देशहित पर सर्वसहमति से फ़ैसले कब लिए जाएँगे ?

देशहित पर सर्वसहमति से फ़ैसले कब लिए जाएँगे ?

मीडियावाला.इन।

किसानों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं तो किसान सरकार के विरोध में दिल्ली के चारों तरफ़ डेरा डाले हुए हैं। मुद्दा है किसानों से संबंधित तीन बिलों का। सरकार इन्हें किसान हितैषी बता रही है तो विपक्ष इन्हें किसानों को बर्बाद करने वाला बिल बता रहा है। तो विरोध करने वाले किसानों की माँग भी है कि किसानों से संबंधित ये तीनों क़ानून रद्द किए जाएँ।

मुद्दा यह भी है कि क्या यह किसान किसान हैं या फिर किसी दल समर्थित और किसी विचारधारा समर्थित व सरकार के विरोध में उतारे गए कथित किसान?

सवाल यह भी है कि राष्ट्र हित के मुद्दों पर भी पक्ष-विपक्ष का अंतर हमारी राष्ट्रीय राजनीति में कभी ख़त्म होता नज़र क्यों नहीं आता? किसानों को लेकर चाहे सरकार की सफ़ाई हो या विपक्ष का विरोध और चाहे किसान और उनके समर्थक..... सब कुछ बेचैन करने वाला है। तो बेचैन करने वाली स्थिति यह भी है कि विपक्ष केवल विरोध करने का माध्यम बन कर ही अपनी सार्थकता सिद्ध करने में क्यों जुटा रहता है। यूपीए-2 सरकार के समय के दो वायरल वीडियो भी यही साबित कर रहे हैं ...तो आज का राजनीतिक परिदृश्य भी इस पर मुहर लगा रहा है। सवाल यह है कि भारत की राजनीति में चाहे किसानों का मुद्दा हो, नौजवानों का हो या फिर सीमा पर तैनात जवानों का? क्या राष्ट्र हित के मुद्दों पर सर्वसहमति से कभी भी फ़ैसले नहीं लिए जाएंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता से संबंधित वायरल हो रहा वीडियो, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की वायरल फ़ोटो के साथ उनके हवाले से लिखा गया संदेश सभी राष्ट्रहित में हैं। आइए पढ़ते हैं इन सभी वायरल वीडियो के भाव और यही उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रहित में पक्ष विपक्ष का अंतर ख़त्म हो और सर्वसहमति से फ़ैसले भी हो सके।

पहला वीडियो-

सुषमा स्वराज संसद में बोल रही हैं, मीरा कुमार आसंदी पर विराजमान हैं और सुषमा के ठीक पीछे अनंत कुमार बैठे हैं।

सुषमा कहती हैं-

ग्रामीण अर्थव्यवस्था ये कहती है कि आपके ये बैंकों के एटीएम तो आज आए हैं।आढ़ती उस किसान का पारंपरिक एटीएम है।

(पीछे से सांसदों की आवाज आती है बहुत अच्छे-बहुत अच्छे।)

किसान को बेटी की शादी करनी हो या बुआ का भात भरना हो,बहन का छूछक भरना हो बच्चे की पढ़ाई करानी हो बाप की दवाई करानी हो, सिर पर साफ़ा बाँधता है और सीधा मंडी में आढ़ती के पास जाकर खड़ा हो जाता है।वह उसे सिर्फ़ विश्वास पर पैसा देता है क्योंकि उसे मालूम है कि जब फ़सल आएगी तब वह बैल गाड़ी में भरकर या ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर लेकर आएगा और वह उसे बेचकर पैसा वसूल लेगा। मैं पूछना चाहती हूँ कि क्या वालमार्ट या टेस्को उसे उधार देगा? क्या उसमें संवेदना होगी बेटी की शादी या बहन का भात भरने की? उसे तो धोती वाले और साफ़ा वाले किसान से बदबू आएगी।

(पीछे से आवाज़ें आती हैं बिल्कुल आएगी)

और कौन डायरेक्ट बात कर सकेगा। कौन किसान से सीधा ख़रीदेगा और जो नई एजेंसियाँ खड़ी होंगीं वह नए बिचौलिए खड़े हो जाएँगे। इसलिए यह बात कहना कि बिचौलिए को आप खत्म कर देंगे या मिडिलमैन को आप खत्म कर देंगे, सिरे से ग़लत है।

दूसरा वीडियो -

कपिल सिब्बल बोल रहे हैं और आसंदी पर मीरा कुमार ही विराजमान हैं। किसानों के मुद्दे पर सफ़ाई जारी है। 

