कमलनाथ की जय-जय बोल

कमलनाथ की जय-जय बोल

मीडियावाला.इन।

आज का शीर्षक पढ़कर आपको 'चमचत्व' की गंध आएगी, आना ही चाहिए क्योंकि मै अक्सर इस विधा से दूर रहता हूँ। यूँ भी मैं अपने मुख्यमंत्री कमलनाथ की चमचागिरी नहीं कर रहा, मैं आजतक न कमलनाथ से मिला हूँ और न मेरा फिलहाल ऐसा कोई इरादा भी है। मेरा मकसद उस अभियान की सराहना करना है जो इन दिनों प्रदेश में चलाई जा रही है। प्रदेश में भू-माफिया के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत कमलनाथ ने दिखाई है ,इसलिए मैंने भी थोड़ी सी पटरी बदली है।

मैं बीते चार दशक से सभी दलों की सरकारों को देख चुका हूँ। मेरा तजुर्बा है कि सभी दल माफिया के बगलगीर होते हैं, उनके खिलाफ कोई खड़ा नहीं होता। इसका नतीजा ये हुआ है कि प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों से लेकर सरकारी कामकाज तक में माफियाराज कायम हो चुका है। माफिया के अलावा कोई दूसरा किसी भी कारोबार में हाथ डालने के बारे में सोच भी नहीं सकता। आज हालात ये हैं कि माफियाराज की समानांतर सरकार बन गयी है, जिसमें पहली बार सेंध लगाईं गयी है। ये सेंध भी हालांकि 'हनीट्रैप' के बाद लगी। हनीट्रैप भी माफिया का ही एक कारोबार था। 

माफिया बाहुबली होता है,दुःसाहसी होता है, उसमें जोखिम लेने की क्षमता होती है और वो किसी के भी साथ भागीदारी करने में समर्थ होता है। जितने भी जन -प्रतिनिधि होते हैं उनमें  से कुछेक को छोड़कर अधिकांश माफिया के साथ मिलकर काम करते हैं। मुझे एक वाक़या याद है। बात 1984  की थी। नगर निगम के चुंगी नाकों पर माफिया द्वारा की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ सदन में बोलना था, बाहर माफिया के सशत्र आदमी थे, खिड़कियों से उनकी लाल आँखें झाँक रहीं थीं ऐसे में कोई भी चुंगी नाकों को माफियाओं को देने के खलाफ बोलने के लिए तैयार नहीं था। ऐसे में लोकदल के  एक पार्षद जगदीश शर्मा ने बोला और जान हथेली पर रखकर बोला,परिणाम स्वरूप माफिया को चुंगी नाकों के ठेके नहीं मिले सके ।लेकिन ये एक अपवाद है ,अन्यथा सब कुछ माफिया को ही मिलता है।

कमलनाथ की सरकार ने भले ही निजी स्वार्थों के चलते इंदौर से माफियाराज के खिलाफ शंखनाद किया हो लेकिन अब पूरे प्रदेश में ये एक जन अभियान बन चुका है। सरकार ने जिस तरीके से प्रशासन को माफिया के खिलाफ काम करने की छूट दी है उससे अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। माफिया का साथ देने वाला अमला ही अब माफिया की जड़ें खोदने का सद्कर्म कर रहा है। मुझे लगता है कि सरकार ने समझ और जान लिया है कि माफियाराज के चलते राजनीतिक दलों का राज ढंग से नहीं चल सकता ।माफिया को समानांतर खड़ा होने से रोकने के लिए जिस इच्छाशक्ति की जरूरत होती है उसका लगातार अभाव रहा ।पहली बार कमलनाथ ने ये इच्छाशक्ति दिखाई और खूब दिखाई।

आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां माफिया का दखल न हो,इन्हें साफ़ करने के लिए सबको सामने आना पडेगा,मुझे पता है कि  माफिया को संरक्षण देने वाले सत्ता और शासन में बैठे लोग ही होते हैं लेकिन यदि ऊपर वाला नेकी और दरियादिली से काम ले तो माफिया को धूल में भी मिलाया का सकता है। अच्छी बात ये है कि ग्वालियर के जन प्रतिनिधियों ने माफिया और आम अतिक्रमणकारी में भेद की बात कर कमलनाथ को आगाह कर दिया ।इससे माफिया विरोधी मुहिम के नाम पर नौकरशाही द्वारा की जाने वाली चौथ वसूली की संभावना बहुत कम हो गयी ,अन्यथा हर मुहिम को पलीता लगाया जाना आसान काम है।

माफिया विरोधी मुहिम के तहत सम्पति को नष्ट करने के बजाय उसे राजसात करने का सुझाव भी आया है, ये नेक स्वभाव है लेकिन व्यावहारिक नहीं है। यदि माफिया की सम्पत्ति को छोड़ा गया तो बाद में इस सम्पत्ति को अदालत के सहारे वापस लेने के रास्ते खुले रह जाते हैं इसलिए बेहतर है कि -न रहे बांस और न बजे बाँसुरी। माफिया राज के सफाये से प्रदेश में एक नया वातावरण बनने की उम्मीद है। आम आदमी के मन में सरकार के प्रति विश्वास  बढ़ने के साथ ही शासकीय सम्पत्ति के खुर्द-बुर्द होने की प्रवृत्ति पर भी लगाम लगेगी। कारोबार में भी आम आदमी की भागीदारी बढ़ेगी ,इसलिए इस मुहिम को समर्थन मिलना ही चाहिए और सौभाग्य से मिल भी रहा है ,हालांकि भाजपा ने इस मुहिम की खिलाफत अपने अंदाज में की है।

माफिया विरोधी मुहिम की सफलता के लिए निष्पक्षता पहली शर्त है,देखने में आया है कि कुछ मामलों में स्थानीय प्रशासन इस या उस नेता के दबाब में आकर नरमी का व्यवहार दिखा रहा है। मुख्यमंत्री कमलनाथ को इसकी निगरानी खुद करना होगी ,क्योंकि अंतत:प्रदेश में अकेले कांग्रेस की ही सरकार नहीं है। दिल्ली की सरकार में शामिल लोग भी यहां रहते हैं और उनका भी माफिया से याराना रहा है। मेरी निजी मान्यता है की राजनीति  से माफिया को न सिर्फ अलग किया जाये बल्कि इस तरह की वृत्ति को गंभीर अपराध की श्रेणी में भी रखा जाये ।सरकार की मुहिम की चपेट में आये माफिया के प्रति मेरी कोई सहानुभूति न पहले थी और न अब है। मेरा तो मानना है कि दुसरे चरण में ये मुहिम जिलों तक ले जाए जाये, ताकि माफियाराज का समूल सफाया हो सके।

RB

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राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।