महाकाल की नगरी में मौतों का उपचुनावी तमाशा ...!

महाकाल की नगरी में मौतों का उपचुनावी तमाशा ...!

मीडियावाला.इन।

महाकाल की नगरी उज्जैन में ज़हरीली शराब के सेवन से हुई 14 मौतों का मामला पूरे शबाब पर है। सवाल उठाए जा रहे हैं, जाँच समितियां गठित की जा रही हैं, जाँच रिपोर्ट के आधार पर कठोरतम कार्रवाई करने का फ़रमान जारी किया गया है। ऐसा लग रहा है मानो इतनी सख़्ती और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई हो जाएगी कि भविष्य में मध्य प्रदेश का आबकारी महकमा भूलकर भी कोई चूक नहीं करेगा। सरकार का काम है एक मेसेज देना जिससे मातहत अधिकारी कर्मचारी सचेत हो जाएं। और न भी हों तो कम से कम जनता में एक मेसेज चला जाए कि सरकार अपनी जवाबदारी सौ टका ईमानदारी से निभा रही है। उधर विपक्ष भी अपनी जवाबदारी सौ टका से भी ज़्यादा ईमानदारी से निभाने को आतुर है। सरकार में एसीएस होम के नेतृत्व में जाँच कमेटी बनायी है तो विपक्ष ने भी अपनी एक जाँच कमेटी बनाकर उज्जैन भेज दी है। यह बात तो तय है कि जाँच रिपोर्ट आएगी सरकार की भी और विपक्ष की भी लेकिन कार्रवाही किस पर होगी या किस को मोहरा बनाया जाएगा, यह बात दीगर है। कम से कम आबकारी अधिकारी-कर्मचारियों के मामले में तो यह समझा ही जा सकता है।

सवाल उठाया जा रहा है कि उज्जैन के जिला आबकारी अधिकारी से रिपोर्ट तलब क्यों नहीं की गई? आबकारी आयुक्त ने बयान दिया है कि उज्जैन के कलेक्टर से रिपोर्ट तलब की गई है और आबकारी अधिकारी उनके अधीन है। संतुष्टि के लिए इतना ही जवाब काफ़ी है और इस जवाब में भविष्य की जाँच रिपोर्ट पर कार्रवाई के संकेत भी मिल रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद विधानसभा में पक्ष विपक्ष के बीच एक विवादास्पद आबकारी सहायक आयुक्त की फील्ड पोस्टिंग पर आरोप- प्रत्यारोप का नजारा सारा परिदृश्य साफ़ कर देता है। विपक्ष का आरोप था कि विवादित अधिकारी को बड़ा जिला दे दिया गया तो सत्तापक्ष का आरोप था कि उस अधिकारी की पहली फ़ील्ड पोस्टिंग सरकार में रहते हुए भाजपा ने ही की थी। ग़ौरतलब है कि अधिकारी पर जाँच उस समय तक जारी ही थी। और यह अफ़सर अब भाजपा सरकार में भी राजधानी में राज कर रहे हैं।  इससे एक बात साफ़ है कि आबकारी महकमा सरकार को जितना राजस्व देता है उतने ही शक्तिशाली उसके अधिकारी और कर्मचारी भी है। यह सहायक आबकारी आयुक्त फ़िलहाल भोपाल में ही पदस्थ हैं और इनकी मर्ज़ी के बिना ज़िले में पत्ता भी नहीं हिलता। इनकी कार्यशैली को लेकर इनके मातहत अधिकारी- कर्मचारी ज़्यादातर संख्या में असंतुष्ट हैं लेकिन बॉस को किसी की परवाह नहीं। और परवाह करने का कोई विषय भी नहीं है क्योंकि उन्हें मालूम है कि सरकार और सरकार के नुमाइंदों को ख़ुश रखने का क्या फ़ॉर्मूला है। यह ख़ाली एक अधिकारी की बात नहीं है बल्कि आबकारी महकमे में ज़्यादातर अधिकारी यह राज जानते हैं और उस पर ही अमल भी करते हैं और अपनी मर्ज़ी से ही अमल करवाते भी है।

ख़ैर फ़िलहाल महाकाल की नगरी में हुई मौतों का उपचुनावी तमाशा जनता को भी उसी नज़र से देखना चाहिए ताकि 14 मौतों पर हुई कार्रवाई उनके असंतोष का बड़ा कारण न बने। मध्य प्रदेश में पिछले 20 सालों का हिसाब अगर देखें तो क़रीब चार साल कांग्रेस की सरकार थी और 16 साल भाजपा की सरकार रही। पर आबकारी महकमे की तूती तो राज्य बनने के बाद से लगातार बनी हुई है। और कहा जाए तो युगों-युगों से शराब दिलों पर राज करती रही है। मौतें होती रही हैं, जाँचें होती रही हैं, ज़हरीली और अमृत वाली शराब बिकती रही है और आगे भी बिकती रहेगी।

RB

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कौशल किशोर चतुर्वेदी

श्री कौशल किशोर चतुर्वेदी भोपाल में जाने-माने पत्रकार हैं। वे वर्तमान में न्यूज़ 360 चैनल के एडिटर हैं।