में अच्छा विमर्श हुआ । पंडित छोटू शास्त्री इस आयोजन के सूत्रधार थे !

भारत में साइबर क्राइम के जानकार आई पी एस वरुण कपूर से बहुत कुछ सीखने को मिला ।

बहरहाल , इस सम्मेलन में पत्रकारों की चिंताएं निष्पक्ष पत्रकारिता में आड़े आ रही बाधाओं के बारे में थीं । असहमति के सुर सिकुड़ते जा रहे हैं । दबाव बढ़ते जा रहे हैं । जितना हम लोगों से बन पड़ा , समाधान का प्रयास किया । मगर हम भी जानते हैं कि यह आसान नहीं है । कोई भी सरकार अपनी आलोचना पसंद नहीं करती । पर वह नहीं जानती कि आलोचना की उपेक्षा करके वह अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारती है। सावधान सियासत। 

RB

 

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राजेश बादल

इकतालीस साल से सक्रिय। मीडिया के सभी रूपों में पूर्ण अधिकार के साथ काम शुरुआत - रेडियो से। समाचार आधारित कार्यक्रम, युववाणी में कंपेयरिंग, एनाउंसर, न्यूज़ एंकर, नाटकों में अभिनय तथा संगीत रूपक निर्माण। फिर दैनिक जागरण, विज्ञान प्रगति, यूएनआई, पीटीआई, नईदुनिया जैसे अखबारों से रिश्ता। महाविद्यालय में एक वर्ष इतिहास अध्यापन। नईदुनिया इंदौर में सह संपादक 1980- 1985। इसके बाद जयपुर नवभारत टाइम्स में मुख्य उप संपादक 1985-1991। जयपुर में ही तीस बरस पहले टेलिविजन से रिश्ता। टीवी की पहली समसामयिक पत्रिका परख के प्रथम से अंतिम एपिसोड तक विशेष संवाददाता। दूरदर्शन की क्षेत्रीय केंद्रों में पहली सम सामयिक पत्रिका दस्तक के एंकर और निर्देशक। बाहरी प्रोड्यूसर द्वारा प्रस्तुत पहले दैनिक बुलेटिन - न्यूज़वेब में विशेष संवाददाता। पहले चैनल-आजतक के पहले एपिसोड से लगातार दस साल तक विशेष संवाददाता से संपादक तक का सफ़र। भारत की पहली इलेक्शन ट्रेवलॉग - चुनाव के हमराही में अरुणाचल प्रदेश से रामेश्वरम तक टीवी कवरेज यात्रा। दूरदर्शन पर तेरह वर्षों तक न्यूज़ एंकर। भोपाल दूरदर्शन के पहले न्यूज़ एंकर। दस हज़ार से ज़्यादा टीवी रिपोर्ट, एक हज़ार घंटे से ज़्यादा लाइव प्रसारण, पांच हज़ार से ज़्यादा आलेख, सौ के आसपास डाक्यूमेंट्री। बीस से ज़्यादा विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता - अध्यापन।


भारत में सुनामी का ख़ास कवरेज। वॉइस ऑफ अमेरिका के लिए भी सुनामी का कवरेज। नेपाल में भूकंप का ख़ास कवरेज़। भारत की संसद के राज्यसभा टीवी के संस्थापक - संपादक। राज्यसभा टीवी में राज्यपालों पर केंद्रित देश की पहली सीरीज़ - महामहिम राज्यपाल के एंकर और  प्रस्तुतकर्ता। विरासत के तहत ग़ज़ल सम्राट जगजीतसिंह ट्रेजेडी क्वीन मीनाकुमारी, कुंदन लाल सहगल, गीतकार शैलेन्द्र और साहिर लुधियानवी, अमृता प्रीतम, खुशवंत सिंह, महाकवि प्रदीप, नीरज, रस्किन बॉन्ड, महान संपादक राजेंद्र माथुर, भारत के पहले टीवी स्टार सुरेंद्र प्रताप सिंह, व्यंग्यकार शरद जोशी, बेजोड़ कलाकार ज़ोहरा सहगल, सदी के महान कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण, फणीश्वरनाथ रेनू, रामधारी सिंह दिनकर, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, उपन्यासकार वृंदावनलाल वर्मा, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, संगीतकार और गायक एसडी बर्मन जैसे व्यक्तित्वों पर फिल्मों का निर्माण। अनेक चैनलों के प्रमुख रहे। क़रीब दस नए चैनल शुरू किए। अमेरिकी सरकार के आमंत्रण पर वहां मीडिया के तमाम रूपों का अध्ययन। कुछ किताबों में भी प्रकाशन सहयोग। अनेक पुरस्कार और सम्मान। भास्कर, इण्डिया टुडे, नवभारत टाइम्स, लोकमत, रविवार, दिनमान, धर्मयुग और जनसत्ता जैसे पत्र पत्रिकाओं में लगातार लेखन। उन्नीस सौ सतहत्तर से दो हज़ार चौदह तक सारे लोकसभा चुनावों का कवरेज। बीस से ज़्यादा विधानसभा चुनावों का कवरेज। संप्रति - स्वतंत्र पत्रकार।