कांग्रेस में संगठन चलाने नए मनमोहन सिंह का अनुसंधान जारी है

कांग्रेस में संगठन चलाने नए मनमोहन सिंह का अनुसंधान जारी है

 

मीडियावाला.इन|
...तो कांग्रेस के भीतर मंथन शुरू हो गया है, इस्तीफों का दौर जारी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद पूरी कांग्रेस में ऊपर से नीचे तक कोई बड़े बदलाव होने वाले हैं। यह तो वक्त बताएगा कि बदलाव कांग्रेस को कितनी ऊर्जा देता है, मगर जो चर्चा चल रही है उससे लगता है कि कांग्रेस पार्टी संगठन चलाने के लिए किसी मनमोहनसिंह की तलाश में है। ऐसे कई मनमोहन सिंह पर चर्चा अंदरखाने चल रही है। अशोक गेहलोत से लेकर सुशील कुमार शिंदे और हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी राजनीतिक पंडितों की सूची में शामिल हैं। राहुल गांधी पराजय से बड़े खफा हैं। संसद में अनमने मन से पहुंचते हैं और जो उनसे मिलने जाता है मान-मनौव्वल करता है कि आप पार्टी अध्यक्ष बने रहें, हम आपके साथ हैं। जो लोग कहते हैं कि हम आपके साथ हैं वे कांग्रेस पार्टी के साथ कब होंगे यह भी एक बड़ा सवाल है। चुनाव और चुनाव के बीच पार्टी के भीतर तमाम समीकरणों को बनते-बनाते नेता चुनाव आने पर टिकट संग्राम में पार्टी की रीति-नीतियों और सफलता के अवसर को दरकिनार कर निहित स्वार्थ में लग जाते हैं। इसलिए जो राहुल को कुर्सी पर बनाए रखना चाहते हैं वे  राहुल के साथ तो हैं, पर कांग्रेस के साथ नहीं हैं, क्योंकि जिनको वे टिकट दिलाते हैं वे हार जाते हैं और जिनको टिकट से वंचित कर देते हैं वे जमीन पर काम करन वाले कार्यकर्ता होते हैं। इसलिए अपने स्वार्थ में लिप्त नेताओं को गुटबाजी की ज्यादा चिंता होती, बजाय पार्टी और कार्यकर्ताओं के। हम बात कर रहे थे कांग्रेस किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो पार्टी को ठीक उसी तरह चला सके जैसे मनमोहन सिंह ने 10 साल यूपीए सरकार चलाई। नेहरू-गांधी परिवार के हित ऐसे ही किसी व्यक्ति में हैं। सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद तक नहीं पहुंचने और नरसिंहाराव को प्रधानमंत्री बनाकर जो अनुभव इस परिवार को हुआ उसने मनमोहन सिंह नामक व्यक्तित्व का अनुसंधान किया था। ठीक इसी तरह कांग्रेस पार्टी में ऐसे व्यक्ति का अनुसंधान जारी है जो पार्टी का अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से इतर दिखे, पर उसके हितों के खिलाफ न हो। यह पहली बार नहीं होगा, पहले भी इंदिरा गांधी जब पार्टी के भीतर संघर्षों से जूझ रही थीं तो उन्होंने शंकरदयाल शर्मा को अध्यक्ष बनाकर अपने हितों को साधा था। कांग्रेस पार्टी में यह परंपरा नई नहीं होगी कि इस परिवार के अलावा कोई व्यक्ति अध्यक्ष बने। वैसे भी कांग्रेस शिखर नेतृत्व से बगावत करने वाले किसी व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर स्वीकार करने के चरित्र वाली पार्टी नहीं है। स्वयं महात्मा गांधी ने भी सुभाषचंद्र बोस के अध्यक्ष बनने पर नेहरू के हितों के लिए जो कुछ किया था वह सबको पता है। इसलिए प्रियंका गांधी और राहुल गांधी में से कोई अध्यक्ष नहीं बनता है तो ऐसा आदमी अध्यक्ष नहीं बनेगा जो पार्टी को इस परिवार से इतर खड़ा करने का साहस रखता हो। यानी दिल्ली में सोनिया, राहुल और प्रियंका के इर्द-गिर्द इकट्ठा हो रहे कांग्रेस नेता पार्टी के लिए मनमोहन सिंह जैसे व्यक्तित्व के अनुसंधान में लगे हैं। यदि यह नहीं होता है तो फिर दरबारी राहुल को अध्यक्ष पद छोडऩे नहीं देंगे।

0 comments      

Add Comment


सतीश जोशी

पिछले चालीस वर्षों से पत्रकारिता कर रहे, राजनीतिक विश्लेषक, टिप्पणीकार, नईदुनिया, भास्कर, चौथा संसार सहित प्रदेश के कई समाचार पत्रों के लिए लेखन। 


आदिवासी जनजीवन पर एक पुस्तक, राजनीतिक विश्लेषण पर पांच पुस्तकें, राज रंग, राज रस, राज द्रोह, राज सत्ता, राज पाट।  


रक्षा संवावदाता, रिपोर्टिंग के क्षेत्र में खोजी पत्रकारिता में महारथ हांसिल। प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में सांध्य दैनिक 6pm के समूह सम्पादक, इंदौर में कार्यरत।


संपर्क : 9425062606