कईयों को हजम नहीं हो रही शिव-नाथ की जुगलबंदी

कईयों को हजम नहीं हो रही शिव-नाथ की जुगलबंदी

मीडियावाला.इन।

सूबे की सियासत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा नेता प्रतिपक्ष एवं पुराने सूबेदार यानि कमलनाथ के बीच की जुगलबंदी कईयों को हजम नहीं हो पा रही है। कांग्रेस के कई नेता जहां दोनों नेताओं के बीच की केमेस्ट्री को देखकर हैरान हैं, जो भाजपा में भी लोग दबे छुपे इसको लेकर यह तंज कस रहे हैं कि यह शिवराज नहीं बल्कि शिवनाथ(शिवराज और कमलनाथ) सरकार है। एक ऐसी सरकार जिसमें शरीर तो शिवराज का है और आत्मा कलमनाथ की। 

ताजा घटनाक्रम मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को टालने के फैसले से जुड़ा है। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. गोविंद सिंह ने तीन दिनी सत्र आहूत करने पर जोर दिया लेकिन कमलनाथ ने कोरोना की दलील पर शिवराज के सुर में सुर मिलाते हुए सत्र को टाल दिया। कल दिग्विजय सिंह ने भी इस बात पर ऐतराज जताते हुए कहा कि डब छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में विधानसभा के सत्र हो रहे हैं तो मध्यप्रदेश में ऐसा क्यों हुआ। जाहिर तौर पर दिग्गी राजा ने शिवराज को कोसा है लेकिन परोक्ष रूप से उन्होंने सत्र टालने पर सहमति जताने वाले कमलनाथ को भी घेरा है। सत्र टलने से कई फायदे हुए हैं। शिवराज सिंह को तुरत फुरत स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुनने के पचड़े सेे निजात मिल गई है तो कमलनाथ पर नेता प्रतिपक्ष का पद छोडऩे का संकट भी टल गया। उधर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को भी पुराने अध्यक्षों से ज्यादा जलवा बिखेरने का कुछ और महीनों का मौका मिल गया। यह भी मुुमकिन है कि वह पूरे कार्यकाल में स्पीकर बनें रहें। 

बात सिर्फ सत्र के टालने भर की नहीं हैं। अब तक के सबसे गंदे प्रचार अभियान वाले उपचुनावों के नतीजे आने के अगले ही दिन कमलनाथ जिस तरह से अपने सांसद बेटे नकुलनाथ के साथ मुख्यमंत्री निवास जाकर जिस तरह से गलबहिंयां करते दिखे उसे कांग्रेस के भीतर भी अच्छे संदर्भ में नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ससुर के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए कमलनाथ की गोंदिया यात्रा को लेकर दबी जुबान में कांग्रेसी मजाक  उड़ा रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं को लगता है कि शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ के कार्यकाल में हुए घोटालों को लेकर कई कमजोर नसों को दबा रखा है जिसके चलते वह शिवराज के सामने नतमस्तक होने को मजबूर हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कमलनाथ नेता के साथ कारोबारी भी हैं  जिनके तकाजों के चलते वह ऐसा कर रहे हैं। लेकिन बात अभी तक की नहीं है शिवराज और कमलनाथ के बीच राजनीतिक सौहाद्र सूबे में कमलनाथ सरकार बनने के पहले से ही रहा है। कमलनाथ भी मुख्यमंत्री बनते ही राजनीतिक शिष्टाचार के नाते शिवराज से मिलने गए थे। 

बात केवल कमलनाथ के शिवप्रेम तक सीमित नहीं हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भी अपनी मुख्यमंत्री के बतौर चौथी पारी कमलनाथ स्टाईल में विस्फोटक अंदाज में शुरू की है। कमलनाथ ने हनीटे्रप के केस के चलते पत्रकार जीतू सोनी की सल्तनत को ध्वस्त किया तो बलात्कार की शिकायत के बाद शिवराज ने भी कथित पत्रकार प्यारे मियां के साम्राज्य को ढहा दिया? विधायक आरिफ मसूद की कालेज के अवैध हिस्से को तुड़वाया। कमलनाथ भी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी नाक पर मख्खी नहीं बैठने देते थे तो शिवराज के नए तेवर और कलेवर भी कमलनाथ से कमतर नहीं हैं। यह शिवराज के मूल पिंड में आया बड़ा बदलाव है। कमलनाथ भी आरके मिगलानी, प्रवीण कक्कड़, शोभा ओझा, रवींद्र बडग़ैयां की मंडली से घिरे थे तो शिवराज ने भी ऐसी ही मंडली बना रखी है जो उनके कामकाज और हरेक दिन की गतिविधियों का मसौदा तैयार करती हैं। शिवराज के कई शुभचिंतक  इस बात को लेकर हैरान हैं कि अपनी जिस स्टाईल के चलते कमलनाथ गच्चा खा गए उस पर चलने को शिवराज क्यों आमादा हैं?

(लेखक दोपहर मेट्रो के प्रधान संपादक हैं)

RB

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