Thursday, December 05, 2019
ठाकरे की ताजपोशी, बागी पवार का ‘स्टैंड’ और राखी सावंत की बधाई...!

ठाकरे की ताजपोशी, बागी पवार का ‘स्टैंड’ और राखी सावंत की बधाई...!

मीडियावाला.इन।

महाराष्ट्र के 29 वें मुख्‍यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे की शपथ ग्रहण के बाद राज्य में महिने भर से चल रहा सत्ता का नाटक थम गया। लेकिन इस नाटक की पृष्ठभूमि में जहां कई गंभीर सवाल और चुनौतियां हैं वहीं ठाकरे के सत्तासीन होने पर कई दिलचस्प प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। ठाकरे को बधाई देने वालों में विवादास्पद अभिने‍त्री राखी सांवत भी शामिल हैं।कई उतार चढ़ावों से भरपूर इस पूरे घटनाक्रम में मीडिया की निगाहें उन अजित पवार को खोज रही थीं, जिनके बारे में सवाल उठ रहे थे कि नाकाम बगावत के बाद अब वो क्या करने वाले हैं? पवार का सफाईनुमा यह बयान खासा चर्चा में रहा कि ‘मैंने बगावत नहीं की थी, केवल स्टैंड लिया था।‘

महाराष्ट्र में सत्ता के महानाट्य का पहला अंक समाप्त हुआ और अब दूसरा अंक शुरू हो रहा है। बीस साल बाद शिवसेना महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ हुई, इसकी खुशी शिवसैनिकों के चेहरों पर झलकना स्वा‍भाविक ही था। जिस ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, वहां भगवा के साथ तिरंगे और तीर कमान के साथ पंजे तथा चलती घड़ी का अजब घालमेल था। कई लोग केसरिया साफे बांधे खिलखिला रहे थे। कल तक एक दूसरे के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ने वाले सियासी पार्टियों के कार्यकर्ता अपनी तलवारों को म्यान में रख सौजन्य का इत्र लगाए हुए थे। एक दूसरे से गले मिलने, पैर छूने और बधाइयों का सिलसिला जारी था। यह सही भी है क्योंकि राजनीति का अंतिम साध्य सत्ता ही होता है। सत्ता का मिलना भक्त के भगवान से मिलन के परमानंद जैसा होता है। यही शिवसैनिकों, एनसीपी और कांग्रेस नेताअों के चेहरों पर झलक रहा था।

जैसे कि हर नई सरकार सत्ता में आते ही जनकल्याण की घोषणाओं के अंबार लगा देती है (और बाद में अक्सर इसी पिच पर बोल्ड भी होती है) उसी तरह इस त्रिदलीय सरकार ने भी अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम (एमसीपी) में किसान कर्जमाफी और लोक लुभावन योजनाओं का ऐलान किया। किसी भी सरकार को कल्याणकारी होना ही चाहिए, वरना लोकतंत्र का क्या अर्थ? लेकिन यह तो इसका जज्बाती पक्ष हुआ। जमीनी हकीकत यह है कि महाराष्ट्र सरकार पर 4 लाख करोड़ का भारी भरकम कर्ज है। अपने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान भी वह जैसे- तैसे इसी साल दे पाई है। पिछली फडणवीस सरकार ने भी चुनाव जीतने के बाद प्रदेश के किसानों के डेढ़ लाख तक के 34 हजार करोड़ रू. के कर्ज माफ करने का दावा किया था। वह योजना भी छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर ही थी। लेकिन उससे न तो राज्य में किसानों की आत्महत्याएं रूकीं और न ही खेती की बर्बादी थमी। उल्टे राज्य में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर माइनस में चली गई। क्योंकि मौसम की लगातार बेईमानी का इलाज किसी के पास न था और न है। पूर्व में सत्तासीन भाजपा को इसका भारी राजनीतिक नुकसान विधानसभा चुनावों में हुआ।

ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को करारी हार मिली। यानी किसानों ने सरकार को नकार दिया। नई सरकार में शामिल तीनो दलों का नेता चुने जाने के बाद खुद उद्धव ठाकरे ने कहा था कि महाराष्ट्र के मुख्‍यमंत्री पद कांटो का ताज है। अब ठाकरे सरकार की प्राथमिकता भी किसान कर्ज माफी ही है। क्या यह कर्ज माफी भी पहले की तरह होगी, यह साफ नहीं है। हालांकि ठाकरे सरकार के मुख्‍य रणनीतिकार औरदिग्गज नेता शरद पवार किसानों के दर्द को बखूबी समझते हैं, उनकी दुखती रग को जानते हैं, इसलिए माना जा सकता है कि इस बार की कर्ज माफी सचमुच किसानों को राहत देने वाली होगी। नई सरकार ने गरीबों को 400 वर्ग फीट का प्लाॅट और 10 रू. में थाली देने का भी ऐलान किया है। यह घोषणाएं काफी कुछ मप्र में कांग्रेस सरकार से मिलती-जुलती हैं। ये राहतदायी भी हैं, लेकिन साथ ही सरकार को आर्थिक कंगाली की ओर ले जाने वाली भी हैं। ठाकरे को केन्द्र की मोदी सरकार से औपचारिक बधाइयां जरूर मिलीं, लेकिन आर्थिक दरियादिली कितनी मिलेगी, कहना मुश्किल है। मध्यप्रदेश में हम देख ही रहे हैं।

अब ठाकरे सरकार को लेकर प्रतिक्रियाओं की बात। शिवसेना के मुख पत्र ‘सामना’ ने इस सरकार को ‘महाराष्ट्र धर्म निभाने वाली सरकार’ करार दिया है। महाराष्ट्र धर्म से तात्पर्य शिवाजी महाराज के उसूलों पर आधारित स्वराज्य। जो सबका और सबके लिए था। उद्धव ठाकरे इसी शिव संकल्पना पर चलेंगे। मजे की बात यह है कि महाराष्ट्र हर सरकार शिवाजी के नाम पर ही सत्ता में आती है। लेकिन शिवाजी के बारे में दूसरों को कितना ज्ञान है, यह मीडिया के लाइव कवरेज में उजागर हुआ। एक तेज चैनल की रिपोर्टर ने हमें बताया कि ठाकरे की शपथ ग्रहण की जोरदार तैयारियाँ हैं क्योंकि इसी (शिवाजी पार्क) जगह शिवाजी महाराज ने भी शपथ ली थी। उन्हें कौन समझाए कि शिवाजी का राजतिलक साढ़े तीन सौ साल पहले रायगढ़ के किले में हुआ था। उस जमाने में संविधान की शपथ नहीं हुआ करती थी और न ही तब मुंबई शहर की कोई हैसियत थी। खैर..।

राज्य में ठाकरे के शपथ ग्रहण से पूर्व एनसीपी नेता और ठाकरे मं‍त्रिमंडल में मंत्री बने जयंत पाटील ने एक प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें उन्होंने मीडिया द्वारा नई सरकार की शिक्षा नीति को लेकर पूछे गए सवाल का बड़ा रोचक जवाब दिया। पाटील ने तंज करते हुए कहा कि पिछली सरकार में शिक्षा भी ‘विनोद’ हो गई थी। हम ऐसा नहीं होने देंगे। ध्यान रहे कि फडणवीस
सरकार में विनोद तावड़े शिक्षा मंत्री थे।

