राजनीति के घटाटोप में असल जननायक

राजनीति के घटाटोप में असल जननायक

मीडियावाला.इन।

शिवराज सिंह चौहान का व्यक्तित्व प्रभावी राजनेता का है। उनमें दूरदर्शिता के साथ तात्कालिकता, दृढ़ता के साथ विनम्रता और आत्मीयता के साथ सहृदयता का अदभुत संयोजन है। सज्जनों के साथ कोमल व्यवहार उनके व्यक्तित्व की विशेषता है। वे हर जाति, धर्म, सम्‍प्रदाय का सम्मान करते हैं। दीपावली, होली, कृष्ण जन्मोत्सव से लगाकर प्रकाश पर्व, महावीर जयंती, ईद, क्रिसमस, बुद्ध पूर्णिमा भी वे उत्साह से मनाते हैं। शिवराज की लोकप्रियता राजनीति से जुड़े दूसरे नेताओं के लिए मिसाल है! उनकी वाणी के जादू का ही असर है कि पलभर में हुजूम उनके साथ हो जाता है? उनके व्यक्तित्व का सम्मोहन है कि लोग उन्हें सुनना चाहते हैं। उनके हर आश्वासन पर भरोसा करते हैं। वे सिर्फ जनप्रतिनिधि ही नहीं, किसी के लिए 'बड़े भाई' हैं तो किसी के लिए 'मामा।'

 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान का जादू किसी राजनीतिक चमत्कार से कम नहीं है! इसलिए कि भाजपा का कोई भी मुख्यमंत्री अपना एक कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सका! इस नाते शिवराज सिंह भाग्य के भी धनी है। उपलब्धियां पाने के लिए उन्होंने अथक परिश्रम किया! अपनी अलग रणनीति बनाई! नई कार्यशैली विकसित की! टीम में सही और मेहनती लोगों का चुनाव किया! योजनाओं से लोगों का दिल जीतने की कोशिश की! उन्होंने अपने कार्यकाल में सिर्फ योजनाएं नहीं बनाई, उनके क्रियान्वयन के भी अनथक प्रयास किए! पार्टी के अंदर और विपक्ष के खुले और छुपे हमलों को झेला! इस सबसे उभरकर जो सामने आया, वही आज के शिवराज सिंह चौहान हैं!  

शिवराज का व्यक्तित्व बहुमुखी है। विरोधी उनके बारे में कुछ भी प्रचारित करें, लेकिन वे राजनीति में शुचिता के पक्षधर हैं और विरोधियों के प्रति भी सहिष्णुता रखते हैं। वे ऐसे नेता हैं, जिसने सहृदयता के नए मानदंड स्थापित किए। मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में लगातार चार बार सरकार बनाने वाले कुशल संघटक का सेहरा भी इसी नेता के माथे पर सजा है। सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए 'बेटी बचाओ अभियान' जैसे सामाजिक आंदोलनों का सूत्रधार भी इस नेता को माना जाता है। काम के प्रति जिद, जुनून और जज्बा उनके व्यक्तित्व पहचान है। उनके नजदीक रहे कई अफसर बताते हैं कि उनमें काम की स्थिति और नतीजों को लेकर हमेशा जिद सी रहती है। शायद यही कारण है कि अफसरों को हर काम का हिसाब रखना पड़ता है।

जहाँ तक उनके व्यक्तित्व की बात है, तो उसके संवेदनशील होने में किसी को शक़ नहीं! सामाजिक मुद्दों के प्रति भी उनकी सोच दूरदर्शी और संवेदनशील है। बेटियों की शादी को लेकर उनकी संवेदना और महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय को खत्म करने की उनकी सोच उनकी सामाजिक सोच का सबसे बड़ा परिचायक है। महिलाओं के सम्मान को समाज में बरक़रार रखने के लिए उन्होंने कई फैसले किए। उनके 'बेटी बचाओ अभियान' की देशव्यापी सफलता ने देश को बिगड़ते लैंगिक अनुपात को नियंत्रित की राह दिखाई! महिला पर होने वाले अत्याचारों पर अंकुश लगाने के लिए 'शौर्यादल' का गठन उनकी ही सोच है। स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण, पुलिस बटालियन, महिला सेल और महिलाओं पर अपराधों के मामलों में अनुसंधान में समय सीमा का निर्धारण उनके व्यक्तित्व का परिचायक है।

परिश्रम में मामले में भी शिवराज सिंह बेजोड़ है। जन आशीर्वाद यात्रा हो या जनदर्शन, उन्हें कभी आलस्य करते नहीं देखा गया! अलसुबह से आधी रात तक उनमें सक्रियता बनी रहती है। लोग भी कहते हैं कि हमने शिवराजजी को कभी थकते नहीं देखा! राजनीतिक, सरकारी और प्रशासनिक कार्यक्रमों में भी उनके उत्साह में कहीं कमी नहीं दिखती!  उनकी अध्ययनशीलता भी गजब की हैं। अपनी यात्रा के दौरान वे पूरी पुस्तक ही पढ़ लेते हैं। कभी नहीं लगा कि किसी विषय पर वे बिना तैयारी के बोले हों! वे जब बोलने खड़े होते हैं, विषय पर पूरे अधिकार के साथ बोलते हैं।

सामान्यतः देखा गया है कि राजनेताओं को लेकर लोग अपने परिवारों में ज्यादा बातें नहीं करते! लेकिन, शिवराज को अपवाद माना जाएगा कि उन्होंने परिवार के हर सदस्य के बीच अपनी जगह बनाई है! प्रदेश के बच्चे शिवराज को 'मामा' और महिलाएँ 'भाई' के रूप में देखती हैं। वे जहाँ जाते हैं, देखने के लिए सैलाब उमड़ पड़ता है। इसे उनके व्यक्तित्व का आकर्षण कहा जाए या जनता से सीधे संवाद का नतीजा, जो भी है अद्भुत है! उनके उदबोधन के असर से अमेरिका में बसे भारतीय भी खासे प्रभावित हुए! अमेरिका का उद्योग जगत तो इतना प्रभावित हुआ कि निवेश के कई प्रस्ताव प्रदेश को मिले! उनके इतने लंबे कार्यकाल में 'बीमारू राज्य' के कलंक से भी मध्यप्रदेश काफी हद तक उभरा है। उनके कार्यकाल में मध्यप्रदेश की विकास दर लगातार बढ़ी है। कृषि विकास दर भी किसी चमत्कार से कम नहीं। आज मध्यप्रदेश ने पंजाब को कृषि विकास में पीछे छोड़ा है, तो इसके पीछे शिवराज सिंह के नेतृत्व का कमल ही है। किसानों को 24 घंटे बिजली और क्षिप्रा का नर्मदा से मिलन भी आसान बात नहीं है।

शिवराज की नेतृत्व क्षमता, मिलनसारिता, सरल व्यक्तित्व और सर्वसुलभता का ही नतीजा था कि वे प्रदेश की राजनीति में आने से पहले पाँच बार सांसद भी बने। उनकी नेतृत्व क्षमता पहचान कर ही पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश की कमान सौंपी! वे 29 नवम्बर 2005 को पहली बार मुख्यमंत्री बने। पार्टी के इस निर्णय में वे सफल साबित हुए। हर बार विकास और जनहितैषी योजनाओं ने उनकी और पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाई! आज उनके जन्मदिन पर अनंत शुभकामनाएं और बधाई!

RB

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