चीन की शह पर नेपाल दिखाने लगा है अपने तेवर

चीन की शह पर नेपाल दिखाने लगा है अपने तेवर

मीडियावाला.इन।

भारत की कूटनीति को भी यही दिन देखना बाकी  था ? अब चीन के इशारे पर अब नेपाल भी भारत को आंखे दिखाने लगा है।  धारचूला से लिपुलेख जाने वाली 90 किलोमीटर लंबी सड़क पर नेपाल में न केवल आपत्ति की है, बल्कि अपनी  सेना को भी वहां भेजा है और दावा किया है कि जो सड़क  है वह नेपाल की ज़मीन पर बनी  है। भारत उसके आरोप का खंडन कर चुका है लेकिन अब नेपाल कह रहा  है कि हम भारत को एक  इंच ज़मीन भी नहीं देंगे।  

भारत ने  जो सड़क बनाई  है वह नेपाल की सीमा पर  है।  दरअसल भारत की सीमा  सीमा जमीन पर 15 हज़ार किलोमीटर से भी लंबी है और भारत की सीमा सात देशों से मिलती है जिनमें नेपाल, बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं।  भारत की  सीमा बांग्लादेश के साथ चार हज़ार  किलोमीटर से भी अधिक है और नेपाल से हमारी सीमाएं 1551 किलोमीटर लंबी है, जिस जगह यह सड़क बनाई गई है वह  जगह लिपुलेख दर्रा पर है।  यह दर्रा हिमालय की घाटी में है और सड़क बनाने के बाद कैलाश मानसरोवर जाने का मार्ग आसान हो गया है।

 गत आठ  मई  को इसका उद्घाटन हुआ था। यह दर्रा साढ़े  17हज़ार  फुट ऊंचा है।  इस सड़क के बनने के बाद उत्तराखंड धारचूला से सीधा जुड़ जाएगा।  रक्षा की दृष्टि से भी यह सड़क भारतीय सेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दो या तीन दिन का रास्ता अब कुछ ही घंटों में पूरा किया जा सकेगा।  नेपाल इस दर्रे को अपनी सीमा मानता है लेकिन अगर भारत में इस सड़क का उपयोग किया तो चीन भारतीय सेनाओं की जद में होगा। भारतीय विदेश विभाग के मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया है कि पिथौरागढ़ जिले में जिस सड़क का उद्घाटन किया गया है वह पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र में है और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाली तीर्थयात्री इसी सड़क से होकर जा रहे  हैं।

 भारत और चीन के तिब्बत क्षेत्र के बीच की सीमा पर  इस के दक्षिणी हिस्से को भी काला पानी कहा और माना जाता है नेपाल इसके दक्षिणी को अपना भाग मानता है, जबकि यह पूरा इलाका 1962 से ही भारत के नियंत्रण में है।  अब चीन अपने देश की सीमाओं का नया नक्शा जारी करनेवाला  है।  नेपाल कालापानी क्षेत्र के छांगरु में स्थायी रूप से 160 सैनिकों की टुकड़ी तैनात करेगा। यही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से करीब 12 किमी दूर छावनी का निर्माण भी करेगा।  नेपाल कालापानी क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए बेहतर व्यवस्था करने में जुटा है। इसी क्रम में उसने स्थायी छावनी निर्माण की योजना तैयार की है।    

 नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार, लिपुलेख दर्रा उसके इलाके में पड़ता है, इसलिए यहाँ पर भारत के सड़क बनाना गलत है।  सुगौली संधि 1816 में ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई थी।  जबकि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से ही यह पूरा इलाका भारत के कब्ज़े में है।

लिपुलेख सड़क के निर्माण पर सबसे ज्यादा आपत्ति चीन को होनी चाहिए लेकिन चीन खुद सामने नहीं आ रहा है और वह नेपाल को आगे कर रहा है।  नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस विवाद पर रायशुमारी की और सर्वदलीय बैठक बुलाई जिसमें पूर्व प्रधानमंत्रियों ने भी हिस्सा लिया।  नेपाल मजदूर किसान पार्टी के सांसद प्रेम सुभाष में दावा किया है कि नेपाल के प्रधानमंत्री में इस मार्ग पर अपना दावा किया है हमारी पुरखों की जमीन है और हम इसकी हिफाजत किसी भी तरह करेंगे।  नेपाल इस मामले में भारत विरोधी प्रदर्शनों को हवा दे रहा है और अपना कूटनीतिक विरोध भी दर्ज करा रहा है।

नेपाल का कहना है कि भारत में जो सड़क बनाई है उसमें 22 किलोमीटर सड़क का हिस्सा नेपाल का है.अफसोस की बात है कि अब तक नेपाल इस बारे में कोई आपत्ति नहीं कर रहा था।  चीन इस जमीन पर निगाहें गड़ाए हुए था और 1962 से भारत चीन युद्ध के समय से भी सेना की  चौकियां यहां है. तब भी नेपाल में कोई आपत्ति नहीं की थी।  नेपाल चीन की  तमाम योजनाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है और नेपाल की वामपंथी पार्टियां भारत के खिलाफ लोगों को भड़का रही हैं।   उन्हें चीन का पूरा समर्थन है। भारत इस मामले को कूटनीतिक मार्ग से निपटाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि कूटनीतिक तरीका ही इस तरह के विवादों को हल करने में सही सक्षम है। 

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।