जवाहरलाल नेहरू नहीं झेल पाते थे आलोचना

जवाहरलाल नेहरू नहीं झेल पाते थे आलोचना

मीडियावाला.इन।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर नेहरूवादी प्रगतिशील लेखक, पत्रकार आलोचना नहीं निन्दा करने में लगे हैं।  जवाहरलाल नेहरू की तुलना में नरेन्द्र मोदी ने संसद में कभी आपा नहीं खोया। कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कहा जा रहा है, विदेशी मीडिया का हवाला देकर भी सब कुछ वे सह रहे और उससे सीख भी रहे हैं।  राष्ट्र के नाम संदेश और वेक्सीनेशन की नीति में बदलाव भी इसका प्रमाण है। दूसरी ओर पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे जो चीन से हार के बाद तत्कालीन संसद में सांसदों के साथ कैसे पेश आते थे , यह समझिये।

जब आयना दिखाया तब
चीन से पराजय के बाद 14 नवंबर,1963 यानी नेहरू के जन्मदिन पर संसद में युद्ध के बाद की स्थिति पर चर्चा हो रही थी।  नेहरु ने प्रस्ताव पर अपनी बात रखते हुए कहा- 'मुझे दुख और हैरानी होती है कि अपने को विस्तारवादी शक्तियों से लड़ने का दावा करने वाला चीन खुद विस्तारवादी ताकतों के नक्शेकदम पर चलने लगा।' नेहरु बता रहे थे कि चीन ने किस तरह से भारत की पीठ पर छुरा घोंपा। वे बोल ही रहे थे कि करनाल से सांसद स्वामी रामेश्वरनंद ने व्यंग्य भरे अंदाज में कहा, ‘चलो अब तो आपको चीन का असली चेहरा दिखने लगा।’ इस टिप्पणी पर नेहरु नाराज हो गए। कहने लगे, 'अगर माननीय सदस्य चाहें तो उन्हें सरहद पर भेजा जा सकता है। सदन को भी नेहरु जी की यह बात समझ नहीं आई।' 

तो आप क्या कर रहे थे?

पंडित नेहरु प्रस्ताव पर बोलते ही जा रहे थे. तब एक और सदस्य एच.वी.कामथ ने कहा, 'आप बोलते रहिए। हम बीच में व्यवधान नहीं डालेंगे।' अब नेहरुजी विस्तार से बताने लगे कि चीन ने भारत पर हमला करने से पहले कितनी तैयारी की हुई थी। इसी बीच, स्वामी रामेश्वरानंद ने फिर तेज आवाज में कहा, ‘मैं तो यह जानने में उत्सुक हूं कि जब चीन तैयारी कर रहा था, तब आप क्या कर रहे थे?' अब नेहरु जी आपा खो बैठे और कहने लगे, ‘मुझे लगता है कि स्वामी जी को कुछ समझ नहीं आ रहा। मुझे अफसोस है कि सदन में इतने सारे सदस्यों को रक्षा मामलों की पर्याप्त समझ नहीं है।’

नेहरू डेमोक्रेटिक थे?
यानी जिस नेहरु जी को बहुत डेमोक्रेटिक व्यक्ति सिद्ध करने की कोशिश होती रही है, वह दरअसल छोटी सी आलोचना झेलने का माद्दा भी नहीं रखते थे। अपने को गुट निरपेक्ष आंदोलन का मुखिया बताने वाले नेता चीन के साथ संबंधों को मजबूत करना तो छोडिए, संबंधों को सामान्य बनाने में भी मात खा गए। कहां चली गई थी उनकी विदेश मामलों में कथित पकड़? 

सतीश जोशी

पिछले चालीस वर्षों से पत्रकारिता कर रहे, राजनीतिक विश्लेषक, टिप्पणीकार, नईदुनिया, भास्कर, चौथा संसार सहित प्रदेश के कई समाचार पत्रों के लिए लेखन। 


आदिवासी जनजीवन पर एक पुस्तक, राजनीतिक विश्लेषण पर पांच पुस्तकें, राज रंग, राज रस, राज द्रोह, राज सत्ता, राज पाट।  


रक्षा संवावदाता, रिपोर्टिंग के क्षेत्र में खोजी पत्रकारिता में महारथ हांसिल। प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में सांध्य दैनिक 6pm के समूह सम्पादक, इंदौर में कार्यरत।


संपर्क : 9425062606

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