शपथ ग्रहण के पूरे दिन उद्धव ठाकरे के अलावा लोगों की निगाहें तीन दिन के उपमुख्‍यमंत्री रहे दादा अजित पवार पर लगी थीं। सवाल तैर रहा था कि दादा अब फडणवीस सरकार की तरह ठाकरे सरकार में भी उपमुख्‍यमंत्री बनेंगे या नहीं? हालांकि दादा ने खुद इस बात का खंडन कर दिया। अब माना जा रहा है कि उन्हें बाद में ‘खुश’‍ किया जाएगा। दादा ने मीडिया से कहा भी कि मैं एनसीपी के साथ था, हूं और रहूंगा। दूसरा सवाल, तो फिर दादा ने अपनी पार्टी और चाचा शरद पवार से मिनी बगावत क्यों की? इस पर दादा की सफाई थी कि मैंने बगावत नहीं की थी, केवल ‘स्टैंड’ लिया था। राजनीतिक पाला बदल का यह नया शब्दांकन है। वैसे राजनीति शास्त्र के अध्येताओं और विश्लेषकों के लिए यह नया विचार बिंदु है कि बगावत और स्टैंड में बुनियादी अंतर क्या है?

उद्धव ठाकरे को राज्य का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देने वालों में मंच पर परिवार सहित मुकेश अंबानी भी मौजूद थे। यह इस बात की पावती थी कि अंबानी के बगैर इस देश में कोई सरकार नहीं चल सकती। लेकिन ठाकरे को उन हल्कों से भी बधाई मिली, जिसकी शायद उन्हें उम्मीद न होगी। उद्धव ठाकरे के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ग्रहण के पूर्व विवादप्रिय अभिनेत्री, डांसर राखी सावंत ने एक टिकटाॅक वीडियो जारी कर कहा कि मुझे पूरा वि‍श्वास था कि उद्धव ठाकरे ही महाराष्ट्र के मुख्‍यमंत्री बनेंगे। वो ही बने भी। मुझे भरोसा है कि अब राज्य में ‘आतंकवाद’ का पूरा सफाया होगा। राखी ने तो जो कहना था कह दिया, राजनीतिक विश्लेषक उसके अलग- अलग अर्थ निकाल रहे हैं।

RB

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अजय बोकिल

जन्म तिथि : 17/07/1958, इंदौर

शिक्षा : एमएस्सी (वनस्पतिशास्त्र), एम.ए. (हिंदी साहित्य)

पता : ई 18/ 45 बंगले,  नार्थ टी टी नगर भोपाल

मो. 9893699939

अनुभव :

पत्रकारिता का 33 वर्ष का अनुभव। शुरूआत प्रभात किरण’ इंदौर में सह संपादक से। इसके बाद नईदुनिया/नवदुनिया में सह संपादक से एसोसिएट संपादक तक। फिर संपादक प्रदेश टुडे पत्रिका। सम्प्रति : वरिष्ठ संपादक ‘सुबह सवेरे।‘

लेखन : 

लोकप्रिय स्तम्भ लेखन, यथा हस्तक्षेप ( सा. राज्य  की नईदुनिया) बतोलेबाज व टेस्ट काॅर्नर ( नवदुनिया) राइट क्लिक सुबह सवेरे।

शोध कार्य : 

पं. माखनलाल  चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में श्री अरविंद पीठ पर शोध अध्येता के  रूप में कार्य। शोध ग्रंथ ‘श्री अरविंद की संचार अवधारणा’ प्रकाशित।

प्रकाशन : 

कहानी संग्रह ‘पास पडोस’ प्रकाशित। कई रिपोर्ताज व आलेख प्रकाशित। मातृ भाषा मराठी में भी लेखन। दूरदर्शन आकाशवाणी तथा विधानसभा के लिए समीक्षा लेखन।  

पुरस्कार : 

स्व: जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी उत्कृष्ट युवा पुरस्कार, मप्र मराठी साहित्य संघ द्वारा जीवन गौरव पुरस्कार, मप्र मराठी अकादमी द्वारा मराठी प्रतिभा सम्मान व कई और सम्मान।

विदेश यात्रा : 

समकाालीन हिंदी साहित्य सम्मेलन कोलंबो (श्रीलंका)  में सहभागिता। नेपाल व भूटान का भ्रमण।