एक और धोखे की चीन की तैयारी

एक और धोखे की चीन की तैयारी

मीडियावाला.इन।

अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर चीनी सेना की भारी संख्या में मौजूदगी की ताजा जानकारी देश को कारगिल विजय दिवस के दिन मिली है जो एक और दुश्मन राष्ट्र की धोखाधड़ी का एक कांड था पाकिस्तान ने कारगिल में धोखे से भारत पर आक्रमण किया था । हालांकि उसने मुंह की खाई थी। 21 साल बाद इसी दिन चीन की धोखाधड़ी का एक और सबूत सामने आया है जिससे भारत को चेत जाना चाहिए। अनुसंधान और विकास संगठन के खुफिया सैटेलाइट एमीसेट ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की सीमा के जो चित्र लिये हैं उनमे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक वहां भारी संख्या में तैनात दिखे हैं। चीन की धोखेबाजी को सरकार नहीं देखना चाहती है लेकिन उसे सैटेलाइट ने देख लिया है। अभी विज्ञान वहां तक नहीं पहुँचा है कि सेटेलाइट भी वह नहीं देखें जो सरकार नहीं चाहती है। यह बहुत संवेदनशील इलाका है। अरुणाचल प्रदेश के ही एक बड़े भूभाग पर वर्षों पहले किए गए  कब्जे को चीन ने आज तक नहीं छोड़ा है। भारत की 3000 किलोमीटर से अधिक की सीमा के अधिकांश हिस्से में चीन ने लड़ने जैसी तैयारियां कर ली हैं। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है कि सीमा वार्ताओं में सैन्य अधिकारी आपस में क्या निर्णय कर रहे हैं। पिछले दिनों जिस भूमि पर वह आगे बढ़ आया था उसे भी वह छोडने से इंकार कर रहा है। जबकि वह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से यह वादा कर चुका था। सन 1962 की लड़ाई में भी उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को धोखा दिया था और अब वह वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धोखा दे रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की यह बात गले नहीं उतरती है कि रक्षा क्षेत्र पर यूपीए सरकार ने कमजोर इच्छा शक्ति के कारण कोई काम नहीं किया जबकि मोदी सरकार ने रक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। देश की सुरक्षा और सेना को अधिक से अधिक शक्तिशाली बनाने का काम किसी पार्टी की विचारधारा या किसी सरकार के राजनीतिक एजेंडे से तय नहीं होता है।

RB

 

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भानू चौबे


* पूर्व संयुक्त सम्पादक , नई दुनिया, इंदौर 

* सम्पादकीय विभाग के विभिन्न विषयों का कार्य अनुभव , विशेषत: समाचार , समाचार विश्लेशण , राजनीतिक विश्लेशण , रिपोर्टिंग, साक्षात्कार 

*पंद्रह वर्ष से अधिक समय नई दुनिया के सम्पादकीय  लेखन  का स्वतंत्र प्रभार । 

* वर्तमान : सुबह सवेरे दैनिक ,भोपाल में सम्पादकीय लेखन ।