बंगाल में शुरू हुआ हिंसा, लूटपाट का दौर क्या बताता है?

बंगाल में शुरू हुआ हिंसा, लूटपाट का दौर क्या बताता है?

मीडियावाला.इन।

एक डॉक्टर मित्र का संदेश आया कि वे रात भर सो नहीं पाए तो मुझे लगा कि कोरोना पीड़ितों का इलाज करते,करते ये हाल हुए होंगे। पिछले दिनों उन्होंने बताया था कि एक दिन में उन्होंने 675 फोन मरीजों के सुने तो मेरा ऐसा सोचना स्वाभाविक था। फिर भी पता किया तो कारण जानकर सचमुच पीड़ा भी हुई और परेशानी भी।उन्होंने बताया कि बंगाल में ममता राज की वापसी के बाद मारवाड़ी व्यापारियों और खासकर भाजपा समर्थकों की दुकानों में जिस तरह से लूटपाट शुरू हुई है,वे उससे आहत थे। उनका कहना था कि ताज्जुब इस बात का है कि क्या बंगाल के लोग इस तरह की लूटपाट और अराजकता को पसंद करते हैं? जो वीडियो आ रहे हैं उसमें बाकायदा वीडियो बनाया जा रहा है और लुटेरे उसमें अपना चेहरा दिखाने में हिचकिचा नहीं रहे। उनका मानना है कि यदि इस तरह की हरकतें टी एम सी कार्यकर्ता करते रहे तो पांच साल कैसे बीतेंगे,यह सोचकर वे डॉक्टर विचलित हो रहे थे।इसी बीच 3 मई की शाम होते,होते बंगाल में भाजपा के 9 कार्यकर्ताओं की हत्या की खबरें भी आ गईं।सबसे ताज्जुब की बात यह है कि भाजपा की सरकार न बनने पर जश्न मनाने और भाजपा को उलाहने देने वाले विपक्षी नेताओं, सर्वधर्म समभाव रखने वाले, प्रगतिशील,बुद्धिजीवी वर्ग के किसी भी कथित नुमाइंदे की झूठमूठ प्रतिक्रिया भी नहीं आई, जो विचारणीय है कि वे महज भाजपा विरोध के एकमात्र एजेंडा के चलते देश को कहां ले जाना चाहते हैं।

यह तो वाकई त्रासदायक है। इसे तात्कालिक प्रतिक्रिया कहकर खारिज नहीं कर सकते। जैसे ही 2 मई को सुनिश्चित हुआ कि ममता राज लौट रहा है,वैसे ही भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके मोहल्ला कार्यालयों पर हमले शुरू हो गए थे।एक कार्यालय को इस अंदाज़ में आग के हवाले कर दिया गया,जैसे होली जलाई जा रही हो। ताज्जुब कि बंगाल की शेरनी कहलाने में गर्व महसूस करने वाली ममता बैनर्जी की ओर से अभी तक कोई चिंता,प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई  कि कार्यकर्ता ऐसा न करें। उनकी इस खामोशी ने जैसे कार्यकर्ताओं को यह संदेश दे दिया हो कि खेला जारी रहे।

उन डॉक्टर मित्र की एक और चिंता सोचने को विवश करती है। वे पूछते हैं,क्या बंगाल की जनता यही सब पसंद करती है? ऐसा इसलिए कि ममता राज में यह सब वहां आम था,उसके बावजूद वे भारी बहुमत से विजयी हुई हैं,याने लोगों को फर्क नहीं पड़ता कि  सत्तारूढ़ दल के लोग क्या करते हैं? मूलतः कोलकाता निवासी और इस समय सपरिवार कनाडा में बसे मेरे पारिवारिक मित्र से चुनाव के दौरान लगातार बात होती रही।वे आश्वस्त थे कि तृणमूल का यह आखिरी कार्यकाल है,क्योंकि उनके कार्यकर्ता तालिबानी अंदाज़ में पेश आ रहे थे।नतीजों  के बाद खुद उन्होंने फोन कर ममता की वापसी पर हैरानी जताई और आशंका व्यक्ति की कि वहां अब कुछ भी हो सकता है।यह इतनी जल्दी होगा,इसकी उम्मीद नहीं थी।

चुनाव में हार,जीत आम है और अनेक बार कार्यकर्ता या विजय जुलूस में शामिल भीड़ के बीच से कुछ लोग इस तरह की हरकतें कर दिया करते है,किन्तु कोलकाता के दृश्य भयावह स्थिति दर्शाते हैं। लोग जिस अंदाज़ में लूट का माल लेकर जाते दिखाई दे रहे हैं,वह उनकी निश्चिंतता दिखाता है कि उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं। ममता बैनर्जी को तीसरी बार मिले अपार जन समर्थन ने बंगाल में उनके वर्चस्व को बखूबी प्रमाणित किया है। 2 मई की शाम में नतीजे स्पष्ट होने के बाद ही बंगाल के भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ममताजी को बधाई देते हुए यही अपील की थी कि वे अपने कार्यकर्ताओं को हिंसा, हमले,तोड़फोड़,आगजनी से रोकें।याने तब से ही छुटपुट घटनाओं को देखते हुए यह आशंका हो चली थी कि ऐसा होगा। ममता जी को अब मुख्यमंत्री की तरह पेश आने की ज़रूरत है,जिसकी झलक अभी तो नहीं मिली।

#raman#bengal#mamta

देखिये वीडियो-

RB

 

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

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प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

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समाचार संपादक - दैनिक भास्कर, इंदौर 

कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

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साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० 1990 में  दैनिक नवभारत के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया।

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985।

० 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का विभिन्न अखबारों में प्रकाशन, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के एक माह के भीतर किताब युग-युग मोदी का प्रकाशन 23 जून 2019 को।

सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।

विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।

मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।

किताबें-इंदौर के सितारे(2014),इंदौर के सितारे भाग-2(2015),इंदौर के सितारे भाग 3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) , युग-युग मोदी(2019) सहित 8 किताबें प्रकाशित ।

भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी।

रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार ।

संप्रति- 2014 से बतौर स्वतंत्र पत्रकार भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण,अग्निबाण, चौथा संसार,दबंग दुनिया,पीपुल्स समाचार,आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में लेखन।