कपिल सिब्बल बोलते हैं-

जब किसान बोता है और बेचने जाता है तो उसके पास मार्केट नहीं है बेचने के लिए। उसे मालूम नहीं है किस मार्केट में जाना है। और जब मंडी जाता है तो पैंतीस-चालीस फ़ीसदी माल ख़राब हो जाता है। और आठ कमीशन एजेंट होते हैं बीच में। आठ कमीशन एजेंट यानि बिचौलिए। और मेरे पास स्टडी हैं कि ओपन मार्केट का 17 फ़ीसदी किसान को मिलता है बाक़ी बिचौलियों को चला जाता है। विपक्ष के नेता और विपक्षी दलों को यह तय करना है कि वो किसान के साथ हैं या बिचौलियों के साथ। यह तय कर लीजिए। पैसा समय पर मिलेगा, नक़द मिलेगा, कमीशन खत्म हो जाएगा। साथ में टेक्नोलॉजी मिलेगी, कब बोना है, कैसे बोना है, कितना पानी देना है कितनी खाद देनी है और श्योर बायर है, उसे एक बायर पक्का मिल गया। प्राइम एग्रीमेंट हो गया। आलू का दाम उसे बाज़ार में 3 रुपया मिलता है पेप्सिको उसे 5 रुपया 75 पैसा देती है। 2010-11 में बाजार में 3.80 से 5 रुपए तक और पेप्सिको देती है 6 रुपया। तो किसान को पैसा ज्यादा मिलता है समय पर मिलता है। आम किसान की हालत यह है कि उसे मालूम नहीं है कि किस मार्केट जाना है कहाँ महँगा बिकेगा, इस बीच उनकी 35-40 फ़ीसदी फ़सल ख़राब हो जाती है।

तीसरा वीडियो -

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 29 सितंबर 2020 का यह वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने दल विशेष पर भी निशाना साधा और दल से जुड़े परिवार विशेष पर भी।

प्रधानमंत्री मोदी का कहना है -

एक ऐसा दल, जिसके एक परिवार की चार-चार पीढ़ियाँ - जिसने देश पर राज किया। वह आज दूसरे के कंधों पर सवार होकर देशहित से जुड़े हर काम का विरोध करवाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहता है। ये किसान की आजादी का विरोध कर रहे हैं। जिन सामानों की उपकरणों की किसान पूजा करता है। उन्हें आग लगाकर ये लोग किसानों को अपमानित कर रहे हैं। इनकी काली कमाई का एक और ज़रिया समाप्त हो रहा है इसलिए इन्हें परेशानी है। साथियों ये लोग न किसान के साथ हैं न नौजवान के साथ और न ही देश के वीर जवान के साथ हैं। बरसों तक इन लोगों ने देश की सेनाओं को, देश की वायुसेना को सशक्त करने के लिए कुछ नहीं किया। वायुसेना कहती रही कि उसे आधुनिक लड़ाकू विमान चाहिए। लेकिन ये लोग वायुसेना की बात कभी नहीं सुनी नज़रअंदाज़ करते रहे। रफाल का विरोध, राममंदिर का विरोध पहले सुप्रीम कोर्ट में फिर भूमिपूजन का विरोध। बदलती हुई तारीख़ के साथ विरोध के लिए विरोध करने वाले यह लोग अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।

अंत में वायरल फ़ोटो की सीख - 

अटल जी की फ़ोटो वायरल हो रही है जिसके नीचे उन्हीं का हवाला देकर लिखा गया है -

जहाँ विरोध और विरोधियों को ग़द्दार मानने का भाव है, वहाँ लोकतंत्र समाप्त होता है और तानाशाही का उदय होता है।

यह सब पढ़ने के बाद आपका क्या सोचना है? ज़रूर किसी न किसी रूप में अपनी प्रतिक्रिया किसी न किसी प्लैटफ़ॉर्म पर ज़रूर व्यक्त करें ताकि राष्ट्र का हित हो सके। किसान हितैषी फैसलों पर तकरार न हो और राष्ट्र हितैषी मुद्दों पर राजनैतिक संग्राम न हो। साथ ही वह दिन देखने को मिले जब राष्ट्रहित के मुद्दों पर सर्वसहमति से फ़ैसले लिए जाने के साक्षी बनने का अवसर देशवासियों को मिले, फिर सरकार में कोई भी दल रहे और विपक्ष में कोई रहे...विपक्षी दल की मान्यता न भी हो तब भी राष्ट्रहित पर सब एक सुर में बोलें ...।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के जाने-माने पत्रकार हैं। इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में लंबा अनुभव है। फिलहाल एसीएन भारत के स्टेट हेड हैं। इससे पहले स्वराज एक्सप्रेस (नेशनल चैनल) में विशेष संवाददाता, ईटीवी में संवाददाता,न्यूज 360 में पॉलिटिकल एडीटर, पत्रिका में राजनैतिक संवाददाता, दैनिक भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ, एलएन स्टार में विशेष संवाददाता के बतौर कार्य कर चुके हैं। इनके अलावा भी नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित विभिन्न समाचार पत्रों-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन किया है।

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