सरकार नहीं सामाजिक शक्ति से ही रक्षा और प्रगति

सरकार नहीं सामाजिक शक्ति से ही रक्षा और प्रगति

मीडियावाला.इन।

महर्षि अरविन्द ने लगभग एक सौ साल पहले कहा था- 'राष्ट्रवाद एक धर्म है| राष्ट्रवाद की शक्ति ही ईश्वर की शक्ति है| भारत का अंत नहीं हो सकता , क्योकि मानव विश्व के जितने हिस्से हैं, उनमें केवल भारत ही है, जिसके लिए भविष्य निर्दिष्ट और सुरक्षित है| यह मानव जाति के भविष्य के लिए अत्यावश्यक है|' कोरोना संकट से संघर्ष और दुनिया के सबसे संपन्न देशों के मुकाबले सुधरी स्थिति तथा सरकार के साथ समाज का आदर्श तालमेल महर्षिजी की बात को सार्थक करता दिखता है| कोरोना पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के एक आव्हान पर सम्पूर्ण भारत में लोक आउट से लेकर पी एम केयर के लिए हजारों करोड़ों रुपयों का दान हो या अब अयोध्या में श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए सरकार के खजाने के बजाय देश के साठ- पैंसठ करोड़ परिवारों से संपर्क कर धन संग्रह का अभियान भारतीय सामाजिक समरूपता और शक्ति का परिचायक है| इन प्रयासों को दलीय अथवा संकीर्ण साम्प्रदायिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें सत्ता की अपेक्षा समाज को श्रेय जाता है|

ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी में परिवार के सदस्यों और मित्रों से पिछले महीनों के दौरान अधिक संपर्क रहा और कोरोना काल में अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया पर भी नज़र रही| इसलिए भारत की स्थितियों से तुलना करना संभव हो रहा है| गंभीर राजनीतिक टकराव, आर्थिक समस्याओं-चुनौतियों, सीमा पर पाकिस्तान चीन के सैन्य और आतंकवादी दबावों के बावजूद इस समय भारत पूरे विश्व में सर्वाधिक समझदार, चतुर और चिकित्सा के क्षेत्र में भी अग्रणी साबित हो रहा है| कोरोना महामारी से मुक्ति के अभियान में अपनी वैक्सीन बनाकर पहले  तीन करोड़ लोगों के लिए न केवल काम शुरू हो गया, वरन ब्राजील सहित अनेक देशों को वैक्सीन निर्यात करने की तैयारी है | उधर ब्रिटेन और अमेरिका में हाहाकार मचा हुआ है |इसे भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक सफलता कही जाएगी कि जहां अमेरिका में भारी तनाव के बाद  नए  राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए बीस हजार सैनकों को तैनात करना पड़ रहा है , वहां जम्मू कश्मीर में आतंकवादी प्रयासों ,कोरोना संकट के बावजूद सुदूर गांवों तक के लाखों लोगों ने जिला विकास परिषदों के चुनाव में शांतिपूर्ण ढंग से मतदान किया , विभिन्न दलों के उम्मीदवारों को सफलता मिली और सारे मतभेदों के रहते हुए किसी बड़ी गड़बड़ी की शिकायत नहीं की | मध्य प्रदेश में भी बड़ी संख्या में विधान सभा के लिए उप चुनाव हुए और सबने नतीजों को सहर्ष स्वीकारा| 

