राम नाम को ठीक से लूट भी ना सकी कॉंग्रेस

राम नाम को ठीक से लूट भी ना सकी कॉंग्रेस

मीडियावाला.इन।

मध्य प्रदेश के उपचुनावों के प्रचार में काँग्रेस ने यह नारा देकर अपनी स्थिति हास्यास्पद बना ली है कि " मैं भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम हूँ। भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान को कथित तौर पर नंगा भूखा कहने के जवाब में भाजपा ने " मैं भी हूँ चौकीदार " की तर्ज़ पर " मैं भी हूँ शिवराज " का नारा चलाया है। कॉंग्रेस यहीँ चूक गई है।उसे कहना था, " मैं भी हूँ कमलनाथ ।" वह माकूल उत्तर होता। याद नहीं आता कि भारतीय जनता पार्टी ने या उसके किसी नेता ने कभी यह कहा हो कि वो राम है। राम होने में और राम भक्त होने में फर्क़ है। भक्ति मार्ग में आराध्य का सेवक होने, अनुयायी होने के भाव को ही सर्वाधिक महत्व मिला है। इसी में श्रद्धा के चरम को,उसके सम्पूर्ण समर्पण को देखा गया है।भाजपा ने राजनीति में राम नाम का सहारा एक दीर्घकालीन सोची समझी रणनीति के अनुसार लिया । करीब तीन दशक में उसे इस का पूरा लाभ मिला है ।भाजपा लाख विपरीत दावे करे लेकिन सच यही है कि राम नाम का सहारा उसने इस राजनीति के भव सागर में पार लगने के लिए ही लिया। याद कीजिए, अस्सी के दशक के प्रारंभ में अपने जन्म से पहले भाजपा के पुराने स्वरूप ने कब राजनीति में लाभ उठाने के लिए राम नाम का सहारा लिया था ? सच पूछिये तो भाजपा ने राम नाम से लाभ भले ही पाया लेकिन राम चरित को आत्मसात नहीं कर पायी (या पहले दिन से ही वह जानती थी कि ऐसा करना राजनीति में असंभव है इसलिए केवल राम नाम के राजनीतिक लाभ पर ही ध्यान जमाया ! )। वह साथ-साथ राम नाम को आत्मसात करने का उपक्रम करते भी दिखाई देती है लेकिन कॉंग्रेस इस उपक्रम का मर्म और लाभ समझ ना सकी और इसलिए उसकी नकल भी नहीं कर सकी ।जवाब देने के जोश में काँग्रेस में इस नारे को मंजूरी देने वाला होश खो बैठा और धर्म व्यवस्था के विपरित खुद को आराध्य मान लेने का नारा दे बैठी।कॉंग्रेस के रणनीति कार राम नाम को आत्मसात करने का , राजनीति के लिए ही सही,  ड्रामा तक ठीक से नहीं कर सके।" मैं भी मर्यादा पुरुषोत्तम हूँ " कह कर कॉंग्रेस ने अपने कद और काबिलियत से कहीं बड़ी बात कह दी है जो भक्तमार्गी ग्रामीण भारतीय समाज में, और शहरों में भी, मुश्किल से गले उतरती  है। 

RB

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भानू चौबे


* पूर्व संयुक्त सम्पादक , नई दुनिया, इंदौर 

* सम्पादकीय विभाग के विभिन्न विषयों का कार्य अनुभव , विशेषत: समाचार , समाचार विश्लेशण , राजनीतिक विश्लेशण , रिपोर्टिंग, साक्षात्कार 

*पंद्रह वर्ष से अधिक समय नई दुनिया के सम्पादकीय  लेखन  का स्वतंत्र प्रभार । 

* वर्तमान : सुबह सवेरे दैनिक ,भोपाल में सम्पादकीय लेखन ।