हमारे पाठक संभवतः भारत की शक्ति के गुणगान को थोड़ा अतिरेक कह सकते हैं, लेकिन क्या केवल अपने देश, समाज, धर्म, सरकार या विपक्ष, चिकित्सा अथवा सेना के सामर्थ्य पर आशंका, आलोचना, निंदा करना ही सही लेखन और पत्रकारिता है| समाज में आत्म विश्वास पैदा करना, सामाजिक सौहार्द को सराहना, आत्म निर्भरता के लिए विभिन्न क्षेत्रों में हो रही उपलब्धियों के बजाय केवल अति संपन्न पश्चिमी देशों अथवा तेल उत्पादक खाड़ी के देशों या चीन के तानाशाही वाले आर्थिक साम्राज्य की प्रशंसा का आलाप किया जाए? बिकाऊ माल की तरह भारत में सामाजिक भेदभाव के अतिरंजित पूर्वाग्रही समाचार या विवरणों-लेखों या फोटो इत्यादि के विदेशी  कुप्रचार में अपने ही कुछ स्वार्थी भाइयों का योगदान रहता है| अन्यथा कोरोना काल में अयोध्या में लाखों दीपों के साथ उत्सव, वाराणसी में गंगा का किनारा और विश्वनाथ मंदिर तथा सारनाथ में सैकड़ों लोगों के साथ उत्सव के आयोजन, दीवाली, ईद और क्रिसमस को सद्भावना के साथ मनाया जाना गौरव का विषय क्यों नहीं माना जाए? 
 पी एम केयर से भी एक कदम आगे है - अयोध्या के  श्री राम जन्म भूमि  मंदिर निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से एक सौ रुपया भी नहीं लेने का निर्णय | पी एम केयर से कोरोना संकट में सहायता के लिए सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं की व्यवस्था हुई , जो आगे काम आती रहेगी | लेकिन सरकार का काम मंदिर , मस्जिद , चर्च , गुरुद्वारे बनाना नहीं है | फिर

अयोध्या के मंदिर निर्माण में केवल हिन्दू धर्मावलम्बी ही योगदान दे रहे हैं, स्थानीय मुस्लिमों के अलावा देश के अन्य भागों के लोग भी सामाजिक समरसता तथा भारतीयता के नाते सहयोग दे रहे हैं| श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निधि समर्पण अभिययाँ के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा मुस्लिम लोगों ने भी पांच लाख रुपयों का दान दिया है| मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष देश के वरिष्ठतम सेवा निवृत्त अधिकारी नृपेंद्र मिश्र और न्यास से जुड़े सभी संगठनों की इस पहल का स्वागत होना चाहिए कि इस अभियान में सभी धर्मों, वर्गों, जातियों के करोड़ों लोगों से संपर्क कर उनकी श्रद्धा तथा क्षमता के अनुसार दस रूपये से लेकर दो हजार या अधिक के दान को एकत्र कर निर्माण होगा| इसके लिए अधिकृत कूपन दिए जायेंगे और आय खर्च का पूरा हिसाब रखा जायेगा| इस तरह के राष्ट्रीय अभियान में अधिकाधिक लोगों की भागेदारी तथा पारदर्शिता बहुत आवश्यक है| फिर इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अयोध्या के इस मंदिर निर्माण से न केवल फिलहाल क्षेत्र का विकास होगा और रोजगार मिलेगा, बल्कि आने वाली शताब्दी तक पर्यटन से स्थाई रूप से प्रगति, रोजगार और सद्भावना बनाए रखने का लाभ मिलेगा| गरीबों और अरबपतियों में भेद किये बिना राजनीति से हटकर समाज और राष्ट्र को एकजुट रखना ही तो असली कर्तव्य, धर्म और राष्ट्रवाद है| भारतीय संस्कृति वस्तुतः मानवीय संस्कृति है, क्योंकि उसके आधार मूल्य सार्वभौम हैं| भौतिक विविधता, जातीय रंग रूपगत भिन्नता के रहते भी समाज समरस बन सकता है | संत दादू दयालजी ने दशकों पहले  एक साखी में लिखा था- "दोनों भाई हाथ पग , दोनों भाई कान| दोनों भाई नैन हैं, हिन्दू-मुसलमान|”
         ( लेखक पद्म श्री से सम्मानित और एडिटर्स गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष हैं )

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आलोक मेहता

पद्मश्री (भारत सरकार) से सम्मानित, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार-पत्रकार सम्मान-2006, दिल्ली हिन्दी अकादमी द्वारा श्रेष्ठ लेखन पुरस्कार-1999 पद्मश्री आलोक मेहता हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे "नई दुनिया" के प्रधान सम्पादक हैं